कर्नाटक वोटर लिस्ट में बड़ा बदलाव, करीब 99 लाख नाम कम हुए
कर्नाटक की नई मतदाता सूची जारी होने के बाद चुनावी आंकड़ों में बड़ा बदलाव सामने आया है। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य की अंतिम वोटर लिस्ट में करीब 99.32 लाख मतदाता कम दर्ज किए गए हैं।
इस बदलाव के बाद राज्य में मतदाताओं की संख्या 5.54 करोड़ से घटकर लगभग 4.55 करोड़ रह गई है। चुनाव अधिकारियों के अनुसार, सूची में संशोधन का उद्देश्य मतदाता रिकॉर्ड का सत्यापन करना और अपात्र प्रविष्टियों को हटाना था। हालांकि, बड़ी संख्या में नाम कम होने के बाद पात्र मतदाताओं के अधिकारों और नामों की जांच को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।
कर्नाटक वोटर लिस्ट में कितने नाम कम हुए?
कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के अनुसार, विशेष पुनरीक्षण से पहले राज्य में 5,54,32,314 पंजीकृत मतदाता थे। 27 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में यह संख्या घटकर 4,55,00,011 रह गई।
इस तरह दोनों सूचियों के बीच लगभग 99.32 लाख मतदाताओं का अंतर सामने आया है। यह राज्य के कुल मतदाता आधार में लगभग 18 प्रतिशत की कमी के बराबर है।
हालांकि, इस आंकड़े को समझते समय एक महत्वपूर्ण अंतर ध्यान में रखना चाहिए। मतदाताओं की संख्या में कुल कमी और पुनरीक्षण के अंतिम चरण में हटाए गए नाम एक ही चीज नहीं हैं।
अंतिम सूची में कितने पुरुष और महिला मतदाता?
अंतिम मतदाता सूची में पुरुषों, महिलाओं और तीसरे लिंग के मतदाताओं का विवरण भी जारी किया गया है।
- पुरुष मतदाता: लगभग 2.25 करोड़
- महिला मतदाता: लगभग 2.29 करोड़
- तीसरे लिंग के मतदाता: 2,841
आंकड़ों के अनुसार, अंतिम सूची में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुष मतदाताओं से अधिक है। सूची में 18 से 19 वर्ष की आयु वाले 6.83 लाख से अधिक मतदाता भी शामिल हैं।
ये आंकड़े बताते हैं कि पुनरीक्षण के बाद भी कर्नाटक में बड़ी संख्या में मतदाता पंजीकृत हैं। लेकिन जिन लोगों के नाम सूची से हटे हैं, उनके लिए अपनी पात्रता और पंजीकरण की स्थिति जांचना जरूरी है।
SIR प्रक्रिया में क्यों बदली मतदाता सूची?
विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR का उद्देश्य मतदाता सूची में दर्ज नामों और विवरणों का दोबारा सत्यापन करना है। इस प्रक्रिया में बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) ने मतदाताओं के पते और उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच की।
कर्नाटक में यह प्रक्रिया 30 जून 2026 को शुरू हुई थी। इसके तहत घर-घर जाकर मतदाताओं के विवरण जुटाए गए और पुराने रिकॉर्ड के साथ उनका मिलान किया गया।
इस दौरान कुछ मतदाता अपने दर्ज पते पर नहीं मिले। कुछ के नाम दूसरी जगह स्थानांतरित होने, मृत्यु या एक से अधिक प्रविष्टियां होने जैसी वजहों से जांच के दायरे में आए।
शुरुआती सूची और अंतिम सूची में क्या अंतर है?
24 अगस्त 2026 को जारी मसौदा मतदाता सूची में मतदाताओं की संख्या घटकर लगभग 4.46 करोड़ रह गई थी। उस समय करीब 1.08 करोड़ नाम सूची में शामिल नहीं थे।
इसके बाद दावे और आपत्तियां दर्ज करने का मौका दिया गया। इस चरण में मतदाताओं के विवरण की जांच की गई और पात्रता साबित करने वाले मामलों पर कार्रवाई हुई।
अंतिम सूची में लगभग 8.64 लाख ऐसे मतदाता वापस शामिल किए गए, जिनके नाम मसौदा सूची में नहीं थे। इसके अलावा, दावे और आपत्तियों की अवधि के दौरान नए नाम जोड़ने और विवरण सुधारने के आवेदन भी स्वीकार किए गए।
किन कारणों से हटाए गए मतदाताओं के नाम?
मतदाता सूची से नाम हटने के पीछे अलग-अलग कारण बताए गए हैं। इनमें स्थायी रूप से दूसरी जगह चले जाना, निर्धारित पते पर नहीं मिलना, मृत्यु और एक से अधिक जगह नाम दर्ज होना शामिल हैं।
निर्वाचन अधिकारियों के आंकड़ों के अनुसार, मसौदा सूची में सबसे बड़ी श्रेणी उन मतदाताओं की थी, जिन्हें स्थायी रूप से दूसरी जगह स्थानांतरित माना गया या सत्यापन के समय उनके पते पर नहीं पाया गया।
इस श्रेणी में लगभग 80.62 लाख नाम शामिल थे। इसके अलावा, मृत मतदाताओं, दोहरी प्रविष्टियों और अन्य मामलों को भी सूची के पुनरीक्षण में शामिल किया गया।
क्या हटाए गए सभी नाम फर्जी थे?
नहीं, केवल नाम हटने के आधार पर किसी व्यक्ति को फर्जी मतदाता नहीं कहा जा सकता। मतदाता सूची से नाम हटने के कई प्रशासनिक कारण हो सकते हैं।
उदाहरण के लिए, कोई व्यक्ति रोजगार के लिए दूसरे शहर में चला गया हो या सत्यापन के दौरान घर पर मौजूद न रहा हो। ऐसे मामलों में यह जांचना जरूरी है कि व्यक्ति की पात्रता और वास्तविक निवास की स्थिति क्या है।
इसी कारण निर्वाचन अधिकारियों ने पात्र मतदाताओं से अपनी जानकारी जांचने की अपील की है। यदि किसी योग्य व्यक्ति का नाम सूची में नहीं है, तो वह निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उसे शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकता है।
दावे और आपत्तियों के दौरान कितने नाम जुड़े?
मसौदा सूची जारी होने के बाद मतदाताओं को अपने नाम और विवरण की जांच करने का अवसर दिया गया था। दावे और आपत्तियों की अवधि 24 अगस्त से 23 सितंबर 2026 तक चली।
इस दौरान नए नाम जोड़ने, पुराने रिकॉर्ड में सुधार करने और आपत्तियां दर्ज कराने के लिए आवेदन प्राप्त हुए।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार:
- लगभग 10.08 लाख मतदाता अंतिम सूची में जोड़े गए।
- लगभग 1.88 लाख नाम दावे और आपत्तियों के चरण में हटाए गए।
- लगभग 8.96 लाख प्रविष्टियों में संशोधन किया गया।
इन आंकड़ों को कुल 99.32 लाख की कमी से अलग समझना जरूरी है। कुल अंतर पुनरीक्षण से पहले और अंतिम सूची के बीच का है, जबकि 1.88 लाख नामों का आंकड़ा अंतिम चरण में हुई हटाने की कार्रवाई से संबंधित है।
कर्नाटक वोटर लिस्ट में अपना नाम कैसे जांचें?
जिन लोगों को अपना नाम हटने की आशंका है, उन्हें सबसे पहले अंतिम मतदाता सूची में अपनी जानकारी जांचनी चाहिए। केवल ऑनलाइन खोज में नाम नहीं मिलने से तुरंत यह निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए कि नाम स्थायी रूप से हटा दिया गया है।
नाम जांचने के लिए भारत निर्वाचन आयोग के आधिकारिक मतदाता सेवा पोर्टल का इस्तेमाल किया जा सकता है।
इसके लिए इन चरणों का पालन करें:
- निर्वाचन आयोग के मतदाता सेवा पोर्टल पर जाएं।
- मतदाता विवरण खोजने का विकल्प चुनें।
- अपना EPIC नंबर यानी वोटर आईडी नंबर दर्ज करें या उपलब्ध विकल्प के अनुसार व्यक्तिगत विवरण भरें।
- जरूरी जानकारी और कैप्चा पूरा करें।
- स्क्रीन पर दिखाई देने वाले रिकॉर्ड में अपना नाम और मतदान संबंधी विवरण जांचें।
मतदाता अंतिम सूची की PDF भी डाउनलोड कर सकते हैं। इसके लिए कर्नाटक, अपना जिला, विधानसभा क्षेत्र और संबंधित मतदान केंद्र चुनकर सूची देखी जा सकती है।
आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से विवरण जांचने के बाद मतदाता अपने मतदान केंद्र और सूची में दर्ज क्रमांक की भी पुष्टि कर सकते हैं।
वोटर लिस्ट में नाम नहीं मिलने पर क्या करें?
यदि किसी पात्र मतदाता का नाम अंतिम सूची में नहीं मिलता है, तो उसे संबंधित बूथ लेवल अधिकारी (BLO) या निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) से संपर्क करना चाहिए।
नाम शामिल कराने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत फॉर्म 6 भरना पड़ सकता है। आवेदन के साथ जरूरी पहचान और निवास संबंधी दस्तावेज भी मांगे जा सकते हैं।
आवेदन करने से पहले संबंधित अधिकारी से यह पुष्टि कर लें कि आपके मामले में कौन-सी प्रक्रिया लागू होती है। आवेदन जमा करने के बाद उसकी स्थिति और संबंधित विभाग से मिलने वाली सूचना पर नजर रखें।
मतदाताओं को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि आवेदन देने का मतलब नाम तुरंत सूची में जुड़ जाना नहीं है। आवेदन की जांच और स्वीकृति के बाद ही पंजीकरण की स्थिति स्पष्ट होगी।
बड़े बदलाव के बाद मतदाताओं के लिए क्या जरूरी है?
कर्नाटक की अंतिम मतदाता सूची में बड़ी संख्या में नाम कम होने के बाद प्रत्येक पात्र नागरिक के लिए अपने मतदाता विवरण की जांच करना महत्वपूर्ण हो गया है।
विशेष रूप से वे लोग अपनी जानकारी जरूर जांचें, जिन्होंने हाल में घर बदला है, दूसरे शहर में काम करने गए हैं या जिनके परिवार के किसी सदस्य का नाम मसौदा सूची में नहीं मिला था।
निर्वाचन सूची में सही नाम, पता और मतदान केंद्र दर्ज होना चुनाव में भागीदारी के लिए आवश्यक है। किसी भी गलती को समय रहते संबंधित अधिकारी के सामने उठाना बेहतर रहेगा।
निष्कर्ष
कर्नाटक वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद मतदाताओं की संख्या 5.54 करोड़ से घटकर लगभग 4.55 करोड़ रह गई है। अंतिम सूची में करीब 99.32 लाख मतदाताओं की कमी दर्ज हुई है। इस बदलाव में स्थानांतरण, अनुपस्थित मतदाता, मृत व्यक्तियों के रिकॉर्ड, दोहरी प्रविष्टियों और अन्य सत्यापन संबंधी मामलों की भूमिका रही है।
हालांकि, सूची से नाम कम होने का अर्थ यह नहीं है कि सभी प्रभावित लोग अपात्र थे। पात्र मतदाताओं को अपनी जानकारी जांचनी चाहिए और नाम नहीं मिलने पर निर्वाचन अधिकारियों से संपर्क करना चाहिए।
मतदाता सूची में नाम की पुष्टि करना हर पात्र नागरिक के लिए जरूरी है, क्योंकि मतदान का अधिकार इस्तेमाल करने के लिए सही पंजीकरण महत्वपूर्ण है।

