चक्रवात ‘अर्नब’ का मध्य प्रदेश में असर, 33 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट; किसानों की बढ़ी चिंता
मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद एक बार फिर मौसम ने करवट ले ली है। बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवात ‘अर्नब’ के प्रभाव से प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश और तेज हवाओं का दौर जारी है। मौसम विभाग ने ग्वालियर, जबलपुर और रीवा समेत 33 जिलों में आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया है।
मौसम में आए इस बदलाव से तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, बेमौसम बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में खड़ी धान की फसल और मंडियों में खुले में रखी कृषि उपज को नुकसान पहुंचने का खतरा है। मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में 2 नवंबर तक इस मौसमी सिस्टम का प्रभाव बना रह सकता है।
Cyclone Arnab MP: 33 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट
चक्रवात अर्नब के प्रभाव से मध्य प्रदेश के मौसम में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है। मौसम विभाग ने शुक्रवार 30 अक्टूबर को प्रदेश के 33 जिलों में तेज हवाओं और हल्की से मध्यम बारिश की चेतावनी जारी की है।
इन इलाकों में हवा की रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। इसके साथ ही गरज-चमक और बिजली गिरने की आशंका भी जताई गई है।
अलर्ट वाले जिलों में राजगढ़, विदिशा, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी शामिल हैं।
इन जिलों में रहने वाले लोगों को मौसम विभाग की चेतावनियों पर ध्यान देने और खराब मौसम के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
भोपाल और इंदौर समेत 22 जिलों में मौसम अपेक्षाकृत साफ
जहां प्रदेश के 33 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट है, वहीं दूसरे हिस्सों में मौसम अपेक्षाकृत साफ रहने का अनुमान है।
भोपाल, रायसेन, सीहोर, नरसिंहपुर, सिवनी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, बैतूल, नर्मदापुरम, हरदा, शाजापुर, देवास, इंदौर, उज्जैन, रतलाम, झाबुआ, आलीराजपुर, धार, बड़वानी, खरगोन, खंडवा और बुरहानपुर में धूप निकलने की संभावना जताई गई है।
हालांकि, कुछ क्षेत्रों में बादल छाए रह सकते हैं। मौसम की स्थिति में बदलाव होने पर स्थानीय स्तर पर बारिश भी हो सकती है।
इसलिए लोगों को अपने जिले के मौसम पूर्वानुमान पर नजर रखनी चाहिए। खासकर ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों और किसानों को मौसम संबंधी चेतावनियों को गंभीरता से लेने की जरूरत है।
2 नवंबर तक जारी रह सकता है बारिश का दौर
मौसम विभाग के अनुसार, चक्रवात अर्नब का प्रभाव प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक बना रह सकता है। 2 नवंबर तक अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश और तेज हवाओं की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।
शुरुआत में पूर्वी मध्य प्रदेश के जिलों में इसका प्रभाव अधिक रहने की संभावना है। इसके बाद उत्तर-पूर्वी हिस्सों में भी मौसम बदल सकता है।
बंगाल की खाड़ी से सक्रिय हुआ यह मौसमी सिस्टम आगे बढ़ते हुए कमजोर होकर कम दबाव के क्षेत्र में बदल चुका है। इसके बावजूद इससे जुड़ी नमी और हवाओं के कारण प्रदेश में बारिश की गतिविधियां जारी हैं।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, अक्टूबर के अंतिम दिनों में इस तरह की बारिश से तापमान में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। दिन के साथ रात के तापमान पर भी इसका असर पड़ने की संभावना है।
तापमान में 2 डिग्री तक गिरावट, बढ़ने लगी ठंड
बारिश और ठंडी हवाओं का असर अब प्रदेश के तापमान पर भी दिखाई देने लगा है। गुरुवार को कई शहरों में दिन के अधिकतम तापमान में करीब 2 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज की गई।
बादल छाए रहने के कारण धूप का प्रभाव कम हुआ है। वहीं, बारिश के बाद चलने वाली ठंडी हवाओं से सुबह और शाम के समय मौसम में ठंडक महसूस होने लगी है।
पचमढ़ी में न्यूनतम तापमान 15.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा नौगांव, अमरकंटक और कुछ अन्य क्षेत्रों में भी रात के तापमान में गिरावट देखने को मिली।
मौसम का यह बदलाव नवंबर की शुरुआत में ठंड बढ़ने के संकेत दे रहा है। हालांकि, बारिश का दौर खत्म होने के बाद तापमान में फिर बदलाव हो सकता है।
बेमौसम बारिश से किसानों की बढ़ी परेशानी
चक्रवात अर्नब का असर अब किसानों की चिंता बढ़ा रहा है। अक्टूबर के आखिरी दिनों में प्रदेश के कई क्षेत्रों में खरीफ फसलों की कटाई और उपज को मंडियों तक पहुंचाने का काम चल रहा है।
ऐसे में अचानक हुई बारिश से खेतों और मंडियों में रखी फसल प्रभावित हो सकती है।
पांढुर्णा की कृषि मंडी में खुले में रखे मक्के के ढेर बारिश में भीग गए। इससे हजारों क्विंटल मक्का खराब होने की आशंका जताई गई है।
वहीं, छिंदवाड़ा और आसपास के क्षेत्रों में धान की फसल अभी खेतों में खड़ी है। लगातार बारिश होने पर धान के दानों की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा फसल की कटाई और सुखाने का काम भी रुक सकता है।
रायसेन में भी किसानों को अपनी उपज बचाने के लिए परेशानी का सामना करना पड़ा। दशहरा मैदान में धान लेकर पहुंचे किसानों को बारिश के कारण फसल सुरक्षित रखने की मशक्कत करनी पड़ी।
धान और मक्का की फसल पर सबसे ज्यादा असर की आशंका
प्रदेश के कई जिलों में इस समय खरीफ फसलों की कटाई का काम चल रहा है। ऐसे में बारिश का समय किसानों के लिए महत्वपूर्ण है।
खेतों में खड़ी धान की फसल में नमी बढ़ने से दानों की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। वहीं, कटाई के बाद खुले में रखी उपज भी बारिश में भीग सकती है।
मक्का की फसल के मामले में भी भंडारण और सुखाने की समस्या सामने आ सकती है। यदि अनाज में नमी अधिक रहती है तो उसके खराब होने का खतरा बढ़ जाता है।
इसके अलावा सोयाबीन और दूसरी खरीफ फसलों की कटाई और मंडियों में बिक्री की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है।
कृषि विशेषज्ञों की सलाह है कि किसान मौसम की स्थिति देखकर ही कटाई और भंडारण का काम करें। खेतों और मंडियों में रखी उपज को तिरपाल से ढककर सुरक्षित रखना जरूरी है।
किसानों और आम लोगों के लिए मौसम विभाग की सलाह
तेज हवाओं, बारिश और बिजली गिरने की आशंका को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। मौसम खराब होने के दौरान खुले स्थानों पर रुकने से बचना चाहिए।
किसानों को भी अपनी उपज सुरक्षित रखने के लिए जरूरी इंतजाम करने चाहिए।
कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां इस प्रकार हैं:
- बारिश की संभावना होने पर कटी हुई फसल को खुले में न छोड़ें।
- मंडियों में रखे अनाज को तिरपाल से अच्छी तरह ढकें।
- खेतों में पानी निकासी की उचित व्यवस्था रखें।
- आंधी के दौरान पेड़ों और बिजली के खंभों के नीचे खड़े न हों।
- बिजली चमकने के समय खुले मैदान में जाने से बचें।
- खराब मौसम में अनावश्यक यात्रा करने से बचें।
इसके अलावा किसानों को मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार कृषि कार्यों की योजना बनानी चाहिए।
निष्कर्ष
चक्रवात अर्नब के प्रभाव से मध्य प्रदेश में अक्टूबर के अंतिम दिनों में मौसम का मिजाज बदल गया है। 33 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट जारी होने से लोगों की चिंता बढ़ी है। वहीं, 2 नवंबर तक बारिश का दौर जारी रहने की संभावना जताई गई है।
बेमौसम बारिश का सबसे अधिक असर किसानों के कृषि कार्यों पर पड़ सकता है। धान और मक्का की फसल को सुरक्षित रखना इस समय बड़ी चुनौती है। ऐसे में प्रशासन, कृषि विभाग और किसानों को मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखने की जरूरत है।

