देवास में शराब तस्करी रोकने गए TI दिलीप पुरी को ट्रक से कुचला, इलाज के दौरान मौत
मध्य प्रदेश के देवास जिले से एक बेहद दुखद घटना सामने आई है। यहां अवैध शराब की तस्करी रोकने पहुंचे खातेगांव थाना प्रभारी दिलीप पुरी की ट्रक से कुचलने के बाद मौत हो गई। वह पुलिस टीम के साथ संदिग्ध वाहन की जांच करने पहुंचे थे। इसी दौरान ट्रक चालक ने कथित तौर पर वाहन रोकने के बजाय उसे आगे बढ़ा दिया। ट्रक का पिछला पहिया थाना प्रभारी के ऊपर से गुजर गया।
घटना के बाद गंभीर रूप से घायल टीआई को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों ने करीब दो घंटे तक उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। इस घटना से पुलिस विभाग में शोक का माहौल है। वहीं, अवैध शराब की तस्करी और उससे जुड़े नेटवर्क को लेकर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
देवास के खातेगांव में देर रात हुई घटना
जानकारी के मुताबिक, यह घटना 2 नवंबर 2026 की देर रात देवास जिले के खातेगांव क्षेत्र में इंदौर-बैतूल हाईवे पर हुई। खातेगांव थाना प्रभारी दिलीप पुरी को इलाके में अवैध शराब की तस्करी की सूचना मिली थी। इसके बाद वह पुलिस टीम के साथ संदिग्ध वाहन को पकड़ने के लिए मौके पर पहुंचे।
बताया जा रहा है कि पुलिस को सूचना मिली थी कि हरदा की तरफ से एक वाहन में अवैध शराब ले जाई जा रही है। यह वाहन इंदौर होते हुए आगे जाने वाला था। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने उसे रोकने के लिए विशेष अभियान शुरू किया।
देर रात करीब 1:30 बजे पुलिस टीम हाईवे पर पहुंची। वहां एक संदिग्ध ट्रक सड़क किनारे खड़ा मिला। जब थाना प्रभारी दिलीप पुरी ने चालक को नीचे उतरने के लिए कहा, तो उसने कथित तौर पर वाहन लेकर भागने की कोशिश की।
ट्रक के पिछले पहिये के नीचे आए थाना प्रभारी
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, जब दिलीप पुरी ट्रक चालक से पूछताछ करने पहुंचे, तब चालक ने वाहन आगे बढ़ा दिया। इस दौरान ट्रक डिवाइडर पर चढ़ाकर निकलने की कोशिश की गई।
इसी दौरान थाना प्रभारी नीचे गिर गए और ट्रक का पिछला पहिया उनके ऊपर से गुजर गया। हादसे में उनके शरीर पर गंभीर चोटें आईं और काफी खून बह गया।
मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने तुरंत उन्हें अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने के लिए सीपीआर सहित अन्य जरूरी उपचार किए। करीब दो घंटे तक इलाज चलने के बावजूद दिलीप पुरी की जान नहीं बचाई जा सकी।
इस घटना ने पुलिस विभाग को झकझोर दिया है। अवैध शराब के कारोबार पर कार्रवाई करने पहुंचे एक पुलिस अधिकारी की इस तरह मौत होना कानून व्यवस्था और तस्करी के नेटवर्क को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
अवैध शराब पकड़ने के लिए बनाई गई थीं पांच विशेष टीमें
इस कार्रवाई को लेकर पुलिस ने विशेष तैयारी की थी। देवास के पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा के निर्देश पर अवैध शराब से भरे संदिग्ध वाहन को पकड़ने के लिए पांच विशेष टीमें गठित की गई थीं।
इन टीमों में खातेगांव, कन्नौद और सतवास क्षेत्र के पुलिस अधिकारी और कर्मचारी शामिल थे। पुलिस को सूचना मिली थी कि संदिग्ध वाहन के जरिए बड़ी मात्रा में शराब का परिवहन किया जा रहा है।
इसके बाद अलग-अलग स्थानों पर निगरानी और चेकिंग की व्यवस्था की गई। पुलिस टीमें संदिग्ध वाहन को पकड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही थीं।
इसी अभियान के दौरान खातेगांव थाना प्रभारी दिलीप पुरी की ट्रक से कुचलने की घटना हुई। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि वाहन कहां से आया था और शराब किस स्थान पर पहुंचाई जानी थी।
ट्रक में छिपाकर रखी गई थी शराब
घटना के बाद जब वाहन की जांच की गई, तो उसमें शराब की पेटियां मिलने की जानकारी सामने आई। आबकारी विभाग की उपनिरीक्षक पूजा गेहलोत के अनुसार, शराब को ट्रक के एक गुप्त हिस्से में रखा गया था।
प्रारंभिक जांच में वाहन के पास शराब परिवहन का वैध परमिट भी नहीं मिला। इससे अवैध परिवहन की आशंका को बल मिला है।
बताया जा रहा है कि वाहन हरदा की तरफ से खातेगांव की ओर आ रहा था। हालांकि, शराब की वास्तविक आपूर्ति कहां से हुई और इसे कहां पहुंचाया जाना था, इसकी जांच की जा रही है।
पुलिस और आबकारी विभाग इस बात की भी पड़ताल कर रहे हैं कि इस परिवहन के पीछे कौन लोग शामिल थे। केवल वाहन चालक तक कार्रवाई सीमित न रहे, इसके लिए पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा रही है।
घटना के बाद ट्रक चालक को लेकर क्या जानकारी सामने आई?
घटना के बाद ट्रक चालक वाहन लेकर वहां से निकल गया। पुलिस ने वाहन का पीछा किया और संदलपुर क्षेत्र में ट्रक बरामद किया।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने ट्रक जब्त कर चालक को गिरफ्तार किया है। हालांकि, घटना में अन्य लोगों की भूमिका और शराब तस्करी से जुड़े नेटवर्क की जांच अभी जारी है।
इस मामले में पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि चालक अकेले काम कर रहा था या उसके पीछे कोई संगठित गिरोह था।
इसके अलावा वाहन में मिली शराब की मात्रा, उसके स्रोत और परिवहन से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। पुलिस की जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
देवास में पहले भी सामने आ चुका है अवैध शराब का मामला
देवास जिले में अवैध शराब का मुद्दा पहले भी चर्चा में रहा है। अक्टूबर 2026 में जिले के चंदाना और बिजाना गांवों में जहरीली शराब के सेवन से कई लोगों की मौत होने का मामला सामने आया था।
इस घटना के बाद अवैध शराब के निर्माण, बिक्री और परिवहन को लेकर प्रशासन पर सवाल उठे थे। जांच में नकली शराब तैयार करने के लिए केमिकल के इस्तेमाल से जुड़ी जानकारी भी सामने आई थी।
इसके बाद पुलिस और आबकारी विभाग ने अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ कार्रवाई तेज की थी। कई आरोपियों की गिरफ्तारी और विभागीय स्तर पर कार्रवाई की खबरें भी सामने आई थीं।
ऐसे माहौल में खातेगांव थाना प्रभारी दिलीप पुरी की मौत ने एक बार फिर देवास में अवैध शराब के कारोबार को लेकर चिंता बढ़ा दी है। अब जांच एजेंसियों के सामने इस नेटवर्क की पूरी जानकारी जुटाने की चुनौती है।
एसपी आदित्य मिश्रा सहित वरिष्ठ अधिकारी पहुंचे मौके पर
घटना की जानकारी मिलते ही देवास के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सक्रिय हो गए। पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा भी खातेगांव पहुंचे और पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली।
पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और संबंधित लोगों से पूछताछ शुरू की। इसके साथ ही जब्त वाहन और उसमें मिली शराब की जांच की जा रही है।
पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि तस्करी के लिए इस्तेमाल किए जा रहे वाहन को पहले किन रास्तों से लाया गया था। इस मामले में स्थानीय स्तर पर सक्रिय लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
फिलहाल पुलिस की प्राथमिकता घटना से जुड़े सभी तथ्यों को सामने लाना और अवैध शराब के कारोबार में शामिल लोगों की पहचान करना है।
कौन थे थाना प्रभारी दिलीप पुरी?
दिलीप पुरी देवास जिले के खातेगांव थाने में थाना प्रभारी के पद पर तैनात थे। वह अवैध शराब की तस्करी रोकने के लिए चलाए जा रहे अभियान में अपनी टीम के साथ सक्रिय थे।
2 नवंबर की रात भी वह सूचना मिलने के बाद संदिग्ध वाहन की जांच करने पहुंचे थे। इसी दौरान यह दर्दनाक घटना हुई।
उनकी मौत की खबर सामने आने के बाद पुलिस विभाग और उनके परिचितों में शोक की लहर है। उनके गृह क्षेत्र बरमंडल में भी दुख का माहौल है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किए जाने की जानकारी सामने आई है।
अवैध शराब तस्करी पर कार्रवाई को लेकर उठे सवाल
दिलीप पुरी की मौत ने मध्य प्रदेश में अवैध शराब की तस्करी रोकने के प्रयासों को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। आखिर किस तरह बड़ी मात्रा में शराब को गुप्त तरीके से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाया जा रहा था? इस कारोबार में किन लोगों की भूमिका है? और तस्करी के लिए किन रास्तों का इस्तेमाल किया जा रहा था?
ये ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा।
इस घटना से यह भी स्पष्ट होता है कि अवैध शराब का कारोबार रोकने के लिए केवल वाहनों की जांच पर्याप्त नहीं है। इसके पीछे काम करने वाले पूरे नेटवर्क की पहचान करना भी जरूरी है।
पुलिस और आबकारी विभाग को आपसी समन्वय के साथ ऐसे मामलों पर कार्रवाई करनी होगी। साथ ही संदिग्ध वाहनों की निगरानी और तस्करी से जुड़े आर्थिक नेटवर्क की जांच भी महत्वपूर्ण है।
निष्कर्ष
देवास के खातेगांव में थाना प्रभारी दिलीप पुरी की मौत मध्य प्रदेश के लिए एक दुखद घटना है। वह अवैध शराब की तस्करी रोकने के लिए पुलिस टीम के साथ कार्रवाई कर रहे थे, तभी संदिग्ध शराब से भरे ट्रक की चपेट में आ गए। अस्पताल में करीब दो घंटे तक उपचार के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
घटना के बाद पुलिस ने वाहन जब्त कर लिया है और चालक की गिरफ्तारी की जानकारी भी सामने आई है। अब जांच का मुख्य उद्देश्य शराब तस्करी के पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों की पहचान करना है। इस मामले में आगे होने वाली कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।

