वंदे मातरम् बिल बना कानून, राष्ट्रपति मुर्मू की मंजूरी; बाधा डालने पर 3 साल तक सजा
राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ से जुड़े एक महत्वपूर्ण विधेयक को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंजूरी दे दी है। राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद Prevention of Insults to National Honour (Amendment) Bill, 2026 अब कानून बन गया है। नए कानून के तहत ‘वंदे मातरम्’ को कानूनी संरक्षण दिया गया है और इसके गायन में जानबूझकर बाधा डालने या इसका अपमान करने जैसी गतिविधियों पर आपराधिक कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।
नए कानून के तहत ऐसे अपराध के लिए अधिकतम तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है। यह बदलाव ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े मौजूदा कानूनी ढांचे में शामिल करता है और इसे राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ के समान वैधानिक संरक्षण देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने दी बिल को मंजूरी
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 11 अगस्त 2026 को Prevention of Insults to National Honour (Amendment) Bill, 2026 को मंजूरी दी। संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद यह विधेयक राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजा गया था। मंजूरी मिलने के साथ ही यह विधेयक कानून में बदल गया।
इस कानून का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत के सम्मान और उसकी गरिमा की रक्षा के लिए मौजूदा कानूनी व्यवस्था को मजबूत करना है। इससे पहले Prevention of Insults to National Honour Act, 1971 के तहत राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रीय गान से संबंधित अपमान तथा व्यवधान के मामलों के लिए कानूनी प्रावधान मौजूद थे।
संसद के दोनों सदनों से हुआ था पारित
यह विधेयक पहले संसद में पेश किया गया था। राज्यसभा ने इसे 29 जुलाई 2026 को मंजूरी दी थी, जबकि लोकसभा में भी इसे पारित किया गया। इसके बाद विधेयक राष्ट्रपति के पास भेजा गया था।
लोकसभा में विधेयक पारित होने के दौरान विपक्ष की ओर से विरोध भी देखने को मिला था। हालांकि, संसदीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद विधेयक दोनों सदनों से मंजूर हो गया और अब राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद कानून बन चुका है।
वंदे मातरम् के अपमान पर क्या बदला
नए कानून में ‘वंदे मातरम्’ को उस कानूनी संरक्षण के दायरे में लाया गया है, जो राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े मामलों में लागू होता है। किसी व्यक्ति द्वारा जानबूझकर राष्ट्रीय गीत के गायन में बाधा डालना या उसके सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली गतिविधि करना अब दंडनीय अपराध के दायरे में आएगा।
इसका मतलब यह है कि कानून का मुख्य जोर जानबूझकर किए गए अपमान और व्यवधान पर है। ऐसे मामलों में दोष सिद्ध होने पर तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।
राष्ट्रीय गान के प्रावधानों से जोड़ा गया
नए संशोधन का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि राष्ट्रीय गीत को भी राष्ट्रीय गान से जुड़े दंडात्मक प्रावधानों के समान संरक्षण दिया गया है। इससे ‘वंदे मातरम्’ की कानूनी स्थिति पहले की तुलना में मजबूत हुई है।
हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि हर स्थिति में व्यक्ति को ‘वंदे मातरम्’ गाना अनिवार्य कर दिया गया है। कानून मुख्य रूप से जानबूझकर अपमान और गायन में बाधा डालने जैसी गतिविधियों को दंडनीय बनाने से संबंधित है।
‘वंदे मातरम्’ का ऐतिहासिक महत्व
‘वंदे मातरम्’ भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से गहराई से जुड़ा राष्ट्रीय गीत है। इसकी रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी और स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान इस गीत ने लोगों में राष्ट्रभक्ति की भावना जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी जनवरी 2026 में संसद में अपने संबोधन के दौरान ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर इसके ऐतिहासिक और राष्ट्रीय महत्व का उल्लेख किया था।
सरकार की ओर से इस वर्ष ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इससे भी राष्ट्रीय गीत को लेकर देश में चर्चा बढ़ी है।
राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रीय गान में अंतर
भारत में ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रीय गीत का दर्जा प्राप्त है, जबकि ‘जन गण मन’ राष्ट्रीय गान है। दोनों का देश के राष्ट्रीय जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है, लेकिन संवैधानिक और आधिकारिक संदर्भों में दोनों की भूमिकाएं अलग हैं।
नए कानून का उद्देश्य ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रीय गान बनाने का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय गीत के रूप में इसकी गरिमा और सम्मान के लिए वैधानिक संरक्षण उपलब्ध कराना है।
तीन साल तक की सजा का प्रावधान
नए कानून का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा सजा से जुड़ा प्रावधान है। यदि कोई व्यक्ति कानून के दायरे में आने वाला जानबूझकर अपमान या गायन में व्यवधान करता है और दोषी पाया जाता है, तो उसे तीन साल तक की जेल की सजा हो सकती है। इसके अलावा जुर्माना या जेल और जुर्माना दोनों लगाए जा सकते हैं।
इस प्रावधान के कारण अब सार्वजनिक आयोजनों और आधिकारिक कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ के आयोजन के दौरान अनुशासन और निर्धारित प्रोटोकॉल का महत्व और बढ़ जाएगा।
किन गतिविधियों पर कार्रवाई हो सकती है
कानून का उद्देश्य मुख्य रूप से जानबूझकर किए गए व्यवधान और अपमान को रोकना है। उदाहरण के तौर पर, किसी सभा में ‘वंदे मातरम्’ के गायन को जानबूझकर रोकने या उसमें व्यवधान पैदा करने जैसी गतिविधियां कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकती हैं।
हालांकि, किसी मामले में अपराध की प्रकृति, परिस्थितियों और कानून की लागू धाराओं के आधार पर कार्रवाई तय होगी। इसलिए कानून को केवल सामान्य असहमति या व्यक्तिगत पसंद के हर मामले पर लागू मानना सही नहीं होगा।
सरकार ने क्यों जरूरी बताया यह कानून
सरकार का तर्क है कि राष्ट्रीय गीत देश के स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रीय भावना का महत्वपूर्ण प्रतीक है। इसलिए इसके सम्मान और गरिमा की रक्षा के लिए स्पष्ट कानूनी प्रावधान होना जरूरी है।
नए कानून के जरिए सरकार ने ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े कानूनी ढांचे में अधिक स्पष्ट स्थान दिया है। समर्थकों का कहना है कि इससे राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को लेकर कानून और मजबूत होगा।
‘वंदे मातरम्’ के कार्यक्रमों को लेकर नए नियम
वंदे मातरम् को लेकर सरकार ने इस वर्ष आधिकारिक कार्यक्रमों के लिए प्रोटोकॉल भी जारी किए हैं। गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय गीत के प्रस्तुतीकरण से जुड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, जब राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रीय गान दोनों प्रस्तुत किए जाते हैं, तो ‘वंदे मातरम्’ के सभी छह अंतरों को पहले गाने का प्रोटोकॉल निर्धारित किया गया है।
गृह मंत्रालय के अनुसार इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से भी ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया जाएगा। यह आयोजन राष्ट्रीय गीत के 150 वर्ष पूरे होने से जुड़े कार्यक्रमों का हिस्सा है।
कानून बनने के बाद क्या बदलेगा
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद अब ‘वंदे मातरम्’ से जुड़े अपमान और जानबूझकर व्यवधान के मामलों में नए कानूनी प्रावधान लागू किए जा सकेंगे। इससे पुलिस और न्यायिक प्रक्रिया को ऐसे मामलों में कार्रवाई के लिए वैधानिक आधार मिलेगा।
इस कानून का प्रभाव खासतौर पर सार्वजनिक और आधिकारिक आयोजनों में दिखाई दे सकता है। आयोजकों और प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि राष्ट्रीय गीत से जुड़े निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन हो और किसी तरह का जानबूझकर व्यवधान न हो।
कानून को लेकर आगे भी जारी रह सकती है बहस
‘वंदे मातरम्’ को कानूनी संरक्षण देने का फैसला राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा का विषय भी बना हुआ है। समर्थक इसे राष्ट्रीय सम्मान और देशभक्ति से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि विरोध करने वाले इसके दायरे और संभावित इस्तेमाल को लेकर सवाल उठा सकते हैं।
ऐसे में कानून के वास्तविक प्रभाव को समझने के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले समय में इसके प्रावधानों को किस तरह लागू किया जाता है। कानून का उद्देश्य जानबूझकर अपमान और व्यवधान को रोकना है, इसलिए इसके इस्तेमाल में संबंधित कानूनी प्रावधानों और परिस्थितियों का महत्व रहेगा।
अब ‘वंदे मातरम्’ को मिला कानूनी संरक्षण
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी के बाद ‘वंदे मातरम्’ से जुड़ा विधेयक अब कानून बन चुका है। इसके साथ ही राष्ट्रीय गीत को कानूनी संरक्षण देने की व्यवस्था मजबूत हुई है। जानबूझकर अपमान या गायन में बाधा डालने जैसे अपराधों पर अब तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब देश ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ मना रहा है। स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास से जुड़े इस राष्ट्रीय गीत को लेकर सरकार की ओर से कई कार्यक्रम और आधिकारिक पहल भी की जा रही हैं। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद अब आने वाले दिनों में इस कानून के लागू होने और इसके प्रभाव पर देशभर की नजर रहेगी।

