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प्रतिबंधों पर भड़का ईरान, अब्बास अराघची ने ट्रंप पर साधा निशाना

प्रतिबंधों पर भड़का ईरान, अब्बास अरागची का डोनाल्ड ट्रंप पर बयान - News Critic

अमेरिका की ओर से ईरान पर नए और कड़े आर्थिक प्रतिबंधों की तैयारी के बीच तेहरान ने कड़ा पलटवार किया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ट्रंप की आर्थिक कार्रवाई को अमेरिकी घरेलू संकट से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया है।

ट्रंप की आर्थिक कार्रवाई पर ईरान का पलटवार

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब आर्थिक मोर्चे पर भी बढ़ता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ बेहद कड़ी आर्थिक कार्रवाई का ऐलान किया है।

ट्रंप प्रशासन का कहना है कि अमेरिका ईरान पर अब तक का सबसे बड़ा आर्थिक दबाव बनाने की तैयारी में है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने भी ईरान के खिलाफ इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंध लगाने की बात कही है।

ईरान ने इस कदम को स्वीकार करने के बजाय इसका विरोध किया है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ट्रंप की नीति को पुरानी और असफल रणनीति बताया है।

अराघची ने ट्रंप पर क्या आरोप लगाया?

अब्बास अराघची ने ट्रंप की नई आर्थिक कार्रवाई पर सीधे निशाना साधा। उन्होंने कहा कि तथाकथित ‘इकोनॉमिक डी-डे’ अमेरिका के अपने संकट से ध्यान हटाने की कोशिश है।

अराघची के मुताबिक, अमेरिका इस समय बड़े कर्ज और बढ़ती ब्याज लागत जैसी समस्याओं का सामना कर रहा है। उनका आरोप है कि ट्रंप प्रशासन इन घरेलू चुनौतियों से ध्यान हटाने के लिए ईरान को निशाना बना रहा है।

ईरानी विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि ऐसी नीतियां पहले भी असफल रही हैं। उनके अनुसार, इस तरह के दबाव से ईरान के खिलाफ अमेरिका की स्थिति मजबूत होने के बजाय नई समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

अमेरिका ने प्रतिबंधों को बताया बड़ा आर्थिक अभियान

ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अपनी नई रणनीति को बेहद बड़े आर्थिक अभियान के रूप में पेश किया है। उनका लक्ष्य ईरान की अर्थव्यवस्था को अधिकतम दबाव में लाना है।

अमेरिका चाहता है कि ईरान की आर्थिक गतिविधियां और अंतरराष्ट्रीय व्यापार सीमित हों। इसके लिए तेल कारोबार, वित्तीय लेनदेन और ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर भी दबाव बढ़ाया जा सकता है।

ट्रंप ने ईरान की मदद करने वाले देशों को भी गंभीर आर्थिक परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है। इससे यह मामला केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित रहने के बजाय दूसरे देशों को भी प्रभावित कर सकता है।

चीन और दूसरे देशों पर भी दबाव

अमेरिका की नई नीति का असर ईरान के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों पर पड़ सकता है। खासतौर पर चीन की भूमिका महत्वपूर्ण है क्योंकि वह ईरानी तेल का बड़ा खरीदार है।

अमेरिका चीन से भी ईरान के खिलाफ आर्थिक दबाव बढ़ाने में सहयोग चाहता है। वहीं, चीन ने बातचीत और कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया है।

अगर अमेरिका ईरान के साथ व्यापार करने वाली विदेशी कंपनियों और देशों पर भी कार्रवाई करता है, तो वैश्विक व्यापार पर इसका असर पड़ सकता है। इससे अमेरिका और उसके सहयोगियों के बीच भी मतभेद बढ़ने की आशंका है।

ईरान पहले से आर्थिक संकट में

ईरान पर नए प्रतिबंध ऐसे समय में लगाए जाने की तैयारी है, जब उसकी अर्थव्यवस्था पहले से मुश्किल दौर से गुजर रही है। लंबे समय से जारी प्रतिबंधों और मौजूदा संघर्ष ने आर्थिक दबाव और बढ़ा दिया है।

रॉयटर्स के अनुसार, जुलाई में ईरान की महंगाई दर 66 प्रतिशत तक पहुंच गई थी। खाद्य कीमतों में भी तेज वृद्धि हुई है और ईरानी मुद्रा पर दबाव बना हुआ है।

युद्ध और व्यापार में रुकावट ने भी हालात को मुश्किल बनाया है। ऐसे में अमेरिका के नए प्रतिबंध ईरान की अर्थव्यवस्था पर और दबाव डाल सकते हैं।

हालांकि, ईरान लंबे समय से अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करता रहा है। इसलिए तेहरान का कहना है कि केवल आर्थिक दबाव से उसकी नीतियां नहीं बदली जा सकतीं।

अमेरिका की रणनीति का लक्ष्य क्या है?

अमेरिका की नई आर्थिक रणनीति का उद्देश्य ईरान पर दबाव बढ़ाना है। वॉशिंगटन चाहता है कि आर्थिक संकट के जरिए तेहरान को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया जाए।

इसके साथ ही अमेरिका स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर भी दबाव बना रहा है। यह जलमार्ग दुनिया के तेल व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि आर्थिक दबाव का इस्तेमाल सैन्य कार्रवाई के विकल्प के तौर पर भी किया जा सकता है। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने आर्थिक दबाव को अमेरिका के सबसे प्रभावी साधनों में से एक बताया है।

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज क्यों महत्वपूर्ण है?

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के प्रमुख तेल परिवहन मार्गों में शामिल है। यहां लंबे समय तक तनाव रहने से वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हो सकता है।

अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा विवाद में हॉर्मुज का मुद्दा भी अहम बना हुआ है। इस क्षेत्र में आवाजाही प्रभावित होने से तेल की कीमतों और आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है।

इसका असर सिर्फ अमेरिका और ईरान पर नहीं पड़ेगा। भारत समेत एशिया और यूरोप के कई देश ऊर्जा आयात पर निर्भर हैं।

क्या ईरान अमेरिकी दबाव के आगे झुकेगा?

यह सबसे बड़ा सवाल है। ईरान पहले भी कई वर्षों तक अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर चुका है।

तेहरान ने कई बार वैकल्पिक व्यापारिक रास्तों के जरिए अपनी अर्थव्यवस्था को चलाने की कोशिश की है। चीन और अन्य देशों के साथ व्यापार भी ईरान के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है।

इसलिए नए प्रतिबंधों से आर्थिक दबाव जरूर बढ़ सकता है। लेकिन इससे ईरान तुरंत अमेरिकी मांगों को स्वीकार करेगा, यह अभी तय नहीं है।

विशेषज्ञों के बीच भी इस रणनीति को लेकर अलग-अलग राय है। कुछ मानते हैं कि लगातार बढ़ता आर्थिक दबाव बातचीत के लिए मजबूर कर सकता है। वहीं, दूसरी राय यह है कि ज्यादा दबाव से ईरान और कड़ा रुख अपना सकता है।

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव क्यों बढ़ रहा है?

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव केवल प्रतिबंधों तक सीमित नहीं है। दोनों देशों के बीच सैन्य और कूटनीतिक विवाद भी लगातार जारी हैं।

ईरान के परमाणु कार्यक्रम और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज जैसे मुद्दे विवाद के केंद्र में हैं। अमेरिका ईरान पर दबाव बनाकर अपनी शर्तों पर समझौता कराने की कोशिश कर रहा है।

दूसरी ओर, ईरान अमेरिकी दबाव को स्वीकार करने के बजाय अपनी संप्रभुता और नीतियों का बचाव कर रहा है। इसी कारण दोनों पक्षों के बीच समाधान का रास्ता फिलहाल आसान नहीं दिख रहा है।

आगे क्या होगा?

अब नजर अमेरिकी प्रशासन के अगले कदम पर है। नए प्रतिबंधों का पूरा दायरा और उनकी शर्तें सामने आने के बाद स्थिति ज्यादा स्पष्ट होगी।

अगर अमेरिका ईरान के साथ कारोबार करने वाले दूसरे देशों पर भी प्रतिबंध लगाता है, तो मामला और बड़ा हो सकता है। इससे चीन, भारत और खाड़ी देशों समेत कई अर्थव्यवस्थाओं पर असर पड़ने की संभावना है।

दूसरी ओर, ईरान की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी। यदि तेहरान अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में अपने कदम और कड़े करता है, तो क्षेत्रीय तनाव बढ़ सकता है।

भारत के लिए भी क्यों अहम है यह मामला?

ईरान पर बढ़ता अमेरिकी दबाव भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है। भारत के ईरान के साथ लंबे समय से आर्थिक और रणनीतिक संबंध हैं।

ईरान पश्चिम एशिया में भारत के लिए एक महत्वपूर्ण साझेदार रहा है। दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा और कनेक्टिविटी से जुड़े कई मुद्दे हैं।

यदि अमेरिका ईरान के व्यापारिक साझेदारों पर व्यापक प्रतिबंध लगाता है, तो भारत को भी अपनी नीतियों में संतुलन बनाना पड़ सकता है। खासतौर पर तेल की कीमतों और समुद्री व्यापार पर किसी भी बड़े असर का सीधा प्रभाव भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

निष्कर्ष

ईरान पर अमेरिका की नई आर्थिक कार्रवाई को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है। ट्रंप प्रशासन ईरान पर अधिकतम आर्थिक दबाव बनाने की तैयारी कर रहा है, जबकि विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इसे अमेरिकी घरेलू संकट से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया है।

अराघची ने ट्रंप की नीति को असफल रणनीति बताया है। वहीं, अमेरिका का कहना है कि कड़े आर्थिक प्रतिबंधों के जरिए ईरान पर दबाव बढ़ाना जरूरी है।

अब आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि अमेरिका नए प्रतिबंधों को किस स्तर तक लागू करता है। साथ ही, ईरान और उसके सहयोगी देशों की प्रतिक्रिया से यह तय होगा कि यह आर्थिक टकराव आगे कितना बढ़ता है।

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