KPSC भर्ती घोटाला: IAS ज्ञानेंद्र गंगवार के ठिकानों पर ED रेड, जांच तेज
कर्नाटक लोक सेवा आयोग यानी KPSC की भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच अब IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार तक पहुंच गई है। KPSC भर्ती घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उनके बेंगलुरु और उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित परिसरों पर तलाशी ली।
यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के तहत की गई है। गंगवार पहले KPSC में परीक्षा नियंत्रक रह चुके हैं और इसी वजह से जांच में उनकी भूमिका को लेकर एजेंसी पूछताछ और दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है।
KPSC भर्ती घोटाला जांच में ED की बड़ी कार्रवाई
प्रवर्तन निदेशालय ने 23 अगस्त 2026 को IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार के ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। अधिकारियों के मुताबिक बेंगलुरु के जयमहल इलाके में स्थित उनके आवास और उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित परिसर की तलाशी PMLA के तहत ली गई।
यह कार्रवाई KPSC की भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ियों से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हुई। इससे पहले ED ने 18 अगस्त को भी KPSC कार्यालय समेत कई स्थानों पर तलाशी ली थी।
बेंगलुरु का फ्लैट बंद मिला
रिपोर्टों के अनुसार जब ED की टीम गंगवार के बेंगलुरु स्थित फ्लैट पर पहुंची, तब आवास बंद था। इसके बाद अधिकारियों ने ताला खोलने के लिए लॉकस्मिथ की मदद ली और तलाशी शुरू की।
इस कार्रवाई के दौरान केंद्रीय सुरक्षा बलों की मौजूदगी भी रही। एजेंसी ने दस्तावेजों और अन्य संभावित साक्ष्यों की जांच की।
बरेली स्थित पैतृक घर पर भी तलाशी
ED की टीम ने उत्तर प्रदेश के बरेली में स्थित गंगवार के पैतृक घर पर भी कार्रवाई की। रिपोर्टों के मुताबिक बरेली के नवाबगंज क्षेत्र में स्थित उनके पैतृक परिसर में टीम ने कई घंटे तक जांच की।
जांच एजेंसी का फोकस कथित वित्तीय लेनदेन और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों पर है। हालांकि, तलाशी के दौरान वास्तव में क्या-क्या बरामद हुआ, इसकी पूरी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
कौन हैं IAS ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार?
ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार 2016 बैच के कर्नाटक कैडर के IAS अधिकारी हैं। वर्तमान में वह कर्नाटक के उद्योग एवं वाणिज्य विभाग में MSME निदेशक के पद पर तैनात बताए गए हैं।
इससे पहले वह KPSC में परीक्षा नियंत्रक के पद पर काम कर चुके हैं। उन्हें मार्च 2026 में इस पद से हटाया गया था।
यही पद इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कथित परीक्षा अनियमितताओं के दौरान परीक्षा से जुड़ी प्रक्रियाओं में उनकी जिम्मेदारी थी।
400 पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती जांच के घेरे में
ED की जांच KPSC की पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती परीक्षा से जुड़ी कथित अनियमितताओं पर केंद्रित है। रिपोर्टों के अनुसार इस भर्ती में करीब 400 पदों के लिए परीक्षा आयोजित की गई थी।
जांच में कथित पेपर लीक, भ्रष्टाचार और OMR शीट में छेड़छाड़ जैसे आरोपों की पड़ताल की जा रही है। एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि परीक्षा में कथित गड़बड़ियों से किसी तरह का वित्तीय लाभ हासिल किया गया था या नहीं।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये आरोप जांच का हिस्सा हैं। किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी जांच पूरी होने और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही तय होगी।
ED की पहले भी हो चुकी है छापेमारी
KPSC भर्ती मामले में ED ने 18 अगस्त को कर्नाटक में कई स्थानों पर तलाशी ली थी। जांच के दायरे में KPSC का कार्यालय, पूर्व अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. साहूकार, सदस्य शांता होसामनी और कुछ अन्य लोगों के परिसर शामिल थे।
इसके बाद गंगवार के परिसरों पर हुई कार्रवाई ने मामले को और गंभीर बना दिया। जांच एजेंसी अब कथित भर्ती अनियमितताओं और उनसे जुड़े संभावित वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
मनी लॉन्ड्रिंग एंगल की जांच
ED इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू की जांच कर रही है। इसका मतलब है कि एजेंसी कथित अपराध से जुड़े पैसों के स्रोत, लेनदेन और संभावित लाभार्थियों की जानकारी जुटा रही है।
ऐसे मामलों में बैंक रिकॉर्ड, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज, डिजिटल जानकारी और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड अहम साक्ष्य बन सकते हैं। तलाशी के बाद सामने आने वाली जानकारी जांच की दिशा को और स्पष्ट कर सकती है।
गंगवार के ‘लापता’ होने की खबर भी चर्चा में रही
ED की कार्रवाई से ठीक पहले IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र गंगवार के कुछ समय के लिए संपर्क में नहीं होने की खबर सामने आई थी। इसके बाद उनके कथित रूप से लापता होने को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई थी।
हालांकि, कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने बाद में इन खबरों को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि गंगवार अपने पिता की तबीयत से जुड़ी पारिवारिक आपात स्थिति के कारण उत्तर प्रदेश गए थे।
मंत्री के अनुसार, गंगवार ने छुट्टी के लिए आवेदन किया था और जरूरत पड़ने पर जांच एजेंसियों के सामने पेश होने की बात कही थी। इसलिए उनके संपर्क में नहीं होने की घटना को ED की कार्रवाई से जोड़ना उचित नहीं होगा।
KPSC भर्ती प्रक्रिया पर उठे सवाल
KPSC भर्ती घोटाला सामने आने के बाद सरकारी भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठे हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक या उत्तर पुस्तिकाओं में कथित छेड़छाड़ जैसी शिकायतें अभ्यर्थियों के भविष्य पर सीधा असर डालती हैं।
सरकारी नौकरी की परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवार महीनों और कई बार वर्षों तक तैयारी करते हैं। ऐसे में किसी भी तरह की अनियमितता से पूरी भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।
यही कारण है कि जांच एजेंसियां इस मामले में वित्तीय और प्रशासनिक दोनों पहलुओं को गंभीरता से देख रही हैं।
जांच का दायरा बढ़ने की संभावना
अब तक ED की कार्रवाई कई अधिकारियों और KPSC से जुड़े परिसरों तक पहुंच चुकी है। ऐसे में जांच आगे बढ़ने के साथ नए लोगों से पूछताछ या नए ठिकानों पर कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
हालांकि, किसी भी नए नाम या आरोप की पुष्टि आधिकारिक जांच के बाद ही मानी जानी चाहिए। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर ED कथित वित्तीय कड़ियों की जांच कर रही है।
परीक्षा नियंत्रक के रूप में गंगवार की भूमिका क्यों अहम?
KPSC में परीक्षा नियंत्रक का पद परीक्षा संचालन से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों वाला होता है। इसलिए जिस अवधि में कथित अनियमितताएं हुईं, उस दौरान अधिकारियों की भूमिका भी जांच का हिस्सा बन सकती है।
गंगवार फरवरी 2024 से मार्च 2026 तक KPSC में परीक्षा नियंत्रक रहे। इसके बाद उन्हें इस पद से हटाया गया और वर्तमान में वह MSME निदेशक के रूप में कार्यरत हैं।
हालांकि, केवल किसी पद पर रहना किसी व्यक्ति की संलिप्तता साबित नहीं करता। उनकी व्यक्तिगत भूमिका के बारे में अंतिम निष्कर्ष जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निकलेगा।
आगे क्या होगी कार्रवाई?
ED अब तलाशी में मिले दस्तावेजों और संभावित डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर सकती है। इसके अलावा संबंधित लोगों के बैंक खातों, वित्तीय लेनदेन और संपत्तियों से जुड़ी जानकारी की भी पड़ताल की जा सकती है।
यदि जांच में मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े ठोस साक्ष्य सामने आते हैं तो PMLA के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई हो सकती है। वहीं आरोपों की पुष्टि के लिए जांच एजेंसी को संबंधित वित्तीय लेनदेन और कथित अपराध के बीच कड़ी स्थापित करनी होगी।
इस मामले में आगे पूछताछ और दस्तावेजी जांच महत्वपूर्ण होगी।
अभ्यर्थियों के लिए क्या मायने रखता है?
KPSC भर्ती परीक्षा से जुड़े विवाद का सबसे बड़ा असर उन उम्मीदवारों पर पड़ सकता है जिन्होंने भर्ती प्रक्रिया में हिस्सा लिया। यदि परीक्षा में गंभीर अनियमितताएं साबित होती हैं तो भर्ती प्रक्रिया को लेकर प्रशासनिक और कानूनी फैसले सामने आ सकते हैं।
हालांकि, फिलहाल जांच जारी है। इसलिए भर्ती रद्द होने या उम्मीदवारों के भविष्य को लेकर कोई अंतिम दावा करना जल्दबाजी होगा।
सरकार और आयोग की ओर से आगे लिए जाने वाले फैसले जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेंगे।
निष्कर्ष
KPSC भर्ती घोटाला मामले में ED की कार्रवाई अब IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार के बेंगलुरु और बरेली स्थित परिसरों तक पहुंच गई है। गंगवार पहले KPSC के परीक्षा नियंत्रक रह चुके हैं और फिलहाल कर्नाटक के उद्योग एवं वाणिज्य विभाग में MSME निदेशक हैं।
ED कथित भर्ती अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग पहलू की जांच कर रही है। अभी जांच जारी है और गंगवार की व्यक्तिगत भूमिका पर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। आने वाले दिनों में तलाशी से मिले दस्तावेज और वित्तीय रिकॉर्ड इस मामले की अगली दिशा तय कर सकते हैं।

