नेपाल में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में फंसे कर्मचारी: 6 इंच के पाइप से पहुंचाई जा रही हवा, 691 मौतों से दहला देश
नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। भोटेकोशी और त्रिशूली नदी क्षेत्र में कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स प्रभावित हुए हैं और बड़ी संख्या में कर्मचारी सुरंगों तथा भूमिगत पावरहाउस में फंसे बताए जा रहे हैं।
हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स में फंसे कर्मचारियों को बाहर निकालने के लिए नेपाली सेना और अन्य बचाव दल लगातार अभियान चला रहे हैं। एक सुरंग में करीब 6 इंच का छेद कर पाइप के जरिए अंदर हवा पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। इस बीच नेपाल और चीन में आई आपदा में मृतकों की संख्या 691 तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
नेपाल में बाढ़ ने मचाई भारी तबाही
नेपाल में 26 अगस्त को आई अचानक बाढ़ ने भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के आसपास के इलाकों को बुरी तरह प्रभावित किया। तेज बहाव के साथ आई बाढ़ और भूस्खलन ने सड़कें, पुल और कई जरूरी बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया।
हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स के कई सुरंग प्रवेश द्वार मिट्टी और मलबे से बंद हो गए। इसके कारण अंदर काम कर रहे कर्मचारियों से संपर्क टूट गया और बचाव अभियान बेहद मुश्किल हो गया।
कई प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने के रास्ते भी बाढ़ में बह गए हैं। ऐसे में बचाव टीमों को सुरंगों तक मशीनें और जरूरी उपकरण पहुंचाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
898 कर्मचारियों में से 361 का रेस्क्यू
नेपाल के स्वतंत्र ऊर्जा उत्पादक संघ यानी IPPAN के अनुसार, नौ हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स से जुड़े कुल 898 कर्मचारी और श्रमिक बाढ़ के बाद संपर्क से बाहर हो गए थे। इनमें से 361 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है, जबकि 537 लोग अब भी लापता या संपर्क से बाहर बताए गए हैं।
इस आंकड़े को समझना जरूरी है कि 898 कर्मचारियों का आंकड़ा शुरुआती तौर पर प्रभावित परियोजनाओं से जुड़े कर्मचारियों का है। समय के साथ कुछ लोगों का पता चला और कई लोगों को रेस्क्यू किया गया, इसलिए अलग-अलग रिपोर्टों में लापता या फंसे लोगों की संख्या अलग दिखाई दे रही है।
रेस्क्यू टीमों का सबसे बड़ा फोकस उन कर्मचारियों तक पहुंचने पर है, जिनके सुरंगों के अंदर फंसे होने की आशंका है।
6 इंच के छेद से पहुंचाई जा रही हवा
सुरंगों में फंसे लोगों तक पहुंचना इस समय बचाव अभियान की सबसे बड़ी चुनौती है। कुछ जगहों पर सुरंगों में पानी, गाद और मलबा भर गया है, जिससे सामान्य रास्ते से अंदर जाना संभव नहीं हो पा रहा।
ऐसी स्थिति में बचावकर्मियों ने करीब 6 इंच का छेद बनाने की कोशिश की है। इसी छेद के जरिए पाइप डालकर सुरंग के अंदर हवा पहुंचाई जा रही है, ताकि वहां मौजूद लोगों को सांस लेने के लिए ऑक्सीजन मिलती रहे।
बचाव दल इस छेद को आगे चलकर मैनहोल के रूप में इस्तेमाल करने की दिशा में भी काम कर रहे हैं। अगर सुरंग के अंदर फंसे लोगों तक सुरक्षित रास्ता बनाया जा सका, तो उन्हें बाहर निकालने की प्रक्रिया तेज हो सकती है।
Upper Trishuli-1 सुरंग में सबसे ज्यादा चिंता
प्रभावित परियोजनाओं में Upper Trishuli-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट को लेकर विशेष चिंता जताई गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस परियोजना की सुरंग में बड़ी संख्या में कर्मचारी फंसे होने की आशंका है।
IPPAN के अनुसार, करीब 300 लोग Upper Trishuli-1 की सुरंग के अंदर फंसे हो सकते हैं। इस साइट से अब तक 254 लोगों को बचाए जाने की जानकारी दी गई है और बाकी लोगों की तलाश जारी है।
सुरंग में गहरी गाद और मलबा जमा होने के कारण बचाव कार्य धीमा है। सेना और विशेषज्ञ टीमें लगातार रास्ता साफ करने और अंदर तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं।
कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स प्रभावित
बाढ़ का असर सिर्फ एक हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट तक सीमित नहीं रहा। रसुवा और नुवाकोट जिलों में कई परियोजनाओं के कर्मचारी संपर्क से बाहर हुए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक प्रभावित परियोजनाओं में Upper Trishuli-I, Rasuwagadhi, Rasuwa Bhotekoshi, Langtang Khola, Chilime, Mailung Khola और Upper Trishuli-III A तथा III B जैसी परियोजनाएं शामिल हैं।
कुछ परियोजनाओं में कर्मचारियों को सुरक्षित निकाल लिया गया है, जबकि कई जगह अब भी खोज और बचाव अभियान चल रहा है।
नेपाली सेना ने संभाला रेस्क्यू ऑपरेशन
सुरंगों तक पहुंचने और फंसे कर्मचारियों को बाहर निकालने के लिए नेपाली सेना ने बड़े पैमाने पर अभियान शुरू किया है। मुश्किल पहाड़ी इलाके, खराब मौसम, कीचड़ और टूटे हुए संपर्क मार्गों के कारण अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
रिपोर्टों के अनुसार नेपाली सेना ने हजारों जवानों को खोज और बचाव अभियान में लगाया है। सुरंगों में फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए मशीनों, ड्रिलिंग और अन्य तकनीकी तरीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
कुछ जगहों पर पर्वतारोहण और तकनीकी बचाव में विशेषज्ञ लोगों को भी अभियान से जोड़ा गया है। उनका अनुभव संकरी और अस्थिर सुरंगों में पहुंचने में मददगार साबित हो रहा है।
भारत और अन्य देशों से भी मिली मदद
नेपाल में आई इस भीषण आपदा के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मदद पहुंचाई जा रही है। भारत ने विशेषज्ञ टीम भेजी है, जो प्रभावित क्षेत्रों में खोज और बचाव अभियान में सहायता कर रही है।
भारत की टीम ने पहले हवाई सर्वेक्षण के जरिए प्रभावित इलाकों का जायजा लिया और इसके बाद जमीन पर अभियान में हिस्सा लिया। सुरंगों में फंसे लोगों तक पहुंचना इस अंतरराष्ट्रीय सहायता का अहम हिस्सा है।
चीन और अन्य देशों की ओर से भी राहत और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। नेपाल सरकार ने इस संकट से निपटने के लिए खोज, बचाव और राहत कार्य को प्राथमिकता दी है।
691 मौतों से बढ़ी चिंता
नेपाल और चीन के सीमावर्ती क्षेत्रों में आई इस प्राकृतिक आपदा ने बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान किया है। Associated Press की रिपोर्ट के अनुसार नेपाल और चीन में संयुक्त मृतक संख्या 691 तक पहुंच गई है, जबकि 3,000 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
नेपाल में ही बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है और हजारों लोग अब भी लापता हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत केंद्र बनाए गए हैं, जबकि हेलिकॉप्टरों की मदद से लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है।
कई परिवार अब भी अपने लापता परिजनों की जानकारी का इंतजार कर रहे हैं। अस्पतालों और राहत केंद्रों में लोगों की पहचान और उनके परिजनों को जानकारी देने का काम भी चल रहा है।
खराब मौसम रेस्क्यू में बना बड़ी बाधा
रेस्क्यू अभियान के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में खराब मौसम और दुर्गम पहाड़ी इलाका शामिल है। लगातार बारिश और भूस्खलन की आशंका के कारण बचाव दलों के लिए प्रभावित स्थानों तक पहुंचना मुश्किल बना हुआ है।
कई सड़कें और पुल बह जाने से जमीन के रास्ते राहत सामग्री पहुंचाना कठिन है। वहीं, हेलिकॉप्टर के जरिए भारी मशीनरी पहुंचाने की भी अपनी सीमाएं हैं।
इसके बावजूद बचाव दल सुरंगों में फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। परिवारों की उम्मीदें अब भी रेस्क्यू टीमों पर टिकी हुई हैं।
सुरंगों में फंसे लोगों को बचाना सबसे बड़ी प्राथमिकता
इस समय नेपाल के लिए सबसे बड़ी चुनौती हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में फंसे कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकालना है। जिन लोगों तक अब तक पहुंच नहीं बन पाई है, उनके लिए हर गुजरता घंटा महत्वपूर्ण है।
6 इंच के छेद के जरिए हवा पहुंचाने की कोशिश इसी रणनीति का हिस्सा है, ताकि सुरंग के अंदर जीवन बनाए रखने की संभावना बढ़ाई जा सके। इसके साथ ही मलबा हटाने और वैकल्पिक रास्ता तैयार करने का काम जारी है।
निष्कर्ष
नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने हाइड्रोपावर सेक्टर को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। 898 कर्मचारियों के शुरुआती आंकड़े में से 361 लोगों को बचाया जा चुका है, जबकि 537 लोग अब भी संपर्क से बाहर बताए गए हैं।
सुरंगों में फंसे कर्मचारियों को बचाने के लिए 6 इंच के छेद से पाइप के जरिए हवा पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। नेपाली सेना, स्थानीय बचाव दल और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ लगातार अभियान में जुटे हैं। वहीं, नेपाल-चीन आपदा में 691 मौतों और हजारों लोगों के लापता होने से संकट की गंभीरता और बढ़ गई है।
नोट: अलग-अलग समय पर जारी रिपोर्टों में फंसे, लापता और रेस्क्यू किए गए कर्मचारियों की संख्या बदल रही है। इसलिए ऊपर दिए गए आंकड़े उपलब्ध नवीनतम रिपोर्टों के आधार पर स्पष्ट किए गए हैं।

