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शेयर बाजार में भारी गिरावट: सेंसेक्स 789 अंक टूटा, निफ्टी 269 अंक नीचे

शेयर बाजार में भारी गिरावट को दर्शाता ग्राफिक्स, जिसमें लाल रंग का गिरता हुआ तीर, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज की इमारत और बियर (भालू) मार्केट का प्रतीक है - न्यूज़ क्रिटिक

भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को कारोबार की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई। अमेरिकी-ईरान तनाव बढ़ने और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से निवेशकों के बीच चिंता बढ़ी, जिसका असर सेंसेक्स और निफ्टी पर साफ दिखाई दिया।

बाजार खुलते ही सेंसेक्स करीब 789 अंक और निफ्टी करीब 269 अंक नीचे आ गया। वैश्विक बाजारों में कमजोर रुख और तेल आपूर्ति को लेकर बढ़ती आशंकाओं ने भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ाया।

शेयर बाजार में गिरावट की बड़ी वजह

बाजार में इस तेज गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है। अमेरिका और ईरान के बीच नए सिरे से सैन्य हमलों ने निवेशकों को जोखिम वाले एसेट से दूरी बनाने के लिए मजबूर किया है।

इस तनाव का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है। ब्रेंट क्रूड करीब 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया, जबकि कारोबार के दौरान यह 97 डॉलर के करीब भी गया।

भारत दुनिया के बड़े कच्चे तेल आयातकों में शामिल है। ऐसे में लंबे समय तक ऊंची तेल कीमतें देश के आयात बिल, महंगाई और आर्थिक वृद्धि पर दबाव डाल सकती हैं।

सेंसेक्स और निफ्टी में भारी बिकवाली

बाजार खुलते ही प्रमुख सूचकांकों में तेज गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स करीब 789 अंक टूट गया, जबकि निफ्टी में लगभग 269 अंकों की गिरावट दर्ज की गई।

यह गिरावट केवल कुछ चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं रही। वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ने के कारण भारतीय बाजार में भी व्यापक बिकवाली का दबाव देखा गया।

हालांकि, शुरुआती गिरावट के बाद बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। निवेशक अब अमेरिका-ईरान संघर्ष से जुड़ी खबरों और कच्चे तेल की कीमतों पर नजर बनाए हुए हैं।

तेल महंगा होने से भारत पर क्यों बढ़ता है दबाव?

कच्चे तेल की कीमत भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। तेल महंगा होने पर भारत का आयात बिल बढ़ सकता है और रुपये पर भी दबाव बन सकता है।

इसके अलावा महंगे पेट्रोलियम उत्पाद परिवहन और उत्पादन लागत को प्रभावित कर सकते हैं। इसका असर आगे चलकर महंगाई पर भी पड़ सकता है।

Reuters के मुताबिक, मौजूदा तनाव के कारण तेल आपूर्ति में संभावित व्यवधान को लेकर बाजार में चिंता बढ़ी है। यही वजह है कि वैश्विक निवेशकों का जोखिम लेने का रुख कमजोर हुआ है।

वैश्विक बाजार भी दबाव में

भारतीय शेयर बाजार की गिरावट का संबंध केवल घरेलू परिस्थितियों से नहीं है। अमेरिकी-ईरान तनाव के बाद दुनिया के कई प्रमुख बाजारों में भी कमजोरी देखी गई।

अमेरिकी बाजारों में मंगलवार को S&P 500, Dow Jones और Nasdaq सभी गिरकर बंद हुए। वहीं एशियाई बाजारों में भी कई प्रमुख सूचकांक दबाव में रहे।

वैश्विक बाजारों में गिरावट की एक वजह बढ़ती तेल कीमतों के साथ बॉन्ड यील्ड में तेजी भी है। ऊंची बॉन्ड यील्ड शेयर बाजार के लिए चुनौती बनती है क्योंकि इससे निवेशकों के लिए सुरक्षित फिक्स्ड-इनकम विकल्प अपेक्षाकृत आकर्षक हो सकते हैं।

निवेशकों में बढ़ी चिंता

मौजूदा हालात में निवेशकों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो तेल आपूर्ति पर असर बढ़ सकता है।

इसका मतलब कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी की आशंका है। बाजार पहले से ही इस जोखिम को कीमतों में शामिल करने की कोशिश कर रहा है।

इसके अलावा वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता भी बनी हुई है। महंगाई बढ़ने की स्थिति में केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती को टाल सकते हैं या मौद्रिक नीति को ज्यादा सख्त रख सकते हैं।

भारतीय शेयर बाजार के लिए आगे क्या संकेत?

आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक पश्चिम एशिया की स्थिति और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी। अगर तनाव कम होता है और तेल की कीमतें नीचे आती हैं तो बाजार में राहत देखने को मिल सकती है।

इसके विपरीत संघर्ष बढ़ने और तेल आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में भारतीय शेयर बाजार पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है।

Reuters के अनुसार, भारतीय बाजार पहले ही वैश्विक तनाव के कारण करीब 5% की गिरावट झेल चुका है। ऐसे में निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं।

आम निवेशकों को क्या समझना चाहिए?

बाजार में अचानक आई गिरावट के दौरान घबराकर जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना जरूरी है। शेयर बाजार में छोटी अवधि में भू-राजनीतिक घटनाओं का असर काफी तेज हो सकता है।

निवेशकों को कंपनियों के फंडामेंटल, सेक्टर की स्थिति और अपनी जोखिम क्षमता को ध्यान में रखकर ही कोई फैसला लेना चाहिए। केवल एक दिन की तेजी या गिरावट को देखकर रणनीति बदलना हमेशा उचित नहीं होता।

फिलहाल बाजार में सबसे महत्वपूर्ण संकेतक कच्चे तेल की कीमत, रुपये की चाल, विदेशी निवेशकों की गतिविधि और अमेरिका-ईरान तनाव से जुड़ी खबरें रहेंगी।

निष्कर्ष

शेयर बाजार में गिरावट की शुरुआत बुधवार को तेज रही। अमेरिकी-ईरान तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई, जिसके चलते सेंसेक्स करीब 789 अंक और निफ्टी करीब 269 अंक गिरकर खुले।

भारत के लिए महंगा कच्चा तेल खास चिंता का विषय है, क्योंकि इससे आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। अब बाजार की नजर पश्चिम एशिया के घटनाक्रम और तेल की कीमतों पर रहेगी।

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