बिहार में गंगा 2 फीट ऊपर, 13 जिलों में बाढ़; काशी में 407 परिवार विस्थापित
बिहार में बाढ़ का संकट लगातार गंभीर हो रहा है। गंगा समेत कई नदियों का जलस्तर बढ़ने से 13 जिले प्रभावित हैं। पटना में गंगा खतरे के निशान से करीब 2 फीट ऊपर बह रही है।
उधर, उत्तर प्रदेश के वाराणसी में भी बाढ़ का असर बढ़ रहा है। वरुणा नदी का पानी बढ़ने से 407 परिवारों के 1,768 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
बिहार में बाढ़ से 13 जिले प्रभावित
बिहार में लगातार बारिश के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ गया है। फिलहाल 13 जिलों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं।
प्रभावित जिलों में दरभंगा, मधुबनी, पश्चिम चंपारण, कटिहार, मधेपुरा, पूर्णिया, सहरसा, खगड़िया, वैशाली, बेगूसराय, भागलपुर, समस्तीपुर और मुंगेर शामिल हैं।
कई इलाकों में पानी खेतों और निचले क्षेत्रों तक पहुंच गया है। कुछ जगहों पर कटाव का खतरा भी बढ़ गया है।
प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। लोगों को नदी और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी जा रही है।
पटना में गंगा खतरे के निशान से ऊपर
पटना में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। केंद्रीय जल आयोग और प्रशासन की निगरानी के बीच नदी के और बढ़ने की आशंका बनी हुई है।
आकाशवाणी की रिपोर्ट के अनुसार, गांधी घाट पर गंगा के आज रात उच्चतम बाढ़ स्तर को पार करने की संभावना है। इसके बाद मोकामा के हाथीदह में भी जलस्तर बढ़ने का अनुमान है।
इस स्थिति को देखते हुए भोजपुर, पटना, सारण, वैशाली, नालंदा, बेगूसराय, लखीसराय और जहानाबाद के लोगों को सतर्क रहने को कहा गया है।
आठ नदियां खतरे के निशान के ऊपर
बिहार में सिर्फ गंगा ही चिंता का कारण नहीं है। राज्य की कई प्रमुख नदियों का जलस्तर भी तेजी से बढ़ा है।
रिपोर्टों के मुताबिक, आठ नदियां खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं। इससे नए इलाकों में भी बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। कई जगहों पर सड़क संपर्क भी प्रभावित हुआ है।
प्रशासन की ओर से राहत और बचाव दलों को तैयार रखा गया है। जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाएगा।
गंडक नदी से भी बढ़ी चिंता
नेपाल में भारी बारिश का असर बिहार की नदियों पर भी दिखाई दे रहा है। गंडक नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी से पश्चिम चंपारण के निचले इलाकों में खतरा बढ़ा है।
रिपोर्ट के अनुसार, गंडक बैराज से 1,84,400 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इसके बाद बगहा और आसपास के इलाकों में बाढ़ की आशंका बढ़ गई है।
स्थानीय प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने को कहा है। नदी के आसपास रहने वाले परिवारों पर विशेष नजर रखी जा रही है।
सोन नदी के टापुओं पर फंसे लोग
रोहतास जिले में सोन नदी का जलस्तर बढ़ने से भी मुश्किल बढ़ गई है। नौहट्टा क्षेत्र में सोन नदी के टापुओं पर खेती करने वाले करीब 100 लोगों के फंसे होने की जानकारी सामने आई है।
बढ़ते पानी को देखते हुए इन लोगों को सुरक्षित निकालने की कोशिश की जा रही है। राहत दल स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
नदी का बहाव तेज होने के कारण बचाव अभियान में सावधानी बरती जा रही है। प्रशासन लोगों से खुद नदी पार करने की कोशिश नहीं करने की अपील कर रहा है।
काशी में 407 परिवारों को सुरक्षित भेजा गया
वाराणसी में भी गंगा और वरुणा का जलस्तर बढ़ने से हालात चिंताजनक हैं। वरुणा नदी के पानी से कई निचले इलाकों में बाढ़ और जलभराव की स्थिति बनी है।
अब तक 407 परिवारों के 1,768 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। राहत और बचाव के लिए 36 नावों को तैनात किया गया है।
प्रशासन ने प्रभावित लोगों के लिए राहत शिविर बनाए हैं। लोगों को सुरक्षित जगहों पर रहने की सलाह दी जा रही है।
वाराणसी में नाव संचालन पर रोक
वाराणसी में गंगा का जलस्तर चेतावनी निशान को पार कर गया है। इसके बाद प्रशासन ने नाव संचालन पर रोक लगा दी है।
लोगों और श्रद्धालुओं से घाटों पर नहीं जाने की अपील की गई है। तेज बहाव वाले क्षेत्रों से भी दूरी बनाए रखने को कहा गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी वाराणसी के मेयर और जिलाधिकारी से फोन पर बात कर बाढ़ की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने लोगों को कम से कम परेशानी हो, इसके लिए जरूरी कदम उठाने को कहा।
वाराणसी में राहत शिविर बनाए गए
वाराणसी में प्रभावित लोगों के लिए 13 राहत शिविर बनाए गए हैं। बुधवार तक इनमें 219 प्रभावित परिवारों के 935 लोग रह रहे थे।
प्रशासन भोजन, पानी और दूसरी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर ध्यान दे रहा है। इसके साथ ही जलस्तर में होने वाले बदलाव की लगातार निगरानी की जा रही है।
गंगा और वरुणा दोनों के जलस्तर पर अधिकारियों की नजर है। यदि पानी और बढ़ता है तो और परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा सकता है।
बांध और बैराज पर भी नजर
बिहार में बाढ़ का खतरा बढ़ने के साथ बांधों और बैराजों की निगरानी भी तेज कर दी गई है। रोहतास के इंद्रपुरी बैराज के सभी 69 गेट खोल दिए गए हैं।
इस कदम का उद्देश्य बढ़ते पानी के दबाव को नियंत्रित करना है। हालांकि, इससे निचले इलाकों में पानी बढ़ने की चिंता भी बनी हुई है।
प्रशासन संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार स्थिति का जायजा ले रहा है। जरूरत के अनुसार राहत सामग्री और बचाव संसाधन भेजे जा रहे हैं।
लोगों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
बाढ़ के दौरान प्रशासन की सलाह मानना सबसे जरूरी है। नदी और जलभराव वाले इलाकों में जाने से बचना चाहिए।
लोग इन बातों का ध्यान रखें:
- नदी और घाटों के पास न जाएं।
- तेज बहाव वाले पानी को पार करने की कोशिश न करें।
- प्रशासन के निर्देश पर सुरक्षित स्थान पर जाएं।
- जरूरी दवाएं और दस्तावेज सुरक्षित रखें।
- बच्चों और बुजुर्गों को पानी वाले इलाकों से दूर रखें।
- बिजली के खुले तारों से दूरी बनाए रखें।
समय रहते सुरक्षित स्थान पर जाना जान बचाने में मदद कर सकता है। इसलिए खतरे को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
आगे भी बढ़ सकता है बाढ़ का खतरा
बिहार में गंगा और दूसरी नदियों का जलस्तर अभी चिंता का विषय बना हुआ है। प्रशासन ने कई जिलों में अलर्ट बढ़ा दिया है।
गांधी घाट और हाथीदह में गंगा के उच्चतम बाढ़ स्तर तक पहुंचने की आशंका स्थिति को और गंभीर बना रही है। ऐसे में अगले कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
दूसरी ओर, वाराणसी में भी गंगा और वरुणा का पानी बढ़ रहा है। ऐसे में बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के नदी किनारे बसे इलाकों में प्रशासन को लगातार सतर्क रहना होगा।
निष्कर्ष
बिहार में बाढ़ का संकट लगातार बढ़ रहा है। गंगा खतरे के निशान से करीब 2 फीट ऊपर बह रही है और 13 जिलों में बाढ़ का असर है। कई दूसरी नदियां भी खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गई हैं।
वहीं, काशी में वरुणा नदी के बढ़ते पानी के कारण 407 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है। प्रशासन ने राहत शिविर और नावों की व्यवस्था की है। फिलहाल सबसे जरूरी कदम लोगों की सुरक्षा और प्रभावित इलाकों में राहत पहुंचाना है।

