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पीएम मोदी के राजनीतिक जीवन के 25 साल पूरे, कैबिनेट ने पास किया ऐतिहासिक प्रस्ताव, मोदी बोले- “मैं आज भी एक छात्र हूं”

पीएम नरेंद्र मोदी के राजनीतिक जीवन के 25 साल पूरे होने पर केंद्रीय कैबिनेट में ऐतिहासिक प्रस्ताव पास | News Critic

पीएम मोदी के राजनीतिक जीवन के 25 साल पूरे होने पर केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उनके लंबे सार्वजनिक जीवन और देश के प्रति योगदान को रेखांकित करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया। 7 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष पूरे किए। इसी दिन उन्होंने अपने राजनीतिक सफर के 25 साल पूरे होने को लेकर अपनी भावनाएं भी साझा कीं।

प्रधानमंत्री ने इस मौके पर कहा कि सार्वजनिक जीवन में इतने लंबे समय के बाद भी वह खुद को सीखने वाला व्यक्ति मानते हैं। उन्होंने कहा कि वह आज भी एक छात्र हैं और देश से लगातार सीखते रहते हैं।

7 अक्टूबर को पूरे हुए सार्वजनिक जीवन के 25 साल

नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में पहली बार किसी संवैधानिक पद की जिम्मेदारी संभाली थी। इसके बाद उनका राजनीतिक सफर लगातार आगे बढ़ा।

गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में लंबे कार्यकाल के बाद वह 2014 में देश के प्रधानमंत्री बने। इसके बाद 2019 और 2024 में भी भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन ने केंद्र में सरकार बनाई और नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद संभाला।

इस तरह 7 अक्टूबर 2026 को उनके सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष पूरे हुए। इस अवसर पर केंद्र सरकार और भाजपा की ओर से कई कार्यक्रम और संदेश सामने आए।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पारित किया प्रस्ताव

प्रधानमंत्री के 25 वर्ष के सार्वजनिक जीवन के अवसर पर केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक विशेष प्रस्ताव पारित किया। इसमें प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन और देश के प्रति उनके योगदान का उल्लेख किया गया।

कैबिनेट की बैठक में मंत्रियों ने प्रधानमंत्री के लंबे सार्वजनिक जीवन को लेकर उनके नेतृत्व और विभिन्न क्षेत्रों में किए गए कार्यों को रेखांकित किया। प्रस्ताव में उनके गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री बनने तक के सफर का उल्लेख किया गया।

सरकार की ओर से इस अवसर को प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन के महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देखा गया। वहीं, विपक्षी दलों ने सरकार और प्रधानमंत्री के कामकाज को लेकर अपनी अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी दी हैं।

पीएम मोदी बोले- मैं आज भी एक छात्र हूं

25 साल पूरे होने के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि वह आज भी खुद को एक छात्र मानते हैं। उनका कहना था कि सीखने की प्रक्रिया कभी खत्म नहीं होती।

उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन के अनुभवों को याद करते हुए कहा कि जनता और देश से उन्हें लगातार सीखने का अवसर मिला। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि सार्वजनिक जीवन में व्यक्ति को हर दिन नई परिस्थितियों और चुनौतियों से सीखना पड़ता है।

उनके इस बयान को उनके लंबे राजनीतिक सफर के संदर्भ में देखा जा रहा है। 25 साल के दौरान उन्होंने राज्य और केंद्र दोनों स्तरों पर लंबे समय तक शासन की जिम्मेदारी संभाली है।

गुजरात से शुरू हुआ था संवैधानिक पद का सफर

नरेंद्र मोदी ने 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। उस समय गुजरात में राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदल रही थीं।

मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने राज्य में कई क्षेत्रों में काम किया। इसके बाद 2002, 2007 और 2012 के गुजरात विधानसभा चुनावों में भाजपा ने उनके नेतृत्व में सरकार बनाई।

गुजरात में करीब 12 वर्ष मुख्यमंत्री रहने के बाद 2014 में उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में कदम रखा। भाजपा ने लोकसभा चुनाव में बहुमत हासिल किया और नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने।

2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद बदली भूमिका

2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी की भूमिका राष्ट्रीय स्तर पर हो गई। केंद्र सरकार ने कई योजनाओं और कार्यक्रमों को आगे बढ़ाया।

इनमें जनधन योजना, स्वच्छ भारत अभियान, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, डिजिटल इंडिया और मेक इन इंडिया जैसी पहल शामिल रहीं। इन योजनाओं के प्रभाव और क्रियान्वयन को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों और विशेषज्ञों की अलग-अलग राय रही है।

इसके अलावा सरकार ने बुनियादी ढांचे, डिजिटल भुगतान, रक्षा उत्पादन और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण जैसे क्षेत्रों पर भी जोर दिया।

2019 और 2024 में भी प्रधानमंत्री बने

2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 303 सीटें जीतीं। इसके बाद नरेंद्र मोदी ने लगातार दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली।

2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को अपने दम पर बहुमत नहीं मिला। हालांकि, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए ने बहुमत हासिल किया और नरेंद्र मोदी ने तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली।

इसके साथ ही वह जवाहरलाल नेहरू के बाद लगातार तीन बार प्रधानमंत्री बनने वाले दूसरे व्यक्ति बने।

विदेश नीति और वैश्विक मंच पर भी रहा फोकस

प्रधानमंत्री मोदी के 25 साल के सार्वजनिक जीवन में विदेश नीति भी महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने कई देशों की यात्राएं कीं और भारत के साथ विभिन्न देशों के संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया।

भारत ने जी20 की अध्यक्षता के दौरान भी कई वैश्विक मुद्दों पर अपनी भूमिका सामने रखी। इसके अलावा क्वाड, ब्रिक्स और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की भागीदारी बढ़ी।

हालांकि, विदेश नीति और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार के फैसलों को लेकर विपक्ष और विशेषज्ञों की अलग-अलग राय भी रही है।

25 साल के सफर में कई बड़े फैसले

नरेंद्र मोदी के राजनीतिक जीवन के 25 वर्षों में कई महत्वपूर्ण फैसले और घटनाएं शामिल रही हैं। 2016 की नोटबंदी, 2017 में जीएसटी लागू करना, 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 से जुड़े संवैधानिक बदलाव और 2020 के बाद कोविड-19 महामारी के दौरान सरकार की नीतियां उनके कार्यकाल के प्रमुख घटनाक्रम रहे।

इसके अलावा अयोध्या में राम मंदिर निर्माण, नई संसद भवन परियोजना और भारत की रक्षा एवं अंतरिक्ष क्षमताओं को लेकर भी सरकार ने कई बड़े कदम उठाए।

इन फैसलों पर देश में समर्थन और विरोध दोनों देखने को मिले। इसलिए 25 साल का यह राजनीतिक सफर कई महत्वपूर्ण नीतिगत और राजनीतिक घटनाओं से जुड़ा रहा है।

अब आगे की राजनीति पर भी नजर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के बाद अब उनके राजनीतिक सफर के अगले चरण पर भी नजर रहेगी। केंद्र में एनडीए सरकार का कार्यकाल जारी है और सरकार कई बड़े लक्ष्यों पर काम कर रही है।

वहीं, विपक्षी दल आगामी चुनावों और विभिन्न नीतिगत मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में हैं। ऐसे में अगले कुछ साल राष्ट्रीय राजनीति के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।

प्रधानमंत्री के लिए भी प्रशासनिक अनुभव और बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच संतुलन बनाए रखना अहम रहेगा।

निष्कर्ष

पीएम मोदी के राजनीतिक जीवन के 25 साल पूरे होना भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में संवैधानिक जिम्मेदारी संभालने के बाद नरेंद्र मोदी 2014 में प्रधानमंत्री बने और 2024 में तीसरी बार इस पद पर पहुंचे।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रस्ताव पारित किया, जबकि प्रधानमंत्री ने अपने लंबे सफर को याद करते हुए कहा कि वह आज भी एक छात्र हैं। 25 वर्षों का यह सफर आगे भी भारतीय राजनीति में चर्चा और विश्लेषण का विषय बना रहेगा।

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