उत्तराखंड में रेखा आर्या के पति पर ₹210 करोड़ की संपत्ति के आरोप, SIT जांच शुरू
उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या और उनके पति गिरधारी लाल साहू के बीच विवाद अब गंभीर कानूनी मामले में बदल गया है। रेखा आर्या ने अपने पति पर मारपीट, उत्पीड़न और जान से मारने की धमकी देने जैसे आरोप लगाए हैं। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच के लिए नौ सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) गठित किया है।
दूसरी ओर, गिरधारी लाल साहू ने मंत्री पर पलटवार करते हुए ₹210 करोड़ की कथित अवैध संपत्ति जमा करने का आरोप लगाया है। उन्होंने इस मामले की भी जांच कराने की मांग की है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में सार्वजनिक रूप से दस्तावेजी सबूत पेश नहीं किए हैं।
इस पूरे मामले में दोनों पक्षों की ओर से गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इसलिए जांच एजेंसियों के लिए शिकायत, दस्तावेजों, कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग और अन्य साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच करना महत्वपूर्ण होगा।
रेखा आर्या ने पति के खिलाफ दर्ज कराई FIR
यह विवाद 15 अक्टूबर 2026 को उस समय सामने आया, जब रेखा आर्या ने देहरादून के कैंट थाने में अपने पति गिरधारी लाल साहू के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई। शिकायत में उन्होंने मारपीट, उत्पीड़न, जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल और जान से मारने की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए।
मंत्री ने अपनी शिकायत में यह भी आरोप लगाया कि उनके पति ने पहली शादी की बात उनसे छिपाई थी। उन्होंने कथित तौर पर अन्य महिलाओं से संबंध होने का विरोध किया तो उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। इसके अलावा, उन्होंने कुछ कंपनियों में निदेशक पद से हटाने के लिए उनके हस्ताक्षर और दस्तावेजों के कथित दुरुपयोग का आरोप भी लगाया।
रेखा आर्या ने एक ऑडियो रिकॉर्डिंग का हवाला देते हुए हत्या की साजिश की आशंका भी जताई। उन्होंने अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता व्यक्त की है।
इन आरोपों की अभी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस मामले में शिकायत और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच कर रही है।
नौ सदस्यीय SIT को सौंपी गई जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए देहरादून पुलिस ने नौ सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया है। इस टीम की अगुवाई ग्रामीण पुलिस अधीक्षक जया बलोनी कर रही हैं। टीम में अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी शामिल हैं।
SIT का मुख्य काम रेखा आर्या की शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच करना है। इसके लिए पुलिस संबंधित दस्तावेजों, उपलब्ध रिकॉर्ड और कथित ऑडियो की पड़ताल करेगी।
ऑडियो रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता जांचने के लिए फॉरेंसिक परीक्षण भी कराया जा सकता है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि रिकॉर्डिंग में मौजूद आवाज किसकी है और उसमें किसी तरह का बदलाव किया गया है या नहीं।
जांच दल मंत्री के बयान भी दर्ज करेगा। इसके बाद उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित लोगों से पूछताछ के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि SIT का गठन अपने आप में किसी आरोप को सही साबित नहीं करता। जांच का उद्देश्य तथ्यों की पुष्टि करना और जिम्मेदारी तय करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य जुटाना है।
₹210 करोड़ की संपत्ति को लेकर पति ने क्या दावा किया?
रेखा आर्या की शिकायत के बाद गिरधारी लाल साहू ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी करके अपनी बात रखी। उन्होंने मंत्री पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए और दावा किया कि उनके पास करीब ₹210 करोड़ की अवैध संपत्ति है।
साहू ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से इस मामले की जांच किसी उपयुक्त एजेंसी से कराने की मांग की। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्होंने पहले भी मंत्री के विभागों में कथित भ्रष्टाचार को लेकर आपत्ति जताई थी।
हालांकि, सार्वजनिक रूप से सामने आई जानकारी के अनुसार, साहू ने ₹210 करोड़ की कथित संपत्ति के आरोपों के समर्थन में दस्तावेजी प्रमाण पेश नहीं किए हैं। इसलिए इस दावे को फिलहाल आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
संपत्ति से जुड़े किसी भी आरोप की पुष्टि के लिए आयकर विवरण, संपत्ति के रिकॉर्ड, कंपनियों से संबंधित दस्तावेज और अन्य वित्तीय जानकारी की जांच आवश्यक हो सकती है। संबंधित एजेंसियां जांच करती हैं तो इन रिकॉर्ड के आधार पर दावे की वास्तविकता का पता लगाया जा सकता है।
रेखा आर्या ने आरोपों को बताया निराधार
गिरधारी लाल साहू के आरोपों के बाद रेखा आर्या ने अपनी संपत्ति को लेकर उठाए गए सवालों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि उनकी आय और वित्तीय रिकॉर्ड पारदर्शी हैं और जरूरत पड़ने पर किसी भी तरह की जांच के लिए तैयार हैं।
मंत्री के अनुसार, उनके आयकर रिटर्न और वित्तीय दस्तावेजों से उनकी आय की जानकारी मिल सकती है। उन्होंने कहा कि यदि किसी को संदेह है तो जांच के माध्यम से सच्चाई सामने लाई जा सकती है।
दूसरी ओर, साहू ने रेखा आर्या द्वारा साझा की गई ऑडियो रिकॉर्डिंग को फर्जी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार बताया है। उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को भी गलत करार दिया और मंत्री से प्राथमिकी वापस लेने की अपील की।
इस तरह दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के दावों को खारिज किया है। अब पुलिस की जांच और उपलब्ध दस्तावेज इस विवाद के अलग-अलग पहलुओं को स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण होंगे।
कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग की जांच क्यों महत्वपूर्ण?
इस मामले में ऑडियो रिकॉर्डिंग भी जांच का अहम हिस्सा बन गई है। रेखा आर्या ने इसे अपनी शिकायत में शामिल करते हुए हत्या की साजिश से जुड़ी आशंका जताई है। वहीं, गिरधारी लाल साहू ने रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता पर सवाल उठाए हैं।
ऐसी स्थिति में केवल रिकॉर्डिंग के सोशल मीडिया पर प्रसारित होने से उसकी सत्यता साबित नहीं होती। फॉरेंसिक जांच के जरिए आवाज, रिकॉर्डिंग की निरंतरता और उसमें संभावित बदलाव जैसे पहलुओं की जांच की जा सकती है।
इसके साथ ही रिकॉर्डिंग में कथित बातचीत का संदर्भ समझना भी जरूरी है। जांच अधिकारियों को यह देखना होगा कि बातचीत कब हुई, उसमें कौन शामिल था और क्या दूसरे साक्ष्य भी उस दावे का समर्थन करते हैं।
जब तक जांच के परिणाम सामने नहीं आते, तब तक ऑडियो में कही गई बातों को प्रमाणित तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
राजनीतिक गलियारों में भी मामले की चर्चा
रेखा आर्या उत्तराखंड सरकार में महिला एवं बाल विकास मंत्री हैं। ऐसे में उनके और उनके पति के बीच सामने आया विवाद राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।
मामले पर विपक्षी नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी है। उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने मंत्री के आरोपों पर चिंता जताई और मामले की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर जोर दिया।
हालांकि, इस मामले को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से अलग रखकर तथ्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर देखना महत्वपूर्ण है। किसी भी पक्ष के दावों को बिना जांच के अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता।
यदि जांच में किसी वित्तीय अनियमितता, उत्पीड़न या अन्य अपराध से जुड़े ठोस साक्ष्य सामने आते हैं, तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, जिन आरोपों की पुष्टि नहीं होती, उनके बारे में निष्कर्ष निकालने से बचना जरूरी होगा।
आगे क्या होगा?
अब सभी की नजरें SIT की जांच पर हैं। जांच दल रेखा आर्या की शिकायत, संबंधित दस्तावेजों और कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग की पड़ताल करेगा। जरूरत पड़ने पर संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए जाएंगे और तकनीकी साक्ष्यों की भी जांच की जाएगी।
दूसरी ओर, ₹210 करोड़ की कथित अवैध संपत्ति का आरोप एक अलग जांच का विषय है। इस दावे की पुष्टि के लिए वित्तीय रिकॉर्ड और संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की जांच आवश्यक होगी। फिलहाल, इस रकम को लेकर कोई प्रमाणित निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि दोनों पक्षों की ओर से लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और किन मामलों में आगे कानूनी कार्रवाई की जरूरत है।
निष्कर्ष
उत्तराखंड की मंत्री रेखा आर्या और उनके पति गिरधारी लाल साहू के बीच विवाद ने गंभीर रूप ले लिया है। मंत्री ने पति पर मारपीट, उत्पीड़न, धमकी और अन्य आरोप लगाए हैं, जबकि साहू ने उन पर ₹210 करोड़ की कथित अवैध संपत्ति जमा करने का दावा किया है।
रेखा आर्या की शिकायत की जांच के लिए नौ सदस्यीय SIT गठित की गई है। वहीं, संपत्ति से जुड़े आरोपों के समर्थन में दस्तावेजी प्रमाण सामने आना जरूरी है। फिलहाल, दोनों पक्षों के दावे जांच के दायरे में हैं। अब पुलिस की जांच, ऑडियो की फॉरेंसिक पड़ताल और वित्तीय रिकॉर्ड से जुड़े तथ्यों पर आगे की स्थिति निर्भर करेगी।

