UP: IGRS निस्तारण में लापरवाही पर बड़ा एक्शन, 12 दरोगा लाइन हाजिर
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में जनशिकायतों के निस्तारण में लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों पर बड़ी कार्रवाई हुई है। पुलिस आयुक्त तरुण गाबा ने 12 दरोगाओं को लाइन हाजिर कर दिया है। इन पुलिसकर्मियों पर IGRS शिकायतों और जनसुनवाई से जुड़े मामलों में लापरवाही बरतने का आरोप है।
शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 को की गई इस कार्रवाई से पुलिस विभाग में हलचल मच गई है। कार्रवाई में अलग-अलग थानों और चौकियों पर तैनात अधिकारी शामिल हैं। पुलिस आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि जनता की शिकायतों को नजरअंदाज करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
लखनऊ में 12 दरोगाओं पर हुई कार्रवाई
लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट में जनशिकायतों की स्थिति की समीक्षा के बाद यह कदम उठाया गया। समीक्षा में कुछ अधिकारियों के कामकाज को संतोषजनक नहीं पाया गया। इसके बाद पुलिस आयुक्त ने 12 दरोगाओं को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर करने का आदेश दिया।
इस कार्रवाई में छह चौकी प्रभारी और छह अन्य उपनिरीक्षक शामिल हैं। ये अधिकारी अलग-अलग थानों और चौकियों में तैनात थे। पुलिस प्रशासन ने शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही को कार्रवाई का आधार बनाया है।
पुलिस आयुक्त तरुण गाबा ने अधीनस्थ अधिकारियों को साफ संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि सरकारी कामकाज में उदासीनता और जनशिकायतों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जाएगी।
किन पुलिसकर्मियों को किया गया लाइन हाजिर?
कार्रवाई की सूची में लखनऊ के कई प्रमुख थाना क्षेत्रों में तैनात पुलिसकर्मी शामिल हैं। इनमें गोमतीनगर, चिनहट, गुडंबा, आलमबाग और मड़ियांव क्षेत्र के अधिकारी भी हैं।
लाइन हाजिर किए गए 12 पुलिसकर्मियों के नाम इस प्रकार हैं:
- राखी – विवेकखंड चौकी, गोमतीनगर
- मनोज कुमार सिंह – जलसेतु चौकी, चिनहट
- दिवाकर सरोर – शिवानी विहार चौकी, गुडंबा
- वीर विक्रम सिंह – बस स्टैंड चौकी, आलमबाग
- दीपक पांडेय – नौबस्ता चौकी, मड़ियांव
- अशोक यादव – इंदौरा बाग चौकी, बख्शी का तालाब
- दीपक कुमार – सुशांत गोल्फ सिटी थाना
- अतुल सिंह – मोहनलालगंज थाना
- भगवान सिंह – दुबग्गा थाना
- रजत सिंह – वजीरगंज थाना
- भारत सिंह – पारा थाना
- अनिल भगत – गौतमपल्ली थाना
इन सभी पुलिसकर्मियों को उनके मौजूदा कार्यस्थल से हटाकर पुलिस लाइन भेजा गया है। इसके अलावा, उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के पहलू पर भी आगे की प्रक्रिया की जा सकती है।
क्या है IGRS पोर्टल?
IGRS का पूरा नाम इंटीग्रेटेड ग्रीवांस रिड्रेसल सिस्टम है। यह आम नागरिकों की शिकायतों को दर्ज करने और उनके समाधान के लिए बनाया गया ऑनलाइन माध्यम है।
उत्तर प्रदेश में इस पोर्टल के जरिए लोग अपनी समस्याएं सीधे संबंधित विभागों तक पहुंचा सकते हैं। इसमें पुलिस, राजस्व, नगर विकास और अन्य सरकारी विभागों से जुड़ी शिकायतें शामिल होती हैं।
इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से राहत देना है। नागरिक घर बैठे अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं। इसके बाद संबंधित विभाग को तय समयसीमा में उस पर कार्रवाई करनी होती है।
IGRS के माध्यम से शिकायतकर्ता अपनी शिकायत की स्थिति भी देख सकता है। उसे यह जानकारी मिलती है कि शिकायत किस अधिकारी के पास है और उस पर क्या कार्रवाई हुई है।
हालांकि, केवल पोर्टल पर शिकायत बंद कर देना पर्याप्त नहीं होता। शिकायतकर्ता की समस्या का वास्तविक और संतोषजनक समाधान करना भी जरूरी है।
जनसुनवाई में लापरवाही पर पुलिस आयुक्त सख्त
लखनऊ पुलिस प्रशासन ने पहले भी थाना और चौकी प्रभारियों को निर्देश दिए थे। अधिकारियों से कहा गया था कि वे जनता की शिकायतों को प्राथमिकता दें। शिकायतकर्ताओं की बात ध्यान से सुनें और समय पर उचित कार्रवाई करें।
इसके बावजूद कुछ अधिकारियों के कामकाज में अपेक्षित सुधार नहीं दिखाई दिया। जनशिकायतों और IGRS मामलों के निस्तारण में लापरवाही सामने आने के बाद कार्रवाई की गई।
पुलिस आयुक्त तरुण गाबा ने सभी अधीनस्थों को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि शिकायतों के समाधान में देरी और सरकारी कार्यों के प्रति उदासीनता स्वीकार नहीं होगी।
इसके साथ ही अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारी समझने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिसकर्मियों को शिकायतकर्ताओं के साथ संवेदनशील व्यवहार करने पर भी जोर दिया गया है।
आम लोगों की शिकायतों का समय पर समाधान जरूरी
IGRS पोर्टल का उद्देश्य सरकारी व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बनाना है। इसके जरिए नागरिक अपनी समस्याएं प्रशासन तक पहुंचा सकते हैं। लेकिन शिकायत दर्ज होने के बाद उसका समय पर समाधान होना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
कई बार लोगों को छोटी समस्याओं के समाधान के लिए भी थाने और सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। ऐसे में ऑनलाइन शिकायत व्यवस्था उनके लिए मददगार साबित हो सकती है।
पुलिस से जुड़ी शिकायतों में जमीन विवाद, आपसी झगड़े, मारपीट, धोखाधड़ी और अन्य स्थानीय समस्याएं शामिल हो सकती हैं। इन मामलों में समय पर कार्रवाई नहीं होने से विवाद बढ़ने की आशंका रहती है।
इसलिए थाना और चौकी स्तर पर शिकायतों की नियमित निगरानी जरूरी है। अधिकारियों को शिकायत की गंभीरता समझकर उचित कदम उठाने चाहिए।
साथ ही, शिकायतकर्ता को कार्रवाई की सही जानकारी देना भी जरूरी है। इससे लोगों का पुलिस व्यवस्था पर भरोसा मजबूत हो सकता है।
यूपी पुलिस में जनशिकायतों को लेकर बढ़ी जवाबदेही
उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय भी जनशिकायतों के निस्तारण को लेकर लगातार सख्ती बरत रहा है। 28 अक्टूबर को डीजीपी राजीव कृष्ण ने समीक्षा बैठक के बाद नौ जिलों के 10 थानाध्यक्षों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
इन मामलों में लखीमपुर खीरी, उन्नाव, एटा, आगरा, प्रतापगढ़, बदायूं, बिजनौर, मथुरा और लखनऊ के थाने शामिल थे।
डीजीपी ने अधिकारियों को लंबित शिकायतों की समीक्षा करने के निर्देश दिए थे। साथ ही, तीन दिनों के भीतर रिपोर्ट भेजने को कहा गया था। रिपोर्ट में शिकायतों के लंबित रहने के कारण और जिम्मेदार पुलिसकर्मियों की जानकारी मांगी गई थी।
उन्होंने स्पष्ट किया था कि शिकायतों का निष्पक्ष और समयबद्ध समाधान पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
इसके अलावा, थानों और चौकियों पर आने वाले फरियादियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करने पर भी जोर दिया गया था। शिकायत दर्ज करने से इनकार करने या अनावश्यक देरी करने जैसी शिकायतों को गंभीरता से लेने के निर्देश दिए गए थे।
आगे किन बातों पर रहेगी नजर?
लखनऊ में 12 दरोगाओं को लाइन हाजिर करने के बाद अब पुलिस प्रशासन की निगरानी व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी। अधिकारियों के कामकाज और शिकायतों के निस्तारण की गुणवत्ता पर ध्यान दिया जाएगा।
इसके अलावा, यह भी देखना होगा कि संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय प्रक्रिया में क्या निष्कर्ष सामने आते हैं। फिलहाल लाइन हाजिर करने की कार्रवाई को अंतिम विभागीय दंड नहीं माना जाना चाहिए।
पुलिस प्रशासन के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी लंबित शिकायतों का समाधान सुनिश्चित करना है। इसके लिए थाना और चौकी स्तर पर नियमित समीक्षा जरूरी होगी।
यदि शिकायतों का समाधान समय पर और निष्पक्ष तरीके से होता है, तो आम नागरिकों को सीधा लाभ मिलेगा। वहीं, लापरवाही करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही भी तय हो सकेगी।
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश में IGRS शिकायतों का निस्तारण अब पुलिस प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। लखनऊ में 12 दरोगाओं को लाइन हाजिर करने की कार्रवाई इसी दिशा में उठाया गया कदम है। पुलिस आयुक्त तरुण गाबा ने साफ कर दिया है कि जनशिकायतों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं होगी।
हालांकि, इस कार्रवाई का वास्तविक असर तभी दिखाई देगा, जब आम लोगों की समस्याओं का समय पर समाधान होगा। अब देखना होगा कि पुलिस विभाग अपनी कार्यप्रणाली में कितना सुधार करता है और शिकायतकर्ताओं को कितनी राहत मिलती है।

