अमित शाह का हरियाणा दौरा: करनाल में बोले- कांग्रेस की अराजकता और तुष्टीकरण की राजनीति पूरी तरह एक्सपोज
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को हरियाणा के दौरे पर पहुंचे। उन्होंने करनाल में भारतीय जनता पार्टी की ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा का नेतृत्व किया। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस पर तीखा राजनीतिक हमला बोला।
पदयात्रा के बाद आयोजित जनसभा में अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस की अराजकता और तुष्टीकरण की राजनीति पूरी तरह एक्सपोज हो चुकी है। उन्होंने दावा किया कि देश की जनता इस राजनीति के खिलाफ आवाज उठा रही है।
इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और भाजपा नेता स्मृति ईरानी सहित कई पार्टी नेता शामिल हुए। भाजपा ने इस आयोजन को अपने राजनीतिक अभियान के अंतिम चरण का महत्वपूर्ण कार्यक्रम बताया।
करीब एक किलोमीटर लंबी रही पदयात्रा
अमित शाह ने करनाल के सेक्टर-12 इलाके से पदयात्रा की शुरुआत की। इस दौरान पार्टी के नेता, कार्यकर्ता और समर्थक उनके साथ पैदल चले। यात्रा का मार्ग करीब एक किलोमीटर रखा गया था।
भाजपा के कार्यक्रम के अनुसार, पदयात्रा के बाद अमित शाह ने जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने विपक्ष की राजनीति, संसद की कार्यवाही और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी।
कार्यक्रम को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। पदयात्रा मार्ग और सभा स्थल के आसपास बैरिकेडिंग की गई। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने लोगों की आवाजाही को नियंत्रित किया।
भाजपा ने इस आयोजन के जरिए अपने अभियान का संदेश आम लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की। पार्टी कार्यकर्ताओं ने भी बड़ी संख्या में कार्यक्रम में भाग लिया।
कांग्रेस की अराजकता और तुष्टीकरण पर निशाना
जनसभा को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कांग्रेस की राजनीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की अराजकता और तुष्टीकरण की राजनीति अब जनता के सामने आ चुकी है।
शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस लोकतांत्रिक संस्थाओं और संसद की कार्यवाही को प्रभावित कर रही है। उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि संसद को सुचारु रूप से चलने नहीं दिया जाता।
गृह मंत्री ने कहा कि भाजपा संसद, विधानसभा और सड़कों पर कांग्रेस को जवाब देगी। उन्होंने दावा किया कि जनता कांग्रेस की राजनीति को समझ चुकी है।
शाह ने यह भी कहा कि कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति लगातार कमजोर हो रही है। उन्होंने हरियाणा का उल्लेख करते हुए दावा किया कि कांग्रेस की हार की शुरुआत इसी राज्य से हुई थी।
ये सभी बातें अमित शाह के राजनीतिक भाषण का हिस्सा थीं। कांग्रेस की ओर से इन आरोपों पर अलग-अलग मौकों पर विरोध और जवाब सामने आते रहे हैं।
22 अक्टूबर से 5 नवंबर तक चला भाजपा का अभियान
भाजपा ने ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान को 22 अक्टूबर से 5 नवंबर तक चलाया। इसके तहत पार्टी ने विभिन्न राज्यों में कार्यक्रम आयोजित किए।
अभियान का प्रमुख उद्देश्य कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के ‘वोट चोरी’ संबंधी आरोपों का राजनीतिक जवाब देना था। भाजपा ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर विपक्ष की आलोचना पर भी अपनी बात रखी।
पार्टी नेताओं ने अलग-अलग स्थानों पर पदयात्राएं और जनसभाएं आयोजित कीं। इन कार्यक्रमों में चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई।
करनाल में अमित शाह की पदयात्रा इस अभियान का अंतिम दिन का प्रमुख कार्यक्रम रही। भाजपा ने इसे विपक्ष के आरोपों के जवाब में जनसंपर्क की पहल के रूप में पेश किया।
वोट चोरी और एसआईआर को लेकर भाजपा-कांग्रेस में बहस
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर देश में राजनीतिक बहस जारी है। कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी पहले भी मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठा चुके हैं। विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची में किसी भी तरह की अनियमितता लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।
दूसरी ओर, भाजपा विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक बताती रही है। पार्टी का कहना है कि चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर बिना ठोस आधार के सवाल उठाना उचित नहीं है।
इसी विवाद के बीच भाजपा ने अपना अभियान चलाया। करनाल में अमित शाह ने कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए पार्टी की राजनीति पर निशाना साधा।
इस मुद्दे पर दोनों दलों के बीच राजनीतिक टकराव आगे भी जारी रह सकता है। चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और संस्थाओं की जवाबदेही इस बहस के प्रमुख विषय बने हुए हैं।
राहुल गांधी पर भी अमित शाह का हमला
अमित शाह ने अपने संबोधन में राहुल गांधी का नाम लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी संसद की कार्यवाही में बाधा डालते हैं।
शाह ने कहा कि विपक्ष को अपने मुद्दे संसद में उठाने चाहिए। उनके अनुसार, संसद चर्चा और विचार-विमर्श का मंच है। वहां हंगामा करने के बजाय सवालों पर बहस होनी चाहिए।
भाजपा का कहना है कि विपक्ष को चुनाव आयोग और मतदाता सूची से जुड़े आरोपों पर सदन में चर्चा करनी चाहिए। वहीं, कांग्रेस का पक्ष है कि चुनावी पारदर्शिता से जुड़े सवाल उठाना विपक्ष की जिम्मेदारी है।
इस तरह संसद की कार्यवाही और चुनावी प्रक्रिया करनाल की जनसभा में राजनीतिक बहस के प्रमुख विषय रहे।
1984 के सिख विरोधी दंगों का किया जिक्र
अमित शाह ने अपने भाषण में 1984 के सिख विरोधी दंगों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उस दौर की घटनाओं को याद किया।
1984 में देश के कई हिस्सों में सिख समुदाय के लोगों को हिंसा का सामना करना पड़ा था। इन घटनाओं में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी। इसके बाद पीड़ित परिवारों ने लंबे समय तक न्याय और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
शाह ने इस ऐतिहासिक घटना का जिक्र करके कांग्रेस की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने इसे पार्टी की राजनीति से जोड़कर अपनी बात रखी।
1984 के दंगे भारतीय इतिहास का संवेदनशील और महत्वपूर्ण अध्याय हैं। इस विषय पर राजनीतिक दलों के बीच लंबे समय से बहस होती रही है।
अंबाला में शहीद स्मारक का लोकार्पण भी दौरे में शामिल
अमित शाह के हरियाणा दौरे में करनाल के साथ अंबाला का कार्यक्रम भी शामिल रहा। यहां केंद्रीय गृह मंत्री को नवनिर्मित राष्ट्रीय शहीद स्मारक का लोकार्पण करना था।
यह स्मारक 1857 के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े शहीदों और उनके योगदान को सम्मान देने के उद्देश्य से बनाया गया है। इसके निर्माण पर करीब 800 करोड़ रुपये खर्च होने की जानकारी सामने आई थी।
स्मारक का निर्माण अंबाला छावनी में लगभग 22 एकड़ क्षेत्र में किया गया है। इसका उद्देश्य स्वतंत्रता संग्राम के उन नायकों को याद करना है, जिनके योगदान को व्यापक पहचान नहीं मिल पाई।
लोकार्पण कार्यक्रम के बाद अमित शाह की जनसभा का भी कार्यक्रम रखा गया था। इस तरह उनका हरियाणा दौरा राजनीतिक और ऐतिहासिक महत्व के दो प्रमुख आयोजनों से जुड़ा रहा।
कांग्रेस और भाजपा के बीच आगे भी जारी रहेगी राजनीतिक बहस
करनाल की पदयात्रा के जरिए भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों का जवाब देने की कोशिश की। पार्टी ने एसआईआर, वोट चोरी, संसद की कार्यवाही और विपक्ष की राजनीति को अपने अभियान का प्रमुख हिस्सा बनाया।
दूसरी ओर, कांग्रेस चुनावी पारदर्शिता और सरकारी संस्थाओं की जवाबदेही जैसे मुद्दे उठाती रही है। दोनों दलों के बीच इन विषयों पर मतभेद स्पष्ट दिखाई देते हैं।
आने वाले समय में चुनावी प्रक्रिया और संसद की भूमिका को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी रह सकती है। हरियाणा में भी भाजपा और कांग्रेस इन मुद्दों के जरिए जनता के बीच अपना पक्ष रखने की कोशिश करेंगी।
निष्कर्ष
अमित शाह का हरियाणा दौरा भाजपा के ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान के अंतिम दिन आयोजित हुआ। करनाल में पदयात्रा का नेतृत्व करते हुए उन्होंने कांग्रेस पर अराजकता और तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने राहुल गांधी और विपक्ष की संसद में भूमिका पर भी सवाल उठाए।
वहीं, कांग्रेस चुनावी पारदर्शिता और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाती रही है। ऐसे में अमित शाह का यह दौरा भाजपा और कांग्रेस के बीच जारी राजनीतिक टकराव का एक अहम पड़ाव रहा।

