महादेव सट्टा ऐप का बड़ा एक्शन: सौरभ चंद्राकर 8 दिन की CBI रिमांड पर, दिल्ली में पूछताछ शुरू
छत्तीसगढ़ के चर्चित महादेव सट्टा ऐप मामले में जांच एजेंसियों को बड़ी कामयाबी मिली है। इस मामले के प्रमुख आरोपी सौरभ चंद्राकर को रायपुर की विशेष अदालत ने 8 दिन की CBI रिमांड पर भेज दिया है। ओमान से भारत लाए जाने के बाद अब उससे दिल्ली स्थित CBI मुख्यालय में पूछताछ की जा रही है।
जांच एजेंसी का फोकस कथित सट्टेबाजी नेटवर्क, करोड़ों रुपये के लेनदेन और इस पूरे सिंडिकेट से जुड़े लोगों की भूमिका पर है। वहीं, बचाव पक्ष ने प्रत्यर्पण की कानूनी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। इस कार्रवाई के बाद देशभर में चर्चित महादेव सट्टा ऐप मामले की जांच एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है।
सौरभ चंद्राकर 8 दिन की CBI रिमांड पर
महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी मामले में सौरभ चंद्राकर को 4 नवंबर 2026 को रायपुर की विशेष CBI अदालत में पेश किया गया था। केंद्रीय जांच ब्यूरो ने उससे विस्तृत पूछताछ के लिए कस्टोडियल रिमांड मांगी थी।
विशेष न्यायाधीश मनोज कुमार सिंह ठाकुर की अदालत ने सुनवाई के बाद 8 दिन की रिमांड मंजूर कर दी। अदालत ने CBI को आरोपी को दिल्ली ले जाकर पूछताछ करने की अनुमति भी दी।
इसके बाद जांच एजेंसी उसे अपने साथ दिल्ली ले गई। अब पूछताछ का केंद्र CBI का दिल्ली मुख्यालय है। रिमांड अवधि पूरी होने के बाद सौरभ को 12 नवंबर को दोबारा रायपुर की विशेष अदालत में पेश करना होगा।
ओमान से प्रत्यर्पण के बाद भारत लाया गया आरोपी
सौरभ चंद्राकर लंबे समय से विदेश में रह रहा था। भारतीय जांच एजेंसियां महादेव सट्टा ऐप मामले में उसकी तलाश कर रही थीं। उसके खिलाफ जांच और कानूनी कार्रवाई के बाद उसे ओमान से भारत लाने की प्रक्रिया पूरी हुई।
CBI ने दूसरी केंद्रीय एजेंसियों के सहयोग से उसका प्रत्यर्पण कराया। इसके बाद 2 नवंबर को दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत ने उसे रायपुर ले जाने के लिए दो दिन की ट्रांजिट रिमांड मंजूर की थी।
इसके बाद CBI की टीम उसे रायपुर लेकर पहुंची। 4 नवंबर को विशेष अदालत में पेशी हुई और जांच एजेंसी को आठ दिनों की कस्टडी मिल गई।
यह कार्रवाई इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि विदेश में बैठकर कथित तौर पर संचालित किए जा रहे नेटवर्क की जांच में आरोपी से सीधे पूछताछ का अवसर मिला है।
दिल्ली मुख्यालय में किन सवालों के जवाब तलाशेगी CBI?
जांच एजेंसी के सामने सबसे बड़ा सवाल महादेव ऐप के पूरे संचालन तंत्र को समझना है। CBI यह पता लगाना चाहती है कि ऑनलाइन सट्टेबाजी का नेटवर्क किस तरह काम करता था।
इसके अलावा, एजेंसी कथित आर्थिक लेनदेन और इससे जुड़े दूसरे लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
पूछताछ में मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर जानकारी जुटाई जा सकती है:
- महादेव ऑनलाइन ऐप का संचालन कैसे होता था?
- अलग-अलग राज्यों में सट्टेबाजी के पैनल कौन चलाता था?
- कथित नेटवर्क से जुड़ी रकम किन बैंक खातों में पहुंचती थी?
- विदेशों में पैसे भेजने के लिए किन माध्यमों का इस्तेमाल हुआ?
- सट्टेबाजी से जुड़े आर्थिक लेनदेन में किन लोगों की भूमिका थी?
- नेटवर्क को संरक्षण देने के आरोपों की सच्चाई क्या है?
CBI इन सवालों के जरिए पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने की कोशिश कर रही है। हालांकि, पूछताछ में सामने आने वाली जानकारी और आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
करीब 6 हजार करोड़ रुपये का कथित घोटाला
महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामला लगभग 6 हजार करोड़ रुपये के कथित घोटाले से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी जांच में अपराध से अर्जित रकम का अनुमान करीब 6 हजार करोड़ रुपये लगाया है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, महादेव ऑनलाइन बुक के जरिए क्रिकेट, फुटबॉल और दूसरे खेलों पर ऑनलाइन सट्टेबाजी कराई जाती थी। इसके लिए अलग-अलग पैनल और शाखाओं का नेटवर्क बनाया गया था।
आरोप है कि इस व्यवस्था के जरिए देश के अलग-अलग हिस्सों में ग्राहकों को जोड़ा गया। इसके बाद सट्टेबाजी से मिलने वाली रकम को कई बैंक खातों के माध्यम से आगे भेजा जाता था।
CBI का आरोप है कि इस नेटवर्क में बड़ी संख्या में बैंक खातों का इस्तेमाल हुआ। इन खातों के जरिए कथित अवैध कमाई को अलग-अलग लेनदेन के माध्यम से विदेश भेजा गया।
हालांकि, 6 हजार करोड़ रुपये का आंकड़ा जांच एजेंसी के अनुमान से जुड़ा है। इसे अदालत में साबित हो चुके अंतिम नुकसान के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
रवि उप्पल और दूसरे सहयोगियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
सौरभ चंद्राकर के साथ रवि उप्पल का नाम भी इस मामले में प्रमुखता से सामने आया है। दोनों को महादेव ऑनलाइन बुक ऐप का प्रमोटर और सह-संस्थापक बताया जाता है।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि दोनों ने मिलकर ऑनलाइन सट्टेबाजी का बड़ा नेटवर्क तैयार किया था। इस नेटवर्क का संचालन विदेश से किया जाता था। दुबई को कथित तौर पर इसका प्रमुख संचालन केंद्र बताया गया है।
CBI अब यह समझने की कोशिश कर रही है कि सौरभ और रवि उप्पल के बीच जिम्मेदारियों का बंटवारा किस तरह होता था। साथ ही, दूसरे सहयोगियों और पैनल संचालकों की भूमिका भी जांच का हिस्सा है।
एजेंसी को यह भी पता लगाना है कि नेटवर्क में पैसा लगाने वाले, खाते उपलब्ध कराने वाले और रकम को आगे पहुंचाने वाले लोग कौन थे। पूछताछ से इन कड़ियों को समझने में मदद मिल सकती है।
बचाव पक्ष ने प्रत्यर्पण की प्रक्रिया पर उठाए सवाल
अदालत में सुनवाई के दौरान सौरभ चंद्राकर के वकील ने उसकी गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को लेकर कानूनी सवाल उठाए। बचाव पक्ष का कहना है कि सौरभ का प्रत्यर्पण ED के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हुआ है।
वकील के अनुसार, अब CBI उससे दूसरे मामले में पूछताछ करना चाहती है। ऐसे में प्रत्यर्पण की शर्तों और अंतरराष्ट्रीय कानूनी नियमों का सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है।
बचाव पक्ष ने इस मामले में आगे कानूनी आपत्ति दर्ज कराने की बात कही है। हालांकि, अदालत ने फिलहाल CBI को आठ दिनों की रिमांड दे दी है।
वहीं, बचाव पक्ष ने कुछ शर्तें भी रखी थीं। अदालत ने आरोपी को अपने वकीलों और परिवार के सदस्यों से मिलने की अनुमति दी है। साथ ही, पूछताछ CCTV कैमरों की निगरानी में करने की शर्त भी रखी गई है।
ED भी कर रही है मनी लॉन्ड्रिंग की जांच
महादेव सट्टा ऐप मामले की जांच केवल CBI तक सीमित नहीं है। प्रवर्तन निदेशालय भी कथित मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध कमाई से जुड़ी गतिविधियों की जांच कर रहा है।
ED ने इस मामले में कई संपत्तियों को अटैच करने की कार्रवाई की है। एजेंसी का आरोप है कि सट्टेबाजी से प्राप्त रकम को अलग-अलग माध्यमों से छिपाया और विदेश भेजा गया।
इसके अलावा, कथित तौर पर सरकारी अधिकारियों को संरक्षण राशि देने के आरोप भी जांच का हिस्सा रहे हैं। इन आरोपों के जरिए एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि नेटवर्क को किस तरह मदद मिलती थी।
इस मामले में कई राजनीतिक नेताओं और अधिकारियों के नाम भी अलग-अलग जांच और बयानों में सामने आए हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति के खिलाफ लगाए गए आरोप को दोष साबित होने के बराबर नहीं माना जा सकता।
12 नवंबर को फिर अदालत में होगी पेशी
सौरभ चंद्राकर की आठ दिनों की CBI रिमांड अब जांच का महत्वपूर्ण चरण है। इस दौरान एजेंसी उसके बयान और दूसरे उपलब्ध सबूतों के आधार पर पूछताछ करेगी।
रिमांड की अवधि पूरी होने के बाद 12 नवंबर को उसे रायपुर की विशेष अदालत में पेश किया जाना है। इसके बाद अदालत तय करेगी कि आगे की कानूनी प्रक्रिया क्या होगी।
वहीं, ED की ओर से भी आरोपी की कस्टडी को लेकर आवेदन दिया गया है। ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों जांच एजेंसियों की कार्रवाई महत्वपूर्ण रहेगी।
फिलहाल, सबसे बड़ा सवाल यही है कि पूछताछ में महादेव ऐप के कथित नेटवर्क और आर्थिक लेनदेन से जुड़े कितने नए तथ्य सामने आते हैं।
निष्कर्ष
महादेव सट्टा ऐप मामले में सौरभ चंद्राकर की गिरफ्तारी और 8 दिन की CBI रिमांड जांच एजेंसियों के लिए अहम घटनाक्रम है। ओमान से प्रत्यर्पण के बाद अब दिल्ली मुख्यालय में उससे पूछताछ की जा रही है।
जांच का मुख्य उद्देश्य कथित सट्टेबाजी नेटवर्क, आर्थिक लेनदेन और इससे जुड़े दूसरे लोगों की भूमिका का पता लगाना है। अब 12 नवंबर की अदालत में पेशी और पूछताछ के नतीजों पर सबकी नजर रहेगी।

