भारतीय हॉकी टीम ने फिर रचा इतिहास! जापान को 4-1 से हराकर छठी बार बनी एशियन चैंपियन
भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने एक बार फिर एशियाई हॉकी में अपना दबदबा साबित कर दिया है। भारत ने एशियन चैंपियंस ट्रॉफी 2026 के फाइनल मुकाबले में जापान को 4-1 से हराकर छठी बार खिताब अपने नाम किया। पंजाब के मोहाली में खेले गए इस मुकाबले में भारतीय टीम ने शुरुआती झटके से वापसी करते हुए शानदार जीत दर्ज की। इस जीत के साथ भारत ने लगातार तीसरी बार एशियन चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया।
भारतीय टीम ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया और एक भी मुकाबला नहीं गंवाया। कप्तान हरमनप्रीत सिंह की अगुवाई में टीम ने सातों मुकाबले जीतकर चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। फाइनल में जापान ने शुरुआत में बढ़त बनाई, लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने दूसरे हाफ में मुकाबले का रुख पूरी तरह बदल दिया।
जापान ने तीसरे मिनट में किया पहला गोल
मोहाली के ओलंपियन बलबीर सिंह सीनियर इंटरनेशनल हॉकी स्टेडियम में 5 नवंबर को भारत और जापान के बीच फाइनल मुकाबला खेला गया। घरेलू दर्शकों के सामने उतरी भारतीय टीम से शुरुआत से ही अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद थी।
हालांकि, मैच के तीसरे मिनट में जापान ने भारतीय टीम को चौंका दिया। जापान के काजुमासा मात्सुमोतो ने शानदार बैकहैंड शॉट लगाकर गोल किया और अपनी टीम को 1-0 की बढ़त दिला दी।
इसके बाद भारतीय खिलाड़ियों ने बराबरी करने के लिए लगातार हमले किए। भारत को गोल करने के कई मौके मिले, लेकिन जापान की मजबूत रक्षापंक्ति और गोलकीपर किशो कुरोदा ने शुरुआती दो क्वार्टर में भारतीय हमलों को रोक दिया।
पहले हाफ के समाप्त होने तक जापान 1-0 से आगे था। भारतीय टीम ने गेंद पर बेहतर नियंत्रण के बावजूद गोल करने में सफलता हासिल नहीं की थी।
तीसरे क्वार्टर में शिलानंद लाकड़ा ने दिलाई बराबरी
दूसरे हाफ में भारतीय टीम ने अपनी रणनीति बदली और जापान के डिफेंस पर दबाव बढ़ाया। भारतीय खिलाड़ियों ने तेज पासिंग और लगातार हमलों के जरिए गोल करने के अवसर बनाए।
मैच के 42वें मिनट में भारत को सफलता मिली। शिलानंद लाकड़ा ने पेनल्टी कॉर्नर से बने मौके पर शानदार गोल करके स्कोर 1-1 कर दिया।
इस गोल के बाद भारतीय टीम का आत्मविश्वास बढ़ गया। अब मुकाबला बराबरी पर था और भारतीय खिलाड़ियों ने जापान को संभलने का मौका नहीं दिया।
शिलानंद का यह गोल फाइनल का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। इसके बाद भारत ने आक्रामक खेल जारी रखा और अंतिम क्वार्टर में लगातार गोल दागकर मुकाबले पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली।
आखिरी क्वार्टर में भारत ने दागे तीन गोल
मैच के अंतिम क्वार्टर में भारतीय हॉकी टीम ने शानदार प्रदर्शन किया। 48वें मिनट के आसपास दिलप्रीत सिंह ने गोल करके भारत को 2-1 की बढ़त दिला दी।
इसके बाद जापान पर दबाव और बढ़ गया। भारतीय खिलाड़ियों ने तेजी से हमले जारी रखे और जापान की रक्षापंक्ति को लगातार चुनौती दी।
53वें मिनट में जुगराज सिंह ने पेनल्टी कॉर्नर पर शानदार ड्रैग फ्लिक लगाकर भारत का स्कोर 3-1 कर दिया। उनका यह गोल बेहद महत्वपूर्ण रहा।
इसके ठीक अगले मिनट में विवेक सागर प्रसाद ने गोल करके भारत की बढ़त 4-1 कर दी। इस गोल के बाद भारतीय टीम की जीत लगभग तय हो गई।
अंतिम सीटी बजते ही खिलाड़ियों और दर्शकों ने जीत का जश्न मनाया। भारत ने जापान को 4-1 से हराकर छठी बार एशियन चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब जीत लिया।
भारत ने लगातार तीसरी बार जीता खिताब
इस जीत के साथ भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने लगातार तीसरी बार एशियन चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब अपने नाम किया।
भारत ने इससे पहले 2023 और 2024 में भी यह ट्रॉफी जीती थी। अब 2026 में जापान को हराकर टीम ने खिताबी हैट्रिक पूरी कर ली है।
भारत अब तक छह बार इस प्रतियोगिता का चैंपियन बन चुका है। टीम ने 2011, 2016, 2018, 2023, 2024 और 2026 में खिताब जीते हैं। वर्ष 2018 में भारत संयुक्त विजेता रहा था।
इस उपलब्धि के साथ भारत एशियन चैंपियंस ट्रॉफी के इतिहास में सबसे ज्यादा खिताब जीतने वाली टीम बना हुआ है।
सातों मुकाबले जीतकर भारत बना चैंपियन
भारतीय टीम का पूरे टूर्नामेंट में प्रदर्शन शानदार रहा। टीम ने शुरुआत से ही विरोधियों पर दबाव बनाए रखा।
भारत ने अपने अभियान की शुरुआत बांग्लादेश को 13-0 से हराकर की थी। इसके बाद चीन को 5-2 से मात दी।
भारतीय टीम ने जापान, मलेशिया और दक्षिण कोरिया के खिलाफ भी जीत दर्ज की। सेमीफाइनल में भारत ने दक्षिण कोरिया को 8-1 से हराकर फाइनल में जगह बनाई।
इसके बाद खिताबी मुकाबले में जापान को 4-1 से हराकर भारत ने अपना अभियान समाप्त किया।
इस तरह भारतीय टीम ने सात मैचों में सात जीत दर्ज की और पूरे टूर्नामेंट में अजेय रही।
हरमनप्रीत सिंह की कप्तानी में टीम का शानदार प्रदर्शन
इस ऐतिहासिक जीत में कप्तान हरमनप्रीत सिंह की भूमिका महत्वपूर्ण रही। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में टीम का नेतृत्व किया और खिलाड़ियों को एकजुट रखा।
फाइनल मुकाबले में भी भारतीय खिलाड़ियों ने दबाव की स्थिति में धैर्य बनाए रखा। शुरुआती गोल खाने के बावजूद टीम ने अपनी रणनीति नहीं छोड़ी।
हार्दिक सिंह, अमित रोहिदास, शिलानंद लाकड़ा और गोलकीपर कृष्ण बहादुर पाठक ने भी टीम के प्रदर्शन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
हार्दिक सिंह के लिए यह मुकाबला व्यक्तिगत रूप से भी खास रहा। उन्होंने जापान के खिलाफ अपना 200वां अंतरराष्ट्रीय मुकाबला खेला।
वहीं, हरमनप्रीत सिंह को टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन के लिए हीरो ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया। उन्होंने प्रतियोगिता में कुल 10 गोल किए और अपने अंतरराष्ट्रीय करियर के 250 गोल भी पूरे किए।
गोलकीपर कृष्ण बहादुर पाठक को टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ गोलकीपर चुना गया।
शिलानंद लाकड़ा के लिए यादगार रहा फाइनल
फाइनल मुकाबला शिलानंद लाकड़ा के लिए भी खास रहा। उन्होंने जापान के खिलाफ बराबरी का गोल करके भारतीय टीम की वापसी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
टूर्नामेंट शुरू होने से पहले शिलानंद ने अंतरराष्ट्रीय हॉकी से संन्यास लेने की घोषणा की थी। ऐसे में उनका यह मुकाबला भारतीय टीम के साथ आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच भी रहा।
उन्होंने अपने अंतिम मुकाबले में गोल करके टीम की जीत में योगदान दिया। इस तरह उनका अंतरराष्ट्रीय करियर एक यादगार प्रदर्शन के साथ समाप्त हुआ।
जापान को फिर मिली फाइनल में निराशा
जापान ने फाइनल मुकाबले में अच्छी शुरुआत की थी। टीम ने तीसरे मिनट में गोल करके भारत पर दबाव बना दिया था।
हालांकि, भारतीय टीम की आक्रामक रणनीति के सामने जापान दूसरे हाफ में अपनी बढ़त बरकरार नहीं रख सका।
जापान की टीम तीसरी बार एशियन चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में पहुंची थी, लेकिन उसे पहली बार खिताब जीतने का मौका नहीं मिला।
इससे पहले भी भारत ने लीग चरण में जापान को 4-1 से हराया था। फाइनल में भी भारतीय टीम ने इसी अंतर से जीत दर्ज की।
पंजाब में हॉकी का शानदार आयोजन
एशियन चैंपियंस ट्रॉफी 2026 के नॉकआउट मुकाबले मोहाली में आयोजित किए गए। वहीं, टूर्नामेंट के लीग चरण के मुकाबले जालंधर के ओलंपियन सुरजीत हॉकी स्टेडियम में खेले गए।
मोहाली में फाइनल मुकाबले के दौरान बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद रहे। घरेलू मैदान पर भारतीय टीम का समर्थन करने के लिए दर्शकों ने स्टेडियम में पहुंचकर खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया।
पंजाब में अंतरराष्ट्रीय हॉकी की वापसी और दर्शकों की मौजूदगी ने इस प्रतियोगिता को खास बना दिया। फाइनल में भारत की जीत के बाद स्टेडियम में जश्न का माहौल देखने को मिला।
निष्कर्ष
भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने जापान को 4-1 से हराकर एशियन चैंपियंस ट्रॉफी 2026 का खिताब जीत लिया है। यह भारत का इस प्रतियोगिता में छठा खिताब है। इसके साथ ही टीम ने लगातार तीसरी बार चैंपियन बनकर ऐतिहासिक हैट्रिक पूरी की।
हरमनप्रीत सिंह की कप्तानी में भारत ने सातों मुकाबले जीतकर अपना अभियान अजेय समाप्त किया। शिलानंद लाकड़ा, दिलप्रीत सिंह, जुगराज सिंह और विवेक सागर प्रसाद के गोल ने फाइनल में जीत सुनिश्चित की। अब भारतीय हॉकी प्रशंसकों की नजरें टीम के आगामी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों पर रहेंगी।

