बिना मोबाइल टावर के सीधे फोन में पहुंचेगा नेटवर्क! TRAI ने सैटेलाइट D2D सेवा का रास्ता किया साफ
भारत में मोबाइल नेटवर्क की दुनिया में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। अब दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को मोबाइल नेटवर्क के लिए केवल टावरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने सैटेलाइट Direct-to-Device यानी D2D सर्विस के लिए नए नियमों की सिफारिश की है। इस तकनीक के जरिए भविष्य में स्मार्टफोन सीधे सैटेलाइट से कनेक्ट हो सकेंगे।
TRAI ने 5 नवंबर 2026 को अपनी सिफारिशें दूरसंचार विभाग (DoT) को भेजी हैं। इसमें सैटेलाइट नेटवर्क कंपनियों के लिए अलग प्राधिकरण व्यवस्था बनाने और मोबाइल फोन तक सीधे सैटेलाइट कनेक्टिविटी पहुंचाने का प्रस्ताव शामिल है। हालांकि, यह सेवा अभी भारत में व्यावसायिक रूप से शुरू नहीं हुई है। इसके लिए सरकार की अंतिम मंजूरी और जरूरी तकनीकी व्यवस्थाएं पूरी होनी बाकी हैं।
क्या है सैटेलाइट Direct-to-Device तकनीक?
सैटेलाइट Direct-to-Device यानी D2D एक ऐसी तकनीक है, जिसके जरिए मोबाइल फोन सीधे अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट से संपर्क कर सकता है। सामान्य मोबाइल नेटवर्क में फोन से सिग्नल पहले मोबाइल टावर तक पहुंचता है। इसके बाद नेटवर्क के माध्यम से कॉल और इंटरनेट की सुविधा मिलती है।
लेकिन D2D तकनीक में सैटेलाइट और मोबाइल डिवाइस के बीच सीधा संपर्क स्थापित किया जा सकता है। इसका फायदा उन क्षेत्रों में मिल सकता है, जहां मोबाइल टावर नहीं हैं या सामान्य नेटवर्क की पहुंच बेहद कमजोर है।
उदाहरण के तौर पर पहाड़ी इलाकों, जंगलों, समुद्री क्षेत्रों और दूरदराज के गांवों में रहने वाले लोगों को इस तकनीक से बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकती है।
हालांकि, इसके लिए मोबाइल फोन का तकनीकी रूप से अनुकूल होना जरूरी होगा। हर मौजूदा स्मार्टफोन अपने आप सैटेलाइट से कनेक्ट नहीं हो पाएगा।
TRAI ने D2D सेवा के लिए क्या सिफारिश की?
TRAI ने सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेक्टर के लिए एक नई व्यवस्था प्रस्तावित की है। इसके तहत Satellite Communication Network Provider Authorisation नाम की अलग श्रेणी बनाई जाएगी।
इस व्यवस्था में अधिकृत कंपनियां अपना सैटेलाइट नेटवर्क तैयार करेंगी और टेलीकॉम कंपनियों को नेटवर्क क्षमता उपलब्ध कराएंगी।
इसे Satellite Communication Network as a Service यानी SCNaaS कहा गया है।
इसका मतलब है कि सैटेलाइट कंपनियां नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराएंगी, जबकि ग्राहकों को मोबाइल और संचार सेवाएं देने का काम अधिकृत टेलीकॉम कंपनियां करेंगी।
TRAI की सिफारिश के अनुसार, इस नए प्राधिकरण के तहत सैटेलाइट नेटवर्क प्रदाता सीधे ग्राहकों को टेलीकॉम सेवाएं नहीं बेच सकेंगे।
प्रस्तावित प्राधिकरण पूरे देश के लिए होगा। इसकी अवधि अधिकतम 20 साल रखने और आगे 20 साल तक नवीनीकरण का विकल्प देने की सिफारिश की गई है।
D2D सर्विस के लिए दो तकनीकी मॉडल प्रस्तावित
TRAI ने भारत में सैटेलाइट से स्मार्टफोन कनेक्टिविटी के लिए दो अलग-अलग मॉडल प्रस्तावित किए हैं।
1. MSS आधारित D2D सेवा
पहले मॉडल में Mobile Satellite Service यानी MSS स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल होगा। इसके तहत L-बैंड और S-बैंड की सैटेलाइट फ्रीक्वेंसी के जरिए मोबाइल फोन सीधे सैटेलाइट से जुड़ सकेंगे।
इसके लिए स्मार्टफोन में संबंधित सैटेलाइट फ्रीक्वेंसी को सपोर्ट करने वाले तकनीकी मॉड्यूल की जरूरत होगी।
TRAI ने सरकार को सुझाव दिया है कि भविष्य में भारत में बिकने वाले स्मार्टफोन में इन फ्रीक्वेंसी को सपोर्ट करने वाली तकनीक शामिल करने के लिए निर्माताओं को प्रोत्साहित किया जाए।
2. IMT स्पेक्ट्रम आधारित D2D सेवा
दूसरे मॉडल में पहले से टेलीकॉम कंपनियों को आवंटित मोबाइल स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल किया जाएगा।
इसके तहत सैटेलाइट नेटवर्क मोबाइल ऑपरेटरों के साथ साझेदारी करके स्मार्टफोन तक कनेक्टिविटी पहुंचा सकेंगे।
TRAI ने इसके लिए 600 MHz, 700 MHz, 800 MHz, 900 MHz, 1800 MHz और 2100 MHz बैंड के इस्तेमाल की सिफारिश की है।
इस मॉडल में टेलीकॉम कंपनियों के पास मौजूद स्पेक्ट्रम अधिकार उन्हीं के पास रहेंगे। सेवा शुरू करने के लिए जरूरी साझेदारी और तकनीकी शर्तें पूरी करनी होंगी।
पहाड़ों और गांवों में रहने वालों को मिलेगा फायदा
भारत में आज भी कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां मोबाइल नेटवर्क की पहुंच सीमित है। पहाड़ी इलाकों में भौगोलिक परिस्थितियों के कारण मोबाइल टावर लगाना मुश्किल और महंगा होता है।
कई गांवों में नेटवर्क की समस्या के कारण लोगों को फोन करने या इंटरनेट इस्तेमाल करने के लिए ऊंचे स्थानों पर जाना पड़ता है।
सैटेलाइट D2D तकनीक ऐसी समस्याओं को कम करने में मदद कर सकती है।
इसके प्रमुख संभावित फायदे हैं:
- दूरदराज के क्षेत्रों में कनेक्टिविटी: जहां मोबाइल टावर नहीं हैं, वहां सैटेलाइट के जरिए नेटवर्क पहुंचाने की संभावना बढ़ेगी।
- आपदा के समय मदद: भूकंप, बाढ़ और अन्य आपदाओं में सामान्य नेटवर्क प्रभावित होने पर वैकल्पिक संचार सुविधा मिल सकती है।
- यात्रियों को सुविधा: पहाड़ों, जंगलों और दूरस्थ यात्रा मार्गों पर कनेक्टिविटी बेहतर हो सकती है।
- ग्रामीण क्षेत्रों को लाभ: कमजोर मोबाइल नेटवर्क वाले इलाकों में संचार सुविधाओं का विस्तार किया जा सकेगा।
- टेलीकॉम नेटवर्क का विस्तार: कंपनियां सैटेलाइट और पारंपरिक मोबाइल नेटवर्क को मिलाकर सेवाएं उपलब्ध करा सकेंगी।
हालांकि, इन सुविधाओं की वास्तविक उपलब्धता तकनीक, सैटेलाइट कवरेज और सेवा प्रदाताओं की योजनाओं पर निर्भर करेगी।
Starlink, Jio और Airtel जैसी कंपनियों को मिलेगा अवसर
TRAI की नई सिफारिशों से भारत के सैटेलाइट कम्युनिकेशन बाजार में कई कंपनियों के लिए अवसर बन सकते हैं।
इनमें एलन मस्क की Starlink, Eutelsat OneWeb और अन्य सैटेलाइट नेटवर्क कंपनियां शामिल हैं।
वहीं, Reliance Jio, Bharti Airtel और Vodafone Idea जैसी टेलीकॉम कंपनियां भी सैटेलाइट नेटवर्क प्रदाताओं के साथ साझेदारी कर सकती हैं।
इस व्यवस्था में सैटेलाइट कंपनियां नेटवर्क क्षमता उपलब्ध कराएंगी। इसके बाद अधिकृत टेलीकॉम ऑपरेटर अपने ग्राहकों को संबंधित सेवाएं दे सकेंगे।
इससे पारंपरिक मोबाइल नेटवर्क और सैटेलाइट नेटवर्क के बीच सहयोग बढ़ने की संभावना है।
हालांकि, किसी कंपनी को भारत में D2D सेवा शुरू करने का स्वतः अधिकार नहीं मिलेगा। इसके लिए निर्धारित लाइसेंस, सुरक्षा शर्तें और तकनीकी मंजूरी जरूरी होगी।
क्या मौजूदा मोबाइल फोन में भी चलेगा सैटेलाइट नेटवर्क?
यह सवाल सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। अगर आपके पास अभी 4G या 5G स्मार्टफोन है, तो जरूरी नहीं कि वह सीधे सैटेलाइट से कनेक्ट हो सके।
D2D तकनीक के लिए फोन में संबंधित फ्रीक्वेंसी और नेटवर्क तकनीक का समर्थन होना जरूरी है।
MSS आधारित सेवा के लिए TRAI ने भविष्य के स्मार्टफोन में आवश्यक मॉड्यूल शामिल करने का सुझाव दिया है।
वहीं, IMT आधारित सेवा में टेलीकॉम कंपनियों के मौजूदा मोबाइल स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल प्रस्तावित है। इसमें भी फोन, सैटेलाइट और नेटवर्क के बीच तकनीकी अनुकूलता जरूरी होगी।
इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि TRAI की सिफारिश के बाद सभी पुराने मोबाइल फोन में तुरंत सैटेलाइट नेटवर्क चलने लगेगा।
अभी सरकार की अंतिम मंजूरी का इंतजार
TRAI ने अपनी सिफारिशें दूरसंचार विभाग को भेज दी हैं। अब केंद्र सरकार इन प्रस्तावों पर विचार करेगी और आगे की व्यवस्था तय करेगी।
प्रस्ताव के अनुसार, IMT आधारित D2D सेवाओं को 2027 के विश्व रेडियो संचार सम्मेलन (WRC-27) के नतीजों का इंतजार किए बिना कुछ शर्तों के साथ अनुमति देने की सिफारिश की गई है।
इन सेवाओं को इस आधार पर संचालित करने का प्रस्ताव है कि दूसरे मौजूदा नेटवर्क और संचार सेवाओं में कोई हानिकारक हस्तक्षेप न हो।
इसके अलावा सैटेलाइट नेटवर्क प्रदाताओं को सुरक्षा, तकनीकी और परिचालन संबंधी शर्तें पूरी करनी होंगी।
इसका मतलब है कि भारत में सैटेलाइट से सीधे मोबाइल फोन कनेक्टिविटी की दिशा में नीतिगत कदम उठाया गया है, लेकिन आम ग्राहकों को सेवा मिलने में अभी समय लग सकता है।
निष्कर्ष
TRAI की सैटेलाइट D2D सर्विस से जुड़ी सिफारिशें भारत के दूरसंचार क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव का रास्ता खोल सकती हैं। इस तकनीक के जरिए भविष्य में स्मार्टफोन सीधे सैटेलाइट से कनेक्ट हो सकेंगे और मोबाइल टावरों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
Starlink, Jio और Airtel जैसी कंपनियों के लिए भी नए अवसर बन सकते हैं। हालांकि, फिलहाल यह प्रस्तावित व्यवस्था है और अंतिम मंजूरी केंद्र सरकार को देनी है। आने वाले समय में यह तकनीक ग्रामीण क्षेत्रों, पहाड़ी इलाकों और आपदा प्रभावित स्थानों में संचार सुविधाओं को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

