दिल्ली विधानसभा में सीएजी की रिपोर्ट पेश की गयी, जिसमे पिछली आप सरकार की शराब नीति सहित विभिन्न सरकारी कामों का मूल्याङ्कन पेश किये गए
आज मंगलवार को दिल्ली विधानसभा में सीएजी की रिपोर्ट प्रस्तुत की गयी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सदन के सामने यह रिपोर्ट रखी। इस रिपोर्ट में पिछली आम आदमी पार्टी सरकार की शराब नीति सहित विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों और पहलों का मूल्यांकन किया गया।
इन रिपोर्ट में मुख्यमंत्री निवास के नवीनीकरण और मोहल्ला क्लिनिक से सम्बंधित मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया गया। मुख्यमंत्री निवास नवीनीकरण में अनुमानित लागत से अधिक खर्च और प्रक्रियागत अनियमितताओं की बात सामने आयी है। साथ ही मोहल्ला क्लिनिक में बुनियादी उपकरणों की कमी और अपर्याप्त निरिक्षण जैसी समस्याओं की पहचान की गयी।
दिल्ली के उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना ने पहले की आप सरकार द्वारा सीएजी रिपोर्टों को समय पर प्रस्तुत न करने पर चिंता व्यक्त की थी, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठे थे।
शराब नीति पर सीएजी की रिपोर्ट
सीएजी की रिपोर्ट में 2021-22 की नई आबकारी नीति में गंभीर खामियों और अनियमितताओं की पहचान की गयी है। जिससे दिल्ली सरकार को लगभग 2026.91 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हुआ। रिपोर्ट में लाइसेंस जारी करने में अनियमितताऐं, मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता की कमी और गुणवत्ता नियंत्रण में कमजोरियों का उल्लेख है। विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों की अनदेखी करते हुए, नीति में निजी संस्थाओं को थोक लाइसेंस प्रदान किये गए। जिससे शराब आपूर्ति श्रंखला में एकाधिकार और कर्तलन की स्थितियां उत्पन्न हुईं।
सीएम निवास के नवीनीकरण पर सीएजी रिपोर्ट
रिपोर्ट में 6, फ्लैग स्टाफ रोड स्थित मुख्यमंत्री आवास के नवीनीकरण में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा किया गया। प्रारम्भिक अनुमानित लागत 7.91 करोड़ रुपये थी। लेकिन अंतिम खर्च 33.66 करोड़ रुपये तक पहुँच गया। जोकि 342.31 प्रतिशत की वृद्धि है। नवीनीकरण के दौरान निवास का क्षेत्रफल 1397 वर्ग मीटर से बढ़ाकर 1905 वर्ग मीटर कर दिया गया और उच्च गुणवत्ता वाली सामिग्री और सजावटी तत्वों का उपयोग किया गया। इसके अलावा समिति निविदा प्रक्रिया के माध्यम से ठेके आवंटित किये गए। जिसमे पारदर्शिता की कमी पायी गयी।
मोहल्ला क्लिनिक पर सीएजी की रिपोर्ट
सीएजी की रिपोर्ट में मोहल्ला क्लिनिक की स्थापना और संचालन में कई खामियों की पहचान की गयी। 2016 से 2023 के बीच 1000 क्लीनिकों के लक्ष्य के मुकाबले केवल 523 क्लिनिक स्थापित किये गए। कई क्लीनिकों में बुनियादी चिकित्सा उपकरणों में कमी पायी गयी। इसके साथ ही 70% मरीजों को डॉक्टर से एक मिनट से भी कम समय की परामर्श मिली। निरिक्षण में कमी और अपर्याप्त धन उपयोग भी रिपोर्ट में उजागर किये गए हैं।

