बिहार में सनातन महाकुंभ के बाद गरमाई सियासत, धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर कांग्रेस नेता उदित राज का कड़ा प्रहार
बिहार की राजधानी पटना में आयोजित सनातन महाकुंभ में शामिल हुए बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बयान के बाद सियासी माहौल गरमा गया है। धीरेंद्र शास्त्री ने इस कार्यक्रम के मंच से दावा किया कि बिहार देश का पहला हिंदू राज्य बनेगा। उनके इस बयान ने राजनीतिक हलकों में बहस छेड़ दी है।
धीरेंद्र शास्त्री ने अपने भाषण में कहा कि सनातन धर्म खतरे में नहीं है, लेकिन बार-बार उस पर हमला किया जा रहा है। उन्होंने हिंदू समाज से आग्रह किया कि वह एकजुट होकर सनातन धर्म की रक्षा करे। उनका कहना था कि हिंदुओं को संगठित होकर ही अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को बचाना होगा।
लेकिन धीरेंद्र शास्त्री के इस बयान पर कांग्रेस नेता और पूर्व सांसद डॉ. उदित राज ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने न सिर्फ धीरेंद्र शास्त्री की नीयत पर सवाल उठाए, बल्कि हिंदू समाज में व्याप्त जातिगत भेदभाव को लेकर भी गंभीर टिप्पणी की।
उदित राज का पलटवार: “क्या ब्राह्मण होकर भी खुद हिंदू हैं?”
उदित राज ने एक वीडियो बयान में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि “धीरेंद्र शास्त्री सबको हिंदू बनाने की बात करते हैं, लेकिन क्या वे स्वयं अपने समाज के भीतर होने वाले भेदभाव और पीड़ा को समझते हैं?” उन्होंने सवाल उठाया कि जो लोग खुद को समाज में सबसे ऊंचा मानते हैं, क्या वे कभी उन दलितों की हालत समझ पाएंगे जिन्हें आज भी समाज के एक कोने में धकेल दिया गया है?
उन्होंने कहा, “आज भी कई लोगों को घोड़ी पर चढ़ने से रोका जाता है, गांव के बाहर बसाया जाता है, उन्हें मंदिरों में प्रवेश नहीं करने दिया जाता, उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया जाता है — क्या धीरेंद्र शास्त्री इन सच्चाइयों से वाकिफ हैं? या फिर सिर्फ मंच से भाषण देकर सनातन की रक्षा का ढोंग कर रहे हैं?”
“धूर्तता से नहीं चलेगा काम” – उदित राज की दो टूक
उदित राज ने अपने बयान में तीखा लहजा अपनाते हुए कहा, “धूर्तता से अब काम नहीं चलेगा। अगर सच में सबको एक समान हिंदू बनाना है, तो सबसे पहले जातिवाद का खात्मा जरूरी है। आप लाखों की भीड़ इकट्ठा करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी उन कार्यक्रमों में अंतर्जातीय विवाह को बढ़ावा देने की बात की? अगर हिम्मत है, तो अपने मंच से इस अभियान की शुरुआत कीजिए।”
उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों ने समाज को जातियों में बांटकर “बटवा-ए-हिंद” बनाया, आज वही लोग “भगवा-ए-हिंद” की बात कर रहे हैं। उदित राज के अनुसार, जब तक समाज में समानता नहीं होगी, तब तक ऐसा कोई एक हिंदू राष्ट्र नहीं बन सकता, जो समता और न्याय के सिद्धांतों पर खरा उतर सके।
“गजवा–ए–हिंद की जड़ें समाज के भीतर के भेदभाव में“
कांग्रेस नेता ने यह भी लिखा कि “गजवा-ए-हिंद जैसी सोच की शुरुआत उस समय हुई जब दलितों और पिछड़ों को बराबरी का हक नहीं मिला। उन्होंने पूछा कि क्या उनके साथ हो रहा सामाजिक अन्याय मुस्लिमों या ईसाइयों ने किया? जब समाज के एक वर्ग को हमेशा हीन दृष्टि से देखा जाएगा, तो वह कैसे खुद को उस धर्म का हिस्सा महसूस करेगा जिसमें उसे हीन समझा जाए?”
उदित राज ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा, “अगर आप वाकई में हिंदू एकता चाहते हैं, तो सबसे पहले ब्राह्मणवाद और जातिगत श्रेष्ठता के ढांचे को तोड़ना होगा। सिर्फ धर्म के नाम पर लोगों को जोड़ना, लेकिन उन्हें बराबरी न देना, एक धोखा है।”
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के “बिहार पहला हिंदू राज्य बनेगा” वाले बयान ने जहां धार्मिक भावनाओं को प्रभावित किया, वहीं उदित राज ने समाज में मौजूद वास्तविक विषमता की ओर ध्यान दिलाया। यह विवाद अब केवल धार्मिक दायरे में नहीं रह गया है, बल्कि यह सामाजिक और राजनीतिक विमर्श का विषय बन चुका है। देखना होगा कि इस बहस का अंत किस दिशा में होता है — क्या यह समाज में बदलाव का जरिया बनेगा या सिर्फ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सिमटकर रह जाएगा।

