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UNSC में जयशंकर ने पेश की भारत की दावेदारी, संयुक्त राष्ट्र सुधारों पर दिया जोर

"विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी पेश की और वैश्विक सुधारों की मांग की - News Critic।"
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विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी को एक बार फिर मजबूती से रखा। उन्होंने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों में आए बदलावों को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र की संस्थाओं, विशेषकर सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार की आवश्यकता है।

जयशंकर ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान वैश्विक व्यवस्था 21वीं सदी की वास्तविकताओं को पूरी तरह प्रतिबिंबित नहीं करती। इसलिए विकासशील देशों और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में अधिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।

UNSC में भारत की दावेदारी पर क्या बोले जयशंकर?

विदेश मंत्री ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की वर्तमान संरचना कई दशक पुरानी है और यह आज के वैश्विक संतुलन को सही तरीके से नहीं दर्शाती। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत जैसे बड़े लोकतांत्रिक और जिम्मेदार देश को सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता मिलनी चाहिए।

जयशंकर ने कहा कि भारत लंबे समय से वैश्विक शांति, सुरक्षा, मानवीय सहायता और सतत विकास के मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाता रहा है। ऐसे में भारत की भूमिका को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उचित प्रतिनिधित्व मिलना आवश्यक है।

संयुक्त राष्ट्र में सुधार क्यों जरूरी हैं?

बदलती दुनिया के अनुरूप बदलाव की जरूरत

विदेश मंत्री ने कहा कि पिछले कई दशकों में दुनिया की राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों में बड़े बदलाव आए हैं। इसके बावजूद संयुक्त राष्ट्र की प्रमुख संस्थाओं में अपेक्षित सुधार नहीं हुए हैं।

उन्होंने कहा कि यदि संयुक्त राष्ट्र को प्रभावी और विश्वसनीय बनाए रखना है, तो उसकी निर्णय प्रक्रिया अधिक समावेशी और प्रतिनिधित्वपूर्ण होनी चाहिए।

भारत लगातार उठा रहा है सुधारों का मुद्दा

भारत कई वर्षों से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और स्थायी सदस्यता के विस्तार की मांग करता रहा है। भारत का मानना है कि वर्तमान व्यवस्था में अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका के कई महत्वपूर्ण देशों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला है।

भारत का यह भी कहना है कि सुरक्षा परिषद की संरचना ऐसी होनी चाहिए, जिसमें वर्तमान वैश्विक शक्ति संतुलन और विकासशील देशों की भागीदारी स्पष्ट रूप से दिखाई दे।

भारत की दावेदारी क्यों मानी जाती है मजबूत?

भारत को स्थायी सदस्यता का मजबूत दावेदार इसलिए माना जाता है क्योंकि—

  • दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है।
  • वैश्विक शांति मिशनों में लगातार योगदान देता रहा है।
  • तेजी से उभरती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।
  • अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जिम्मेदार और संतुलित भूमिका निभाता है।
  • जलवायु परिवर्तन, सतत विकास और वैश्विक सहयोग जैसे मुद्दों पर सक्रिय भागीदारी निभाता है।

G4 देशों का भी भारत को समर्थन

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार के मुद्दे पर भारत को G4 समूह के अन्य देशों—जर्मनी, जापान और ब्राज़ील—का भी समर्थन प्राप्त है। ये सभी देश लंबे समय से सुरक्षा परिषद के विस्तार और नए स्थायी सदस्यों को शामिल करने की वकालत करते रहे हैं।

इसके अलावा कई अन्य देशों ने भी समय-समय पर भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया है।

वर्तमान UNSC की संरचना

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वर्तमान में 15 सदस्य हैं।

इनमें शामिल हैं—

  • 5 स्थायी सदस्य
    • अमेरिका
    • रूस
    • चीन
    • फ्रांस
    • ब्रिटेन
  • 10 अस्थायी सदस्य, जिनका चुनाव निर्धारित अवधि के लिए किया जाता है।

भारत का मानना है कि यह संरचना आधुनिक वैश्विक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है और इसमें सुधार आवश्यक है।

भारत की विदेश नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता हासिल करना भारत की विदेश नीति के प्रमुख लक्ष्यों में शामिल रहा है। भारत लगातार बहुपक्षीय सहयोग, नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज़ को मजबूत करने की बात करता रहा है।

जयशंकर ने भी अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक संस्थाओं को अधिक लोकतांत्रिक, पारदर्शी और प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाया जाना चाहिए।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका

संयुक्त राष्ट्र में किसी भी बड़े सुधार के लिए सदस्य देशों के व्यापक समर्थन की आवश्यकता होती है। सुरक्षा परिषद के विस्तार और सुधार का विषय लंबे समय से चर्चा में है, लेकिन अब तक इस पर अंतिम सहमति नहीं बन सकी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में इस मुद्दे पर गंभीर और व्यावहारिक सहमति बनाने की आवश्यकता है।

निष्कर्ष

UNSC में भारत की दावेदारी को दोहराते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्पष्ट संदेश दिया कि 21वीं सदी की चुनौतियों का सामना करने के लिए संयुक्त राष्ट्र में व्यापक सुधार आवश्यक हैं। भारत का मानना है कि सुरक्षा परिषद की वर्तमान संरचना में बदलाव कर विकासशील और उभरती शक्तियों को उचित प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए। आने वाले समय में संयुक्त राष्ट्र सुधारों पर वैश्विक सहमति बनना अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को अधिक प्रभावी और संतुलित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।

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