11 साल बाद जुलाई में मानसून ब्रेक जैसी स्थिति, यूपी में 19% और एमपी में 3% कम बारिश
मानसून ब्रेक जैसी स्थिति ने इस बार जुलाई के मौसम का मिजाज बदल दिया है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार करीब 11 साल बाद जुलाई में ऐसा दौर देखने को मिला है, जब मानसून की सक्रियता कमजोर पड़ गई। इसका असर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में बारिश पर साफ दिखाई दे रहा है।
उत्तर प्रदेश में सामान्य से लगभग 19 प्रतिशत कम और मध्य प्रदेश में करीब 3 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह स्थिति अस्थायी है, लेकिन यदि लंबे समय तक बनी रही तो इसका असर खेती, जलाशयों और जल उपलब्धता पर पड़ सकता है।
मानसून ब्रेक क्या होता है?
मानसून ब्रेक वह स्थिति होती है जब दक्षिण-पश्चिम मानसून कुछ दिनों के लिए कमजोर पड़ जाता है और सामान्य से काफी कम वर्षा होती है। इस दौरान मानसूनी ट्रफ अपने सामान्य स्थान से खिसक जाती है, जिससे मध्य और उत्तर भारत के कई हिस्सों में बारिश रुक जाती है।
हालांकि, इस दौरान पूर्वोत्तर भारत और हिमालय से सटे कुछ क्षेत्रों में बारिश जारी रह सकती है। इसलिए इसे मानसून का पूरी तरह समाप्त होना नहीं माना जाता, बल्कि यह एक अस्थायी मौसमीय स्थिति होती है।
11 साल बाद क्यों बनी ऐसी स्थिति?
मौसम विभाग के अनुसार जुलाई में लंबे अंतराल के बाद मानसून की सक्रियता में इतनी स्पष्ट कमी देखी गई है। सामान्य तौर पर जुलाई मानसून का सबसे सक्रिय महीना माना जाता है, लेकिन इस बार कुछ दिनों तक बारिश का सिलसिला कमजोर रहा।
विशेषज्ञों के मुताबिक मानसूनी ट्रफ की स्थिति, वायुमंडलीय दबाव में बदलाव और अन्य मौसमी कारकों के कारण यह स्थिति बनी है। हालांकि मौसम विभाग लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है।
यूपी में 19% और एमपी में 3% कम बारिश
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में सामान्य से लगभग 19 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। वहीं मध्य प्रदेश में बारिश सामान्य से करीब 3 प्रतिशत कम रही।
बारिश में यह कमी सभी जिलों में समान नहीं है। कुछ क्षेत्रों में सामान्य वर्षा हुई है, जबकि कई जिलों में औसत से काफी कम बारिश रिकॉर्ड की गई है।
किन राज्यों पर पड़ा असर?
मानसून की कमजोर सक्रियता का प्रभाव कई राज्यों में देखने को मिला है। इनमें प्रमुख रूप से—
- उत्तर प्रदेश
- मध्य प्रदेश
- राजस्थान के कुछ हिस्से
- हरियाणा
- दिल्ली-एनसीआर के कुछ क्षेत्र
हालांकि देश के अन्य हिस्सों में स्थानीय मौसम प्रणालियों के कारण कहीं-कहीं अच्छी बारिश भी दर्ज की गई है।
खेती पर क्या पड़ सकता है असर?
जुलाई का महीना खरीफ फसलों की बुवाई और शुरुआती विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में यदि बारिश सामान्य से कम रहती है तो किसानों की चिंता बढ़ सकती है।
विशेष रूप से धान, सोयाबीन, मक्का, दालें और अन्य खरीफ फसलों को पर्याप्त नमी की आवश्यकता होती है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश होती है तो स्थिति सामान्य हो सकती है।
जलाशयों और भूजल पर भी असर संभव
बारिश में कमी का असर केवल खेती तक सीमित नहीं रहता। इसका प्रभाव जलाशयों, बांधों और भूजल स्तर पर भी पड़ सकता है।
यदि लंबे समय तक सामान्य से कम बारिश होती है, तो पेयजल उपलब्धता और सिंचाई व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ सकता है। इसलिए लगातार वर्षा की स्थिति पर नजर रखना जरूरी है।
मौसम विभाग ने क्या कहा?
भारतीय मौसम विभाग (IMD) का कहना है कि मानसून ब्रेक जैसी स्थिति स्थायी नहीं होती। मौसम प्रणालियों में बदलाव के साथ मानसून दोबारा सक्रिय हो सकता है।
विभाग लगातार विभिन्न मौसमीय संकेतकों की निगरानी कर रहा है और समय-समय पर राज्यों को आवश्यक पूर्वानुमान जारी किए जा रहे हैं।
मानसून ब्रेक के दौरान क्या होता है?
मौसम में दिखाई देने वाले प्रमुख बदलाव
- कई इलाकों में बारिश अचानक कम हो जाती है।
- तापमान और उमस में बढ़ोतरी महसूस होती है।
- बादल बनने की प्रक्रिया कमजोर पड़ जाती है।
- खेती और जल स्रोतों पर असर दिखने लगता है।
- मानसूनी ट्रफ सामान्य स्थिति से हट जाती है।
क्या लोगों को चिंता करने की जरूरत है?
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल घबराने की आवश्यकता नहीं है। मानसून के दौरान इस प्रकार के ब्रेक सामान्य मौसमीय प्रक्रिया का हिस्सा हो सकते हैं।
हालांकि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो खेती, जल संसाधनों और मौसम पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए मौसम विभाग की सलाह और पूर्वानुमान पर ध्यान देना जरूरी है।
आगे कैसा रह सकता है मौसम?
मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में मानसून की गतिविधियों में बदलाव संभव है। विभिन्न मौसम प्रणालियों के सक्रिय होने पर कई राज्यों में फिर से अच्छी बारिश हो सकती है।
हालांकि प्रत्येक क्षेत्र का पूर्वानुमान स्थानीय मौसमीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। इसलिए लोगों को आधिकारिक मौसम बुलेटिन पर ही भरोसा करना चाहिए।
किसानों के लिए क्या सलाह?
विशेषज्ञ किसानों को मौसम विभाग द्वारा जारी पूर्वानुमान के अनुसार कृषि कार्य करने की सलाह दे रहे हैं।
- मौसम अपडेट पर नियमित नजर रखें।
- सिंचाई की वैकल्पिक व्यवस्था बनाए रखें।
- कृषि विभाग की स्थानीय सलाह का पालन करें।
- आवश्यकता अनुसार फसल प्रबंधन करें।
निष्कर्ष
मानसून ब्रेक जैसी स्थिति ने जुलाई के मौसम को प्रभावित किया है और उत्तर प्रदेश तथा मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। हालांकि मौसम विभाग का मानना है कि यह अस्थायी स्थिति है और आने वाले दिनों में मानसून दोबारा सक्रिय हो सकता है। ऐसे में किसानों, आम नागरिकों और संबंधित विभागों को मौसम के आधिकारिक अपडेट पर नजर रखते हुए आवश्यक तैयारी बनाए रखनी चाहिए।

