आप को बड़ा झटका: कई वरिष्ठ नेता बीजेपी में शामिल
शुक्रवार, 24 अप्रैल 2026 को आम आदमी पार्टी (आप) को एक बड़ा राजनीतिक झटका लगा। पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा समेत सात प्रमुख नेताओं ने पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने का ऐलान किया। राघव चड्ढा ने दावा किया कि यह सिर्फ व्यक्तिगत फैसले नहीं हैं, बल्कि आप के दो-तिहाई से ज्यादा सांसदों का एक तरह से बीजेपी में विलय जैसा है। पिछले कुछ वर्षों में लगातार बड़े नेताओं के पार्टी छोड़ने से यह सवाल उठने लगा है कि क्या आप के नेताओं के लिए बीजेपी एक स्वाभाविक विकल्प बनती जा रही है।
इन नेताओं ने छोड़ी आप की सदस्यता
आप से इस्तीफा देने वाले प्रमुख नेताओं में राघव चड्ढा, स्वाति मालीवाल, हरभजन सिंह, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, राजिंदर गुप्ता और विक्रम साहनी शामिल हैं। इनमें से राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक पहले ही बीजेपी में शामिल हो चुके हैं, जबकि बाकी नेताओं के भी जल्द बीजेपी में जाने की संभावना जताई जा रही है। ये सभी नेता पार्टी के प्रमुख और चर्चित चेहरे रहे हैं।
पहले भी कई बड़े चेहरे छोड़ चुके हैं पार्टी
आप के इतिहास पर नजर डालें तो अब तक करीब 20 बड़े नेता पार्टी छोड़ चुके हैं, जिनमें से लगभग 13 बीजेपी में शामिल हो गए। शाजिया इल्मी ने साल 2014 में पार्टी छोड़ी थी और बीजेपी जॉइन की थी। उन्होंने पार्टी की कार्यशैली और आंतरिक लोकतंत्र पर सवाल उठाए थे। इसी तरह दिल्ली सरकार में मंत्री रहे कैलाश गहलोत ने भी हाल ही में आप छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया।
इसके अलावा राजकुमार आनंद ने लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी और मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। बाद में वह पहले बीएसपी और फिर बीजेपी में शामिल हो गए। करतार सिंह तंवर भी उनके साथ बीजेपी में चले गए।
वरिष्ठ वकील एच एस फुल्का ने भी पार्टी की नीतियों से असहमति जताते हुए इस्तीफा दिया और बाद में बीजेपी में शामिल हो गए। वहीं कपिल मिश्रा, जिन्हें 2017 में पार्टी से निकाल दिया गया था, उन्होंने 2019 में बीजेपी जॉइन कर ली और अब वहां सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
कुछ नेताओं ने नहीं चुना बीजेपी का रास्ता
हालांकि, सभी नेताओं ने आप छोड़ने के बाद बीजेपी का रुख नहीं किया। योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण जैसे नेताओं ने पार्टी से अलग होने के बाद वैकल्पिक राजनीतिक रास्ते अपनाए। योगेंद्र यादव ने “स्वराज अभियान” की शुरुआत की, जबकि प्रशांत भूषण ने भी स्वतंत्र रूप से राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर काम जारी रखा।
इसी तरह आशुतोष ने भी पार्टी छोड़ने के बाद बीजेपी से दूरी बनाए रखी। आदर्श शास्त्री, जो पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के पोते हैं, उन्होंने आप छोड़कर कांग्रेस जॉइन की। अलका लांबा और मयंक गांधी ने भी अलग रास्ता चुना।
वहीं कुमार विश्वास लंबे समय तक पार्टी में मतभेदों के चलते अलग-थलग रहे और अंततः दूरी बना ली। उन्होंने कई मौकों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की तारीफ भी की है।
कुल मिलाकर, आप में लगातार हो रहे इन बड़े बदलावों ने पार्टी की स्थिरता और भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इन राजनीतिक बदलावों का देश की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।
