April 24, 2026

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पश्चिम बंगाल चुनाव के पहले चरण में रिकॉर्ड मतदान, सुप्रीम कोर्ट ने जताई खुशी

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में भारी मतदान दर्ज किया गया है, जिससे न्यायपालिका ने भी संतोष व्यक्त किया है। देश के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने 92 प्रतिशत से अधिक मतदान पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है। उन्होंने कहा कि एक नागरिक के रूप में लोगों को उत्साहपूर्वक मतदान करते देखना बेहद सुखद है और इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत होती है। यह टिप्पणी उस समय की गई जब सुप्रीम कोर्ट एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें 71 लोगों ने मतदान का अधिकार बहाल करने की मांग की है।

इन याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उनका नाम विशेष पुनरीक्षण के बाद वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है और उनका मामला फिलहाल अपीलेट ट्रिब्यूनल के पास लंबित है। कोर्ट को यह भी बताया गया कि गुरुवार, 23 अप्रैल 2026 को हुए पहले चरण के मतदान में लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिससे मतदान प्रतिशत 92% से अधिक पहुंच गया।

वोटर लिस्ट विवाद और ट्रिब्यूनल की भूमिका
इस मामले से जुड़े विवाद को सुलझाने के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। हाईकोर्ट ने वोटर लिस्ट से नाम हटाने के खिलाफ अपीलों पर निर्णय लेने के लिए 19 विशेष ट्रिब्यूनल बनाए हैं। इन ट्रिब्यूनल्स की अध्यक्षता हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीशों और वरिष्ठ जजों द्वारा की जा रही है।

ये सभी ट्रिब्यूनल उन लोगों की अपील सुन रहे हैं, जिनके नाम वोटर सूची से हटा दिए गए हैं और जो दोबारा अपने मतदान अधिकार को बहाल करवाना चाहते हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी पात्र मतदाता का अधिकार गलत तरीके से न छीना जाए और चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष बनी रहे।

कम हुई हिंसा, बढ़ा मतदाताओं का विश्वास
सुनवाई के दौरान चुनाव में हिंसा की घटनाओं में आई कमी पर भी चर्चा हुई। न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने कहा कि इस बार हिंसक घटनाएं काफी कम देखने को मिली हैं, जो एक सकारात्मक बदलाव है। इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सुरक्षा बलों ने लोगों के बीच भरोसा पैदा करने में अहम भूमिका निभाई है। उनके अनुसार, बेहतर सुरक्षा व्यवस्था के कारण ही अधिक संख्या में लोग मतदान के लिए बाहर निकले।

हालांकि, इस मुद्दे पर अलग-अलग पक्षों की राय भी सामने आई। एक वरिष्ठ अधिवक्ता, जो टीएमसी और कुछ मतदाताओं का पक्ष रख रहे थे, उन्होंने तर्क दिया कि बड़ी संख्या में मतदान इसलिए हुआ क्योंकि लोगों को डर था कि उनका नाम वोटर लिस्ट से हट सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रवासी मजदूरों ने इसी डर के चलते बड़ी संख्या में आकर मतदान किया।

इस दलील पर सॉलिसिटर जनरल ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की टिप्पणी में राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए और इसे तथ्यों के आधार पर देखा जाना चाहिए।

कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल चुनाव के पहले चरण में रिकॉर्ड मतदान, कम हिंसा और न्यायिक निगरानी जैसे पहलुओं ने चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में सकारात्मक संकेत दिए हैं।

 

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