यूपी विधानसभा में सियासी टकराव तेज, सीएम योगी और अखिलेश यादव के बीच तीखी बयानबाजी
उत्तर प्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान राजनीतिक माहौल काफी गर्म नजर आया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने खासतौर पर महिला आरक्षण के मुद्दे को लेकर विपक्ष पर दोहरे रवैये का आरोप लगाया। सीएम योगी के इस बयान के बाद सियासत और भी गरमा गई और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी।
महिला आरक्षण को लेकर विपक्ष पर आरोप
विधानसभा में बोलते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विपक्षी दल संसद और विधानसभा में अलग-अलग रुख अपनाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि संसद में महिला आरक्षण का विरोध किया जाता है, जबकि राज्य के सदन में उसका समर्थन दिखाया जाता है। मुख्यमंत्री ने इसे जनता को भ्रमित करने की कोशिश बताया।
उन्होंने अपने भाषण में कहा कि समाजवादी पार्टी का व्यवहार गिरगिट की तरह रंग बदलने वाला है। सीएम योगी ने आरोप लगाया कि सपा के अंदर महिलाओं के प्रति नकारात्मक सोच रही है और जब-जब पार्टी सत्ता में रही है, तब महिलाओं के खिलाफ अपराधों में बढ़ोतरी देखने को मिली है। उन्होंने पुराने मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि सपा और कांग्रेस का इतिहास महिलाओं के प्रति संवेदनशील नहीं रहा है।
अखिलेश यादव का पलटवार
सीएम योगी के इन आरोपों के बाद अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मुख्यमंत्री के भाषण का वीडियो साझा करते हुए कटाक्ष किया कि जब कुछ लोग दूसरों को आईना दिखाने की कोशिश करते हैं, तो असल में अपने ही राज उजागर कर देते हैं।
अखिलेश यादव ने आगे कहा कि मुख्यमंत्री को अपने ऊपर से वापस लिए गए मुकदमों की सूची भी याद करनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सीएम खुद इन मामलों को सार्वजनिक करेंगे या फिर उन्हें सदन या सड़क पर उजागर किया जाए। इस बयान से साफ है कि दोनों नेताओं के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई है।
सपा नेताओं की प्रतिक्रिया और बहस तेज
इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के अन्य नेताओं ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। सपा विधायक संग्राम यादव ने मुख्यमंत्री के भाषण को उबाऊ बताते हुए कहा कि यह सिर्फ पुराने मुद्दों को दोहराने जैसा था। उन्होंने कहा कि सरकार बार-बार वही बातें दोहराकर जनता का ध्यान असली मुद्दों से भटकाने की कोशिश कर रही है।
सपा नेताओं ने अपने पक्ष में पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल का जिक्र किया और कहा कि उनके शासन में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कई कदम उठाए गए थे। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे कुछ मामलों में महिलाओं को न्याय दिलाने और उन्हें राजनीतिक रूप से आगे बढ़ाने का काम किया गया।
सियासी माहौल हुआ गर्म
इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर से आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। विधानसभा का यह सत्र नीतिगत चर्चाओं के साथ-साथ राजनीतिक बयानबाजी के कारण भी सुर्खियों में बना हुआ है।
जहां एक ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विपक्ष को घेरने में लगे हैं, वहीं दूसरी ओर अखिलेश यादव और उनकी पार्टी भी सरकार पर पलटवार करने का कोई मौका नहीं छोड़ रही है। आने वाले समय में यह राजनीतिक टकराव और बढ़ सकता है, जिससे प्रदेश की सियासत और अधिक दिलचस्प हो सकती है।
