CBSE OSM विवाद: राहुल गांधी का सरकार पर हमला, बोले- अधिकारियों का ट्रांसफर नहीं, ‘कवर-अप’ है
नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के नए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर उठे विवाद ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने CBSE चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता के ट्रांसफर को “कवर-अप” करार देते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है। साथ ही उन्होंने पूरे मामले की स्वतंत्र न्यायिक जांच कराने की भी मांग उठाई है।
यह विवाद लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों को प्रभावित कर रहा है। परीक्षा परिणामों में कथित गड़बड़ियों के बाद शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
क्या है CBSE का OSM सिस्टम?
CBSE ने वर्ष 2026 की बोर्ड परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम लागू किया था। इस व्यवस्था के तहत उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर डिजिटल माध्यम से मूल्यांकन किया गया।
बोर्ड का दावा था कि यह प्रणाली मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाएगी, मानवीय त्रुटियों को कम करेगी और एक डिजिटल ऑडिट ट्रेल उपलब्ध कराएगी। हालांकि परिणाम घोषित होने के बाद कई छात्रों ने मूल्यांकन में गंभीर खामियों की शिकायत की।
छात्रों ने उठाए मूल्यांकन में गड़बड़ी के सवाल
देशभर के छात्रों और अभिभावकों ने OSM सिस्टम को लेकर कई समस्याओं की ओर ध्यान दिलाया। इनमें शामिल हैं:
- उत्तर पुस्तिकाओं के धुंधले (ब्लरी) स्कैन
- पन्नों का गायब होना या गलत तरीके से जुड़ जाना
- उत्तर पुस्तिकाओं में मिसमैच
- अपेक्षा से कम अंक मिलना
- री-इवैल्यूएशन पोर्टल में तकनीकी दिक्कतें
झारखंड के एक छात्र द्वारा अपनी मूल उत्तर पुस्तिका और स्कैन की गई कॉपी में अंतर दिखाने के बाद यह मुद्दा तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इसके बाद हजारों छात्रों ने इसी तरह की शिकायतें सामने रखीं।
कई छात्रों का कहना है कि उन्होंने JEE Main जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन CBSE में 75 प्रतिशत अंक की अनिवार्य सीमा पूरी नहीं कर पाए, जिससे उनके उच्च शिक्षा में प्रवेश की संभावनाएं प्रभावित हुई हैं।
तकनीकी और साइबर सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी सामने आईं
विवाद उस समय और गहरा गया जब कुछ साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने OSM सिस्टम की सुरक्षा और डेटा प्रबंधन को लेकर सवाल उठाए। रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ तकनीकी कमजोरियों की पहचान की गई, जिसके बाद CBSE को हजारों उत्तर पुस्तिकाओं को दोबारा स्कैन करना पड़ा।
बताया गया कि बोर्ड ने तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए विशेषज्ञों और उच्च शिक्षण संस्थानों के विशेषज्ञों की मदद भी ली।
OSM सिस्टम का ठेका भी विवादों में
विवाद का एक बड़ा पहलू OSM सिस्टम के लिए दिए गए ठेके से जुड़ा है। यह परियोजना Coempt Eduteck (पूर्व में Globarena Technologies) को सौंपी गई थी।
आलोचकों का आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में बदलाव कर कंपनी को लाभ पहुंचाया गया। विपक्षी दलों ने यह भी सवाल उठाया है कि पहले से विवादों में रह चुकी कंपनी को इतनी बड़ी जिम्मेदारी क्यों दी गई।
सरकार ने इस मामले की जांच के लिए एक सदस्यीय समिति का गठन किया है, लेकिन विपक्ष इसे पर्याप्त नहीं मान रहा है।
राहुल गांधी ने सरकार से मांगा जवाब
CBSE के शीर्ष अधिकारियों के ट्रांसफर की खबर सामने आने के बाद राहुल गांधी ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अधिकारियों का तबादला कर देना जवाबदेही तय करना नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि वास्तविक जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई किए बिना केवल प्रशासनिक बदलाव करना मामले को दबाने की कोशिश है। राहुल गांधी ने विशेष जांच दल (SIT) या न्यायिक जांच की मांग करते हुए कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े इस मामले में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए।
कांग्रेस ने भी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जवाबदेही तय करने और निष्पक्ष जांच कराने की मांग दोहराई है।
सरकार और CBSE का क्या कहना है?
CBSE और शिक्षा मंत्रालय का कहना है कि OSM सिस्टम का उद्देश्य मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाना था। अधिकारियों का दावा है कि इतनी बड़ी तकनीकी व्यवस्था लागू करने के दौरान शुरुआती चुनौतियां आना स्वाभाविक है।
शिक्षा मंत्रालय ने छात्रों को आश्वासन दिया है कि उनकी शिकायतों की जांच की जाएगी और जहां आवश्यकता होगी वहां सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि CBSE अधिकारियों का ट्रांसफर एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है और इसे विवाद से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
छात्रों और अभिभावकों की बढ़ती चिंता
परिणामों में कथित गड़बड़ियों के कारण छात्र और अभिभावक चिंतित हैं। कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं। छात्रों का कहना है कि यदि समय रहते उनकी शिकायतों का समाधान नहीं हुआ तो कॉलेज एडमिशन, काउंसलिंग और छात्रवृत्ति जैसी प्रक्रियाएं प्रभावित हो सकती हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा प्रणाली का डिजिटलीकरण जरूरी है, लेकिन इसके लिए मजबूत तकनीकी ढांचा, बैकअप व्यवस्था और प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र भी उतना ही आवश्यक है।
भारतीय शिक्षा व्यवस्था में भरोसे की परीक्षा
CBSE OSM विवाद ऐसे समय सामने आया है जब देश में विभिन्न प्रतियोगी और बोर्ड परीक्षाओं को लेकर पहले भी सवाल उठ चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले का निष्पक्ष समाधान शिक्षा व्यवस्था में छात्रों और अभिभावकों का विश्वास बहाल करने के लिए बेहद जरूरी है।
निष्कर्ष
CBSE का OSM विवाद भारत की शिक्षा प्रणाली में डिजिटल बदलाव की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बनकर उभरा है। एक ओर सरकार इसे पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने की दिशा में उठाया गया कदम बता रही है, वहीं दूसरी ओर छात्र और विपक्ष इसके क्रियान्वयन और जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार और CBSE छात्रों की शिकायतों का समाधान कितनी तेजी और पारदर्शिता के साथ करते हैं। क्योंकि इस विवाद का सबसे बड़ा असर उन लाखों छात्रों पर पड़ रहा है जिनका भविष्य इन परिणामों से जुड़ा हुआ है।
OSM (On-Screen Marking) एक डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली है, जिसमें उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन करके ऑनलाइन जांचा जाता है।
कई छात्रों ने उत्तर पुस्तिकाओं के स्कैन, अंकन प्रक्रिया और री-इवैल्यूएशन में कथित गड़बड़ियों की शिकायत की, जिसके बाद मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया।
राहुल गांधी ने CBSE अधिकारियों के ट्रांसफर को “कवर-अप” बताते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और न्यायिक जांच की मांग की है।
सरकार ने OSM सिस्टम से जुड़े कुछ पहलुओं की जांच के लिए एक सदस्यीय समिति का गठन किया है और छात्रों की शिकायतों की समीक्षा का आश्वासन दिया है।
मूल्यांकन में गड़बड़ियों के कारण छात्रों के बोर्ड परिणाम, कॉलेज एडमिशन, काउंसलिंग और छात्रवृत्ति जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं प्रभावित हो सकती हैं।

