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CBSE री-इवैल्यूएशन पोर्टल शुरू होते ही ठप, OSM विवाद गहराया, लाखों छात्र हुए परेशान

नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की 2026 बोर्ड परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद छात्रों को अपने अंकों की जांच और री-इवैल्यूएशन की प्रक्रिया का इंतजार था। लेकिन जैसे ही CBSE री-इवैल्यूएशन पोर्टल 2026 शुरू हुआ, तकनीकी समस्याओं के कारण यह ठप पड़ गया। लाखों छात्र-छात्राओं को लॉगिन, आवेदन और भुगतान संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ा। इस बीच पहले से विवादों में घिरे ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर भी सवाल और तेज हो गए हैं।

OSM सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल

CBSE ने वर्ष 2026 की बोर्ड परीक्षाओं में बड़े स्तर पर On-Screen Marking (OSM) प्रणाली लागू की थी। इस नई व्यवस्था के तहत उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन करके डिजिटल माध्यम से मूल्यांकन किया गया। बोर्ड का दावा था कि इससे मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, तेज और त्रुटिरहित होगी।

हालांकि, परिणाम जारी होने के बाद हजारों छात्रों ने मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल उठाए। कई छात्रों का आरोप है कि उनकी स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं में पृष्ठ गायब थे, कुछ पन्ने धुंधले दिखाई दे रहे थे और कई उत्तरों की जांच ही नहीं की गई। छात्रों का कहना है कि डिजिटल स्कैनिंग की खराब गुणवत्ता ने उनके प्राप्तांकों को प्रभावित किया है।

सोशल मीडिया पर छात्रों ने अपनी स्कैन कॉपियों की तस्वीरें साझा करते हुए दावा किया कि कई उत्तरों पर अंक नहीं दिए गए, जबकि उत्तर पूरी तरह से लिखे गए थे। इससे OSM सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

CBSE ने स्वीकार की तकनीकी खामियां

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, CBSE ने कुछ उत्तर पुस्तिकाओं में स्कैनिंग संबंधी समस्याओं को स्वीकार किया है। बोर्ड ने प्रभावित उत्तर पुस्तिकाओं की मैन्युअल जांच कराने की प्रक्रिया भी शुरू की है।

सूत्रों के अनुसार, सिस्टम की समीक्षा के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की सहायता ली गई है। इसके साथ ही डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया में शामिल कुछ तकनीकी एजेंसियों और वेंडर्स की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। साइबर सुरक्षा और डेटा प्रबंधन को लेकर भी कई चिंताएं सामने आई हैं।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े स्तर पर डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली लागू करने से पहले व्यापक परीक्षण और प्रशिक्षण की आवश्यकता थी।

री-इवैल्यूएशन पोर्टल खुलते ही क्रैश

CBSE द्वारा री-इवैल्यूएशन, उत्तर पुस्तिका की फोटोकॉपी और मार्क्स वेरिफिकेशन के लिए पोर्टल शुरू करने की घोषणा की गई थी। लाखों छात्र एक साथ पोर्टल पर पहुंचे, जिसके कारण सर्वर पर भारी दबाव पड़ा।

छात्रों ने शिकायत की कि पोर्टल पर लॉगिन नहीं हो रहा था, स्क्रीन फ्रीज हो रही थी और कई मामलों में भुगतान कटने के बावजूद आवेदन सफल नहीं हो पा रहा था। कुछ छात्रों को “Under Maintenance” और “Server Error” जैसे संदेश दिखाई दिए।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर #CBSEPortalDown और #OSMControversy जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। छात्रों ने बोर्ड से जल्द समाधान की मांग की है।

छात्रों के भविष्य पर बढ़ी चिंता

कक्षा 12 के लाखों छात्र इस समय कॉलेज एडमिशन, JEE, NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की काउंसलिंग प्रक्रिया में शामिल हैं। ऐसे में री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया में देरी उनके भविष्य पर सीधा असर डाल सकती है।

कई छात्रों का कहना है कि यदि उनके अंक सही समय पर संशोधित नहीं हुए तो उन्हें मनचाहे कॉलेज और कोर्स में प्रवेश पाने में कठिनाई हो सकती है। कुछ छात्र ड्रॉप ईयर लेने की आशंका भी जता रहे हैं।

अभिभावकों ने भी बोर्ड से जवाबदेही तय करने और छात्रों के हितों की रक्षा करने की मांग की है। उनका कहना है कि छात्रों की सालभर की मेहनत तकनीकी खामियों की वजह से प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

विशेषज्ञों ने उठाए इंफ्रास्ट्रक्चर पर सवाल

शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल मूल्यांकन भविष्य की जरूरत है, लेकिन इसके लिए मजबूत तकनीकी ढांचे की आवश्यकता होती है। वर्तमान विवाद ने कई महत्वपूर्ण कमियों को उजागर किया है।

प्रमुख समस्यासंभावित प्रभाव
खराब स्कैनिंग गुणवत्ताउत्तरों का गलत मूल्यांकन
सर्वर क्षमता की कमीपोर्टल क्रैश और देरी
अपर्याप्त प्रशिक्षणमूल्यांकन में असंगति
तकनीकी त्रुटियांछात्रों का नुकसान
सुरक्षा संबंधी चिंताएंडेटा संरक्षण पर सवाल

विशेषज्ञों का सुझाव है कि भविष्य में किसी भी नई मूल्यांकन प्रणाली को लागू करने से पहले पायलट प्रोजेक्ट और व्यापक परीक्षण किए जाने चाहिए।

CBSE का पक्ष

CBSE ने स्पष्ट किया है कि री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया रद्द नहीं की गई है और छात्र केवल आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी पर ही भरोसा करें। बोर्ड ने यह भी कहा है कि तकनीकी समस्याओं को दूर करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

इसके अलावा, आवेदन प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए फीस में भी कमी की गई है। बोर्ड का कहना है कि किसी भी छात्र का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा और सभी शिकायतों की समीक्षा की जाएगी।

छात्रों के लिए जरूरी सलाह

जो छात्र री-इवैल्यूएशन या मार्क्स वेरिफिकेशन के लिए आवेदन करना चाहते हैं, उन्हें निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए:

  • केवल आधिकारिक CBSE वेबसाइट पर ही आवेदन करें।
  • भुगतान की रसीद और स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें।
  • तकनीकी समस्या आने पर हेल्पलाइन से संपर्क करें।
  • उत्तर पुस्तिका प्राप्त होने के बाद उसे ध्यान से जांचें।
  • केवल वास्तविक त्रुटि मिलने पर ही री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन करें।

निष्कर्ष

CBSE री-इवैल्यूएशन पोर्टल 2026 का ठप पड़ना केवल एक तकनीकी समस्या नहीं है, बल्कि यह देश की सबसे बड़ी शिक्षा प्रणालियों में से एक की तैयारियों पर भी सवाल खड़ा करता है। OSM विवाद ने यह दिखाया है कि डिजिटल परिवर्तन तभी सफल हो सकता है जब उसके पीछे मजबूत तकनीकी ढांचा, पर्याप्त परीक्षण और पारदर्शी प्रक्रिया हो।

लाखों छात्रों का भविष्य इस प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। ऐसे में CBSE के सामने सबसे बड़ी चुनौती छात्रों का भरोसा दोबारा जीतने और मूल्यांकन प्रणाली को अधिक विश्वसनीय बनाने की है।

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