22 मिनट की ओलावृष्टि से कश्मीर में तबाही, 30% सेब की फसल बर्बाद; किसानों को 400 करोड़ का नुकसान
कश्मीर में अचानक मौसम ने मचाई तबाही
कश्मीर घाटी में अचानक हुई तेज़ ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ दी है। मात्र 22 मिनट तक चली इस भीषण ओलावृष्टि ने सेब के बागानों को भारी नुकसान पहुंचाया है। शुरुआती आकलन के अनुसार, लगभग 30% सेब की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है, जिससे किसानों को करीब 400 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
सेब उत्पादक क्षेत्रों पर सबसे ज्यादा असर
कश्मीर के प्रमुख सेब उत्पादक इलाकों में इस ओलावृष्टि का सबसे ज्यादा प्रभाव देखा गया है। बागानों में पेड़ों पर लगे फल पूरी तरह गिर गए या बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। कई किसानों ने बताया कि सालभर की मेहनत कुछ ही मिनटों में खत्म हो गई।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय सेब की फसल विकास के महत्वपूर्ण चरण में थी, ऐसे में ओलावृष्टि ने उत्पादन क्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
किसानों की आजीविका पर संकट
सेब की खेती कश्मीर की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा है और हजारों परिवार इसी पर निर्भर हैं। इस प्राकृतिक आपदा के बाद किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। कई किसानों ने सरकार से तत्काल राहत और मुआवजे की मांग की है।
स्थानीय किसान संगठनों का कहना है कि यदि जल्द सहायता नहीं मिली तो आने वाले महीनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे शुरू कर दिया है। प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर नुकसान का आकलन किया जा रहा है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि प्रभावित किसानों को हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी और फसल नुकसान का मुआवजा देने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी।
मौसम विभाग की चेतावनी
मौसम विभाग ने पहले ही कुछ क्षेत्रों में खराब मौसम और ओलावृष्टि की संभावना जताई थी, लेकिन इतनी तेज़ और अचानक हुई बारिश व ओलों ने स्थिति को गंभीर बना दिया। विभाग ने आने वाले दिनों में भी सतर्क रहने की सलाह दी है।
निष्कर्ष
22 मिनट की यह ओलावृष्टि कश्मीर के किसानों के लिए बड़ी आपदा बनकर आई है। जहां एक तरफ 30% फसल नष्ट हो गई है, वहीं दूसरी तरफ 400 करोड़ रुपये के नुकसान ने कृषि अर्थव्यवस्था को झटका दिया है। अब सभी की नजरें सरकार की राहत योजना और आगे की मौसम स्थिति पर टिकी हैं।

