लंग कैंसर का खतरा बढ़ रहा है देश में, डॉक्टर्स की रिसर्च में आया सामने
एक रिसर्च से सामने आया है कि देश में लंग कैंसर बहुत तेजी से पैर पसार रहा है। यह कैंसर उन लोगों में बहुत जल्दी होता है जो ज्यादा धूम्रपान करते हैं। भारत ही नहीं दुनियां भर में लंग कैंसर से मरने वालों की तादात बहुत ज्यादा है। लंग कैंसर और प्रकार के कैंसर से बहुत ज्यादा खतरनाक है। पिछले कुछ सालों में इस कैंसर के इलाज में प्रगति के बावजूद इससे मरने वालों की संख्या में मामूली सी गिरावट आयी है। अन्तराष्ट्रीय स्तर पर कैंसर से मरने वालों का डेटा एकत्रित करने वाली संस्था ग्लोबोकेन के अनुसार भारत में इस बीमारी से मरने वालों की संख्या बहुत ज्यादा है। गुरुग्राम के मेदांता हॉस्पिटल ने हैशटैग बीट लंग कैंसर अभियान शुरू किया है। इसमें देश के जानेमाने लंग सर्जन डॉ. अरविन्द कुमार और उनकी टीम ने अपने एक दशक के 300 से अधिक लंग कैंसर के रोगिओं पर किये एनालिसिस को साझा किया है।
लंग कैंसर कैसे होता है
लंग कैंसर होने का मुख्य कारण धूम्रपान है। आमतौर पर यह बीमारी उन लोगों में ज्यादा होती है जो लोग ज्यादा धूम्रपान करते हैं। लेकिन कभी कभी लंग कैंसर उन लोगों में भी पाया जाता है जो लोग धूम्रपान तो नहीं करते लेकिन ऐसे लोग के संपर्क में रहते हैं जो धूम्रपान करते हैं। लंग कैंसर के कारणों में धूम्रपान, किसी दूसरे व्यक्ति के धूम्रपान का धुआँ, जहरीली गैस के संपर्क में आना या परिवार में किसी को पहले लंग कैंसर का होना शामिल है।
लंग कैंसर के लक्षण
लंग कैंसर के लक्षण बहुत सामान्य होते हैं जैसे खांसी (अक्सर खून के साथ ), सीने में दर्द, साँस लेने में घरघराहट की आवाज़ और वजन का घटना शामिल है। ये लक्षण जब तक दिखाई नहीं देते हैं जब तक कि कैंसर बढ़ नहीं जाता है।
डॉक्टर्स की रिसर्च
डॉक्टर्स ने रिसर्च में पाया है कि पुरुषों और महिलाओं दोनों में ही लंग कैंसर की घटनाओं में समग्र वृद्धि देखी गयी है। पुरुषों के बीच प्रसार और मृत्यु दर के मामले में यह बीमारी पहले से ही पहले नंबर पर थी। अब महिलाओं में भी यह बीमारी नंबर सात से नंबर तीन पर आ गयी है। रिसर्च में पाया गया है कि इस बीमारी की चपेट में आने वाले रोगियों में 20 फीसदी 50 साल से कम उम्र के लोग हैं। भारत के लोगों में यह बीमारी पश्चिमी देशों की तुलना में पिछले एक दशक से ज्यादा विकसित हुयी है। हैरानी की बात यह है कि इन रोगियों में से 50 फीसदी रोगी धूम्रपान न करने वाले हैं। इसमें से 70 फीसदी रोगी 50 साल से कम उम्र के हैं। वहीं 30 वर्ष से कम के रोगी 100 फीसदी धूम्रपान न करने वाले थे। लंग कैंसर के मामलों में महिला रोगियों की संख्या में भी वृद्धि देखि गयी है। ये सभी महिलाएं धूम्रपान न करने वाली हैं। ये कुल रोगियों की 30 फीसदी हैं। इस रिसर्च के दौरान यह भी देखा गया कि 80 फीसदी रोगियों में इस बीमारी का पता एडवांस्ड स्टेज पर चला, उस समय मरीज का पूरा इलाज़ संभव नहीं हो पाता है। बस दर्द में ही आराम दे पाते हैं। लगभग 30 फीसदी मरीजों में बीमारी का गलत डायग्नॉस किया गया और बीमारी को टीवी समझा गया और कई महीनों तक टीवी का इलाज़ चलता रहा इस कारण इलाज़ में देरी हो गयी।

