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मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने सीखो कमाओ योजना को मंजूरी दी, मुख्यमंत्री ने कहा बैसाखी नहीं उड़ने को पंख दे रहे हैं

बुधवार को हुयी कैबिनेट की मीटिंग में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सीखो कमाओ योजना को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत बेरोजगारों को काम सिखाया जायेगा और उन्हें स्टायपेंड के रूप में आठ से दस हजार रुपये प्रति माह काम सिखने के दौरान मिलेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि बेरोजगारी भत्ता देना बेमानी है। इसलिए हम बैसाखी नहीं बल्कि उड़ने के लिए पंख दे रहे हैं। इस योजना में 12वीं, आईटीआई, ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट पात्र होंगे।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस योजना को उस समय जारी किया है जब मध्यप्रदेश में चुनाव नजदीक हैं। उन्होंने स्मार्ट सिटी पार्क में पौधरोपण के बाद कहा कि मध्यप्रदेश सरकार बेरोजगारों को रोजगार दिलाने की दृष्टि से बहुत प्रयास कर रही है। मध्यप्रदेश में एक लाख पदों पर भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। जिसमे से 60 हजार भर्तियां पूरी हो चुकी हैं बाकि की बची 40 हजार भर्तियां भी जल्द ही पूरी हो जाएँगी। 15 अगस्त तक इन एक लाख भर्तीयों को पूरा कर दिया जायेगा। उन्होंने आगे कहा कि मैंने सभी सरकारी विभागों से व्यौरा मांगा है कि किस किस विभाग में भर्ती की गुंजाइश है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि स्वरोजगार के प्रयास निरंतर जारी हैं। इसी के तहत हम हर माह स्वरोजगार दिवस भी मानते हैं। जिसमे उस दिन हम ढाई लाख युवाओं को स्वरोजगार के लिए लोन दिया जाता है। उसकी गारंटी सरकार देती है और व्याज का अनुदान भी देती है। स्वरोजगार के तहत रोजगार के अवसर पैदा करने के प्रयास भी जारी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज हमने सीखो कमाओ योजना को भी शुरू कर दिया है। इस योजना के तहत नौजवानों को एक साल तक प्रशिक्षण दिया जायेगा और उन्हें प्रशिक्षण के दौरान पैसा भी दिया जायेगा।

सीखो कमाओ योजना में पात्रता की शर्तें

इस योजना के तहत एक लाख बेरोजगार युवाओं को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा है। इस योजना में रजिस्ट्रेशन के लिए युवाओं को एक पोर्टल पर अपना रजिस्ट्रेशन करना होगा। साथ ही अपने एजुकेशनल दस्तावेज, आईडी प्रूफ, निवास प्रमाण पत्र समेत अन्य जानकारी अपलोड करनी होंगी। इस योजना में रजिस्ट्रेशन के लिए मध्यप्रदेश का निवासी होना अनिवार्य है। इस योजना में रजिस्ट्रेशन के लिए आयु 18 से 29 वर्ष और न्यूनतम शैक्षिणिक अर्हता 12वीं पास या आईटीआई जरूरी है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने बताया कि इसके लिए हमने अलग अलग तरह के कामों की लिस्ट तैयार की है। इसमें इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजिनियरिंग, होटल मैनेजमेंट, टूरिज्म, अस्पताल, रेलवे, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, बैंकिंग, बीमा, और अन्य वित्तीय सेवाओं के 700 काम बच्चों को सिखाये जायेंगे। यह काम किसी संस्था, कंपनी, फैक्ट्री,अस्पताल में सिखाये जायेंगे।

प्रशिक्षण के दौरान आठ से दस हजार रुपये दिए जायेंगे

मुख्यमंत्री ने बताया कि 12वीं पास को 8000 रुपये, आईटीआई पास को 8500 रुपये, डिप्लोमा वाले को 9000 रुपये और डिग्री या उससे अधिक की पढ़ाई करने वाले को 10000 रुपये प्रति माह दिए जायेंगे। यह पैसा सीधे बच्चों के खाते में जायेगा। काम सिखने के बाद बच्चे वहीँ रोजगार भी पा सकते हैं। स्वरोजगार शुरू करने वालों की भी मदद की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि अभी पोर्टल पर काम चल रहा है। सात जून से जिन प्रतिष्ठानों  को काम सिखाना है उनका रजिस्ट्रेशन प्रारम्भ हो जायेगा। इसके बाद 15 जून से बच्चों का रजिस्ट्रेशन प्रारम्भ हो जायगा। 15 जुलाई से बच्चो का प्लेसमेंट शुरू हो जायेगा। 31 जुलाई तक प्रतिष्ठान और मध्यप्रदेश सरकार के बीच ऑनलाइन अनुबंधन हो जायेगा। 1 अगस्त से युवा काम सीखना प्रारम्भ कर देंगे। इस योजना के तहत युवाओं को मिलने वाले स्टाइपेंड का 75% राज्य सरकार द्वारा डीबीटी के माध्यम से भुगतान किया जायेगा। प्रशिक्षण के बाद राज्य कौशल विकास एवं रोजगार निर्माण बोर्ड की ओर से स्टेट कॉउंसिल फॉर वोकेशनल ट्रेनिंग का प्रमाण पत्र दिया जायेगा।

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