शिवसेना संकट 2026: स्थापना दिवस पर आमने-सामने उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे, 6 सांसदों के विद्रोह से बढ़ी सियासी गर्मी
मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर उबाल पर है। शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस के मौके पर उद्धव ठाकरे और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले दोनों गुटों के बीच टकराव चरम पर पहुंच गया है। पार्टी के भीतर छह लोकसभा सांसदों के संभावित विद्रोह की खबरों ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है।
मुंबई में दोनों गुटों के अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिसके चलते प्रशासन और पुलिस अलर्ट मोड पर है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा बदल सकता है।
शिवसेना के 60 साल: एक पार्टी, दो दावे
शिवसेना की स्थापना 19 जून 1966 को बालासाहेब ठाकरे ने की थी। मराठी अस्मिता के मुद्दे से शुरू हुई यह पार्टी बाद में हिंदुत्व की राजनीति का प्रमुख चेहरा बन गई।
हालांकि 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में हुए बड़े विद्रोह के बाद पार्टी दो हिस्सों में बंट गई। इसके बाद से दोनों गुट खुद को असली शिवसेना साबित करने की कोशिश कर रहे हैं।
छह सांसदों के विद्रोह ने बढ़ाई मुश्किलें
किन सांसदों के नाम चर्चा में?
सूत्रों के अनुसार, उद्धव ठाकरे गुट के छह लोकसभा सांसद पार्टी गतिविधियों से दूरी बनाते दिखाई दिए हैं। इनमें शामिल हैं:
- संजय दिना पाटिल
- संजय देशमुख
- नागेश पाटिल आष्टिकर
- ओमराजे नाईक निंबालकर
- संजय जाधव
- भाऊसाहेब वाकचौरे
इन नेताओं के शिंदे गुट में शामिल होने की अटकलें लगातार तेज हो रही हैं।
उद्धव गुट की प्रतिक्रिया
उद्धव ठाकरे खेमे ने सांसदों को पार्टी व्हिप जारी किया था, लेकिन अधिकांश सांसद बैठक में शामिल नहीं हुए। शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने इसे पार्टी तोड़ने की साजिश बताया और बागी सांसदों पर तीखा हमला बोला।
शिंदे गुट का शक्ति प्रदर्शन
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का गुट इस पूरे घटनाक्रम को अपनी राजनीतिक मजबूती के रूप में पेश कर रहा है। पार्टी नेताओं का दावा है कि अधिकतर कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि अब उनके साथ हैं।
बढ़ाई गई सुरक्षा
संभावित राजनीतिक तनाव को देखते हुए कुछ नेताओं की सुरक्षा भी बढ़ाई गई है। प्रशासन ने किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है।
मुंबई में हाई अलर्ट, पुलिस सतर्क
स्थापना दिवस के मौके पर दोनों गुट अलग-अलग शक्ति प्रदर्शन की तैयारी में जुटे हैं।
प्रमुख कार्यक्रम स्थल
- उद्धव ठाकरे गुट का कार्यक्रम मुंबई के प्रमुख सभागार क्षेत्र में आयोजित होने की संभावना।
- शिंदे गुट बड़े स्तर पर समर्थकों का जमावड़ा करने की तैयारी में।
दोनों गुटों के समर्थकों के बीच संभावित टकराव की आशंका को देखते हुए मुंबई पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।
महाराष्ट्र की राजनीति पर क्या पड़ेगा असर?
यदि छह सांसद आधिकारिक रूप से शिंदे गुट का दामन थाम लेते हैं तो उद्धव ठाकरे गुट की संसदीय ताकत काफी कम हो जाएगी।
संभावित राजनीतिक प्रभाव
- लोकसभा में UBT की स्थिति कमजोर हो सकती है।
- शिंदे गुट का राजनीतिक प्रभाव बढ़ेगा।
- आगामी BMC चुनावों पर असर पड़ सकता है।
- महायुति गठबंधन को रणनीतिक लाभ मिल सकता है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति में और बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
2022 से शुरू हुआ था संकट
कैसे टूटी थी शिवसेना?
2019 में महाविकास अघाड़ी सरकार बनने के बाद शिवसेना के भीतर असंतोष बढ़ा। 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में विधायकों के बड़े समूह ने विद्रोह कर दिया, जिसके बाद उद्धव ठाकरे सरकार गिर गई।
बाद में चुनाव आयोग ने शिंदे गुट को शिवसेना का नाम और चुनाव चिन्ह आवंटित किया। इस फैसले को लेकर कानूनी लड़ाई अब भी जारी है।
निष्कर्ष
शिवसेना के स्थापना दिवस पर महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल देखने को मिल रहा है। उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे के बीच जारी राजनीतिक संघर्ष अब नए मोड़ पर पहुंच चुका है। आने वाले दिनों में सांसदों के रुख और दोनों गुटों की रणनीति राज्य की राजनीति का भविष्य तय कर सकती है।
शिवसेना की स्थापना 19 जून 1966 को बालासाहेब ठाकरे ने की थी।
साल 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में हुए विद्रोह के बाद पार्टी दो गुटों में बंट गई थी।
एक गुट का नेतृत्व उद्धव ठाकरे कर रहे हैं, जबकि दूसरे गुट का नेतृत्व महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के पास है।
यदि ये सांसद शिंदे गुट में शामिल होते हैं तो उद्धव ठाकरे गुट की संसदीय ताकत काफी कमजोर हो सकती है।
दोनों गुटों के स्थापना दिवस कार्यक्रम और संभावित राजनीतिक टकराव की आशंका के कारण सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है।

