भारत-चीन संबंधों में सुधार: ‘दुश्मन नहीं, पार्टनर’ की नई सोच से बढ़ेगी साझेदारी
नई दिल्ली/बीजिंग: भारत और चीन के बीच पिछले कुछ महीनों में रिश्तों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है। 2020 के गलवान संघर्ष के बाद दोनों देशों के संबंधों में आई कड़वाहट अब धीरे-धीरे कम होती दिखाई दे रही है। चीन की ओर से लगातार यह संदेश दिया जा रहा है कि भारत और चीन प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि विकास और सहयोग के साझेदार हैं।
हालिया कूटनीतिक गतिविधियों, उच्चस्तरीय बैठकों और सीमा पर बनी स्थिरता ने दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की प्रक्रिया को नई गति दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि एशिया की दो सबसे बड़ी शक्तियों के बीच बेहतर संबंध क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
चीन का संदेश: प्रतिस्पर्धी नहीं, सहयोगी हैं भारत और चीन
हाल ही में चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने भारत-चीन संबंधों पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए कहा कि दोनों देशों को सही सामरिक सोच विकसित करनी चाहिए। उनके अनुसार भारत और चीन एक-दूसरे के विकास के अवसर हैं, न कि खतरा।
चीन के वरिष्ठ अधिकारियों और विदेश मंत्रालय ने भी कई मौकों पर यह दोहराया है कि दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावनाएं प्रतिस्पर्धा से कहीं अधिक बड़ी हैं। यह दृष्टिकोण BRICS और SCO जैसे बहुपक्षीय मंचों पर भी दिखाई दे रहा है।
सीमा पर शांति और संवाद ने बढ़ाया भरोसा
LAC पर स्थिति पहले से अधिक स्थिर
अक्टूबर 2024 में हुए सीमा गश्त समझौते के बाद वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर हालात अपेक्षाकृत शांत बताए जा रहे हैं। दोनों देशों के सैन्य और राजनयिक प्रतिनिधियों के बीच नियमित बातचीत जारी है।
विशेष प्रतिनिधियों की बैठकें फिर शुरू
सीमा विवाद के समाधान के लिए विशेष प्रतिनिधियों की बैठकें दोबारा शुरू हो चुकी हैं। इन बैठकों में सीमा प्रबंधन, तनाव कम करने और दीर्घकालिक समाधान पर चर्चा हो रही है।
मोदी-शी जिनपिंग मुलाकातों ने दी नई दिशा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हाल के वर्षों में हुई मुलाकातों ने संबंधों को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाई है।
2024 के BRICS सम्मेलन और 2025 के SCO सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी की 2025 की चीन यात्रा को भी संबंधों के सामान्यीकरण की दिशा में बड़ा कदम माना गया।
व्यापार और जन-जन संपर्क में बढ़ोतरी
भारत और चीन के बीच आर्थिक संबंध लगातार मजबूत बने हुए हैं। दोनों देशों ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिनमें शामिल हैं:
- सीधी उड़ानों की बहाली
- पर्यटक वीजा प्रक्रिया को आसान बनाना
- कैलाश मानसरोवर यात्रा को पुनः शुरू करना
- व्यापारिक सहयोग बढ़ाने की पहल
इन प्रयासों का उद्देश्य दोनों देशों के नागरिकों के बीच संपर्क और विश्वास को बढ़ाना है।
BRICS और वैश्विक मंचों पर बढ़ सकता है सहयोग
भारत और चीन जलवायु परिवर्तन, वैश्विक व्यापार, विकासशील देशों के हितों और बहुपक्षीय सहयोग जैसे मुद्दों पर साथ मिलकर काम कर सकते हैं।
2026 में भारत BRICS सम्मेलन की मेजबानी करेगा। ऐसे में चीन का सहयोग इस मंच को और अधिक प्रभावी बना सकता है। दोनों देशों ने भविष्य के BRICS एजेंडे पर भी सहयोग की इच्छा जताई है।
चुनौतियां अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं
सीमा विवाद बना हुआ है बड़ा मुद्दा
हालांकि रिश्तों में सुधार दिख रहा है, लेकिन सीमा विवाद का स्थायी समाधान अभी नहीं निकला है। अरुणाचल प्रदेश और अन्य क्षेत्रों को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं।
व्यापारिक असंतुलन और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा
दोनों देशों के बीच व्यापार में असंतुलन, तकनीकी क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र से जुड़े रणनीतिक मुद्दे भी भविष्य की चुनौतियों में शामिल हैं।
भविष्य की संभावनाएं क्या हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार मौजूदा सुधार केवल कूटनीतिक औपचारिकता नहीं बल्कि रणनीतिक आवश्यकता भी है। चीन-अमेरिका तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत और चीन दोनों को सहयोग से लाभ मिल सकता है।
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी हाल के महीनों में संबंधों में हुई प्रगति को सकारात्मक बताया है। हालांकि भारत का स्पष्ट रुख है कि सीमा पर शांति और स्थिरता ही सामान्य संबंधों की आधारशिला होगी।
निष्कर्ष
भारत और चीन दुनिया की दो सबसे बड़ी आबादी वाले देश हैं। यदि दोनों देश सहयोग और संवाद की नीति को आगे बढ़ाते हैं तो इसका लाभ केवल उन्हें ही नहीं बल्कि पूरे एशिया और वैश्विक दक्षिण को मिलेगा।
‘दुश्मन नहीं, पार्टनर’ की सोच को वास्तविक सफलता में बदलने के लिए सीमा विवादों का शांतिपूर्ण समाधान, पारस्परिक विश्वास और निरंतर संवाद आवश्यक होगा। यदि वर्तमान सकारात्मक माहौल बना रहता है, तो आने वाले वर्षों में भारत-चीन संबंध नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकते हैं।

