छिंदवाड़ा में कमलनाथ के ‘लापता विधायक’ पोस्टर से सियासत गरमाई, भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने
छिंदवाड़ा में पोस्टर वार से बढ़ा राजनीतिक तापमान
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में पूर्व मुख्यमंत्री और स्थानीय विधायक कमलनाथ के खिलाफ लगाए गए ‘लापता विधायक’ पोस्टरों ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। छिंदवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले जैतपुर गांव में लगे इन पोस्टरों के जरिए विधायक की कथित अनुपस्थिति और क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं को मुद्दा बनाया गया है।
पोस्टर सामने आने के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। भाजपा इसे जनता की नाराजगी बता रही है, जबकि कांग्रेस का कहना है कि यह विपक्ष की सोची-समझी राजनीतिक रणनीति है।
जैतपुर गांव में क्यों लगाए गए ‘लापता विधायक’ पोस्टर?
पोस्टरों में कमलनाथ को ‘लापता विधायक’ बताते हुए आरोप लगाया गया है कि वे लंबे समय से क्षेत्र में नहीं आए और स्थानीय समस्याओं की अनदेखी कर रहे हैं। पोस्टरों में विशेष रूप से पेयजल संकट, अधूरी विकास योजनाएं और ग्रामीण इलाकों की उपेक्षा का उल्लेख किया गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि गांव में लंबे समय से पानी की समस्या बनी हुई है। कई परिवारों को दूर-दराज के इलाकों से पानी लाना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के बाद जनप्रतिनिधियों का क्षेत्र में आना-जाना काफी कम हो गया है।
भाजपा ने उठाए क्षेत्र की समस्याओं के मुद्दे
भाजपा सांसद विवेक बंटी साहू ने कमलनाथ पर निशाना साधते हुए कहा कि विधायक पिछले कई महीनों से क्षेत्र में सक्रिय दिखाई नहीं दिए हैं। उन्होंने दावा किया कि छिंदवाड़ा विधानसभा क्षेत्र कई गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है।
पेयजल संकट
- कई तालाब और कुएं सूखने की कगार पर हैं।
- कई गांवों में टैंकरों से पानी पहुंचाया जा रहा है।
- ग्रामीणों का आरोप है कि स्थायी समाधान नहीं किया गया।
सड़क और संपर्क व्यवस्था
- ग्रामीण सड़कें जर्जर स्थिति में हैं।
- बारिश के दौरान कई गांवों का संपर्क प्रभावित होने की आशंका रहती है।
स्वास्थ्य और शिक्षा
- प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में सुविधाओं की कमी।
- स्कूलों में शिक्षकों की कमी की शिकायतें।
कृषि और बिजली
- किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं मिल रहे।
- बिजली आपूर्ति को लेकर भी ग्रामीणों ने असंतोष जताया है।
भाजपा नेताओं का कहना है कि पोस्टर किसी राजनीतिक अभियान का हिस्सा नहीं बल्कि जनता की नाराजगी का प्रतीक हैं।
कांग्रेस ने बताया राजनीतिक स्टंट
कांग्रेस ने पूरे मामले को भाजपा की राजनीतिक साजिश बताया है।
पार्टी नेताओं का कहना है कि कमलनाथ स्वास्थ्य कारणों से पहले की तुलना में कम सक्रिय जरूर हैं, लेकिन उनका क्षेत्र से जुड़ाव हमेशा बना रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि जनता की वास्तविक समस्याओं का समाधान करने के बजाय भाजपा पोस्टरबाजी कर राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर रही है।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पोस्टर लगाने वालों के खिलाफ जांच और कार्रवाई की मांग भी उठाई है।
छिंदवाड़ा की राजनीति में क्यों अहम है यह विवाद?
छिंदवाड़ा लंबे समय से कमलनाथ परिवार का राजनीतिक गढ़ माना जाता रहा है। यहां से कमलनाथ कई बार विधायक चुने जा चुके हैं और उनके पुत्र नकुलनाथ भी इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
हाल के वर्षों में भाजपा ने जिले में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश तेज की है। ऐसे में इस तरह की पोस्टरबाजी को आगामी चुनावी रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बार पोस्टर अभियान केवल राजनीतिक आरोपों तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय मुद्दों को केंद्र में रखकर चलाया जा रहा है। यदि जनता की मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं होता है तो यह आने वाले चुनावों में महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकता है।
दूसरी ओर कांग्रेस समर्थकों का दावा है कि कमलनाथ के लंबे राजनीतिक अनुभव और विकास कार्यों का असर अभी भी क्षेत्र में बना हुआ है।
आगे क्या होगा?
पोस्टर विवाद के बाद भाजपा क्षेत्र में जनसभाएं और जनसंपर्क अभियान चलाने की तैयारी कर रही है। वहीं कांग्रेस भी विकास कार्यों और कमलनाथ की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने के लिए जवाबी अभियान शुरू करने की योजना बना रही है।
फिलहाल यह मामला केवल पोस्टर विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि पेयजल, सड़क, बिजली, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे स्थानीय मुद्दों को भी राजनीतिक बहस के केंद्र में ले आया है।

