CJP Protest Delhi: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग तेज, जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक आमरण अनशन पर बैठे
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहा CJP (Cockroach Janata Party) का आंदोलन अब और तेज हो गया है। रविवार को प्रसिद्ध जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने प्रदर्शन को समर्थन देते हुए आमरण अनशन शुरू कर दिया।
अनशन शुरू करने से पहले सोनम वांगचुक ने राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी और उसके बाद जंतर-मंतर पर धरनास्थल पहुंचे। उनके अनशन में शामिल होने के बाद आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल रही है।
CJP आंदोलन क्या है और इसकी शुरुआत कैसे हुई?
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) एक युवा-आधारित व्यंग्यात्मक राजनीतिक आंदोलन है, जिसकी शुरुआत मई 2026 में अभिजीत दीपके ने की थी। यह मंच युवाओं की बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था की खामियों और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ बनाया गया।
‘CJP’ नाम उस विवादित बयान की प्रतिक्रिया के रूप में रखा गया, जिसमें युवाओं को कथित तौर पर अपमानजनक शब्दों से संबोधित किए जाने का आरोप लगा था। सोशल मीडिया पर लोकप्रिय होने के बाद यह आंदोलन अब सड़कों तक पहुंच चुका है।
आंदोलन की मुख्य मांगें क्या हैं?
प्रदर्शनकारियों ने सरकार के सामने कई प्रमुख मांगें रखी हैं।
1. धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सामने आई कथित गड़बड़ियों की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए।
2. परीक्षा प्रणाली में सुधार
CJP की मांग है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में पारदर्शिता बढ़ाई जाए और पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था बनाई जाए।
3. छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान
आंदोलनकारी छात्रों के लिए बेहतर काउंसलिंग व्यवस्था और आत्महत्या रोकने के लिए प्रभावी नीतियां लागू करने की मांग कर रहे हैं।
4. व्यापक शिक्षा सुधार
प्रदर्शनकारी रोजगार आधारित शिक्षा, कोचिंग व्यवस्था में सुधार और परीक्षा प्रक्रिया को अधिक विश्वसनीय बनाने की मांग उठा रहे हैं।
सोनम वांगचुक ने अनशन क्यों शुरू किया?
आमरण अनशन शुरू करते हुए सोनम वांगचुक ने कहा कि वे शिक्षा और न्याय के सवाल पर मजबूर होकर यह कदम उठा रहे हैं। उन्होंने देशभर के लोगों से अपील की कि वे कम से कम एक दिन का सांकेतिक उपवास रखकर इस आंदोलन का समर्थन करें।
वांगचुक ने कहा कि केवल किसी मंत्री का इस्तीफा पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित बनाना भी जरूरी है।
NEET 2026 विवाद क्या है
NEET-UG 2026 परीक्षा के बाद पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के आरोप लगे थे। इसके बाद जांच एजेंसियों ने मामले की जांच शुरू की।
सरकार ने दोबारा परीक्षा कराई और जांच जारी रहने की बात कही, लेकिन कई छात्र संगठनों और अभिभावकों का कहना है कि पूरे परीक्षा तंत्र में सुधार की जरूरत है। इसी मुद्दे को लेकर CJP लगातार प्रदर्शन कर रहा है।
किसानों और छात्रों का भी मिला समर्थन
जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन में विभिन्न छात्र संगठनों, युवाओं और कई किसान नेताओं ने भी भाग लिया। आंदोलनकारियों का दावा है कि यह केवल परीक्षा का मुद्दा नहीं बल्कि युवाओं के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता का सवाल है।
सरकार का क्या कहना है?
इस प्रदर्शन पर केंद्र सरकार या शिक्षा मंत्रालय की ओर से अभी तक कोई अलग आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सरकार पहले भी दोहरा चुकी है कि परीक्षा से जुड़े मामलों की जांच संबंधित एजेंसियां कर रही हैं और सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।
उधर, दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है ताकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से जारी रह सके
आगे क्या हो सकता है?
सोनम वांगचुक के अनशन के बाद आंदोलन को नई गति मिली है। CJP ने संकेत दिए हैं कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो देशभर में बड़े स्तर पर प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे।
अब सभी की नजर केंद्र सरकार की अगली प्रतिक्रिया और आंदोलन की आगामी रणनीति पर टिकी हुई है।
निष्कर्ष
दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा CJP आंदोलन अब केवल एक मंत्री के इस्तीफे की मांग तक सीमित नहीं रह गया है। यह प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता, शिक्षा सुधार और युवाओं के भविष्य से जुड़े व्यापक मुद्दों को सामने ला रहा है। सोनम वांगचुक के आमरण अनशन से आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर नई चर्चा मिली है। आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारियों के बीच होने वाले घटनाक्रम पर सभी की नजर बनी रहेगी।

