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केतन अग्रवाल मर्डर केस में नया मोड़: सिया के वकील ने भाई साहिल को भेजा 10 करोड़ का मानहानि नोटिस

केतन मर्डर केस में सिया के वकील द्वारा भाई साहिल को 10 करोड़ का मानहानि नोटिस भेजने के विवाद से जुड़ा न्यूज़ ग्राफिक - News Critic
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पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड में नया कानूनी विवाद

पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल मर्डर केस में अब एक नया कानूनी मोड़ सामने आया है। मुख्य आरोपी सिया गोयल के कथित वकील एडवोकेट आशुतोष श्रीवास्तव ने सिया के भाई साहिल गोयल को 10 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजा है। यह विवाद केवल हत्या की जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब आरोपी के कानूनी प्रतिनिधित्व और परिवार के बयानों को लेकर भी नया विवाद खड़ा हो गया है।

यह मामला पहले से ही पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब वकीलों के बीच पैदा हुआ विवाद इसे और अधिक हाई-प्रोफाइल बना रहा है।

क्या है केतन अग्रवाल मर्डर केस?

26 वर्षीय केतन अग्रवाल पुणे के एक रियल एस्टेट कारोबारी थे। उनकी शादी 20 वर्षीय सिया गोयल से तय हुई थी और दोनों की सगाई हो चुकी थी।

18 जून 2026 को सिया के जन्मदिन के बहाने दोनों लोनावला स्थित लोहागढ़ किले पर ट्रेकिंग के लिए पहुंचे। पुलिस जांच के अनुसार, वहीं सिया और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी ने मिलकर केतन को लगभग 400 फीट गहरी खाई में धक्का दे दिया, जिससे उसकी मौत हो गई।

पुलिस का दावा है कि यह हत्या पूरी तरह पूर्व नियोजित थी।

पुलिस जांच में क्या-क्या सामने आया?

जांच एजेंसियों के अनुसार—

  • सिया और चेतन के बीच लंबे समय से संबंध थे।
  • शादी से बचने के लिए हत्या की साजिश रची गई।
  • 31 मई और 14 जून को भी हत्या की कोशिश की गई थी।
  • 18 जून को तीसरी कोशिश में वारदात को अंजाम दिया गया।
  • सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल कॉल रिकॉर्ड, डिलीट चैट और अन्य डिजिटल सबूत पुलिस के पास मौजूद हैं।
  • मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने का फैसला लिया गया है।

दोनों आरोपी फिलहाल पुलिस हिरासत में हैं और एक-दूसरे पर हत्या की साजिश रचने का आरोप लगा रहे हैं।

10 करोड़ के मानहानि नोटिस का पूरा मामला

मामले की सुनवाई के दौरान नया विवाद तब शुरू हुआ जब दो अलग-अलग वकीलों ने सिया गोयल का प्रतिनिधित्व करने का दावा किया।

एक ओर एडवोकेट आशुतोष श्रीवास्तव ने अदालत में वकालतनामा पेश कर कहा कि सिया ने स्वयं उन्हें अपना वकील नियुक्त किया है।

दूसरी ओर, सिया के भाई साहिल गोयल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि परिवार की ओर से एडवोकेट विपुल दुशिंग को अधिकृत किया गया है और आशुतोष श्रीवास्तव को कभी नियुक्त नहीं किया गया।

साहिल गोयल ने क्या आरोप लगाए?

साहिल गोयल ने दावा किया कि—

  • परिवार ने आशुतोष श्रीवास्तव को अधिकृत नहीं किया।
  • संभव है कि सिया के हस्ताक्षर धोखे से लिए गए हों।
  • परिवार को कथित रूप से धमकियां भी मिली हैं।
  • अदालत में विपुल दुशिंग ही अधिकृत वकील हैं।

आशुतोष श्रीवास्तव ने नोटिस में क्या कहा?

आशुतोष श्रीवास्तव ने इन आरोपों को पूरी तरह गलत बताते हुए साहिल गोयल को 10 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजा।

नोटिस में कहा गया है कि साहिल के सार्वजनिक बयानों से—

  • उनकी पेशेवर प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।
  • सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग हुई।
  • जान से मारने की धमकियां मिलीं।
  • क्लाइंट्स का विश्वास प्रभावित हुआ।

उन्होंने दावा किया कि सिया बालिग हैं और उन्होंने अपनी इच्छा से वकालतनामा पर हस्ताक्षर किए हैं।

मानहानि नोटिस में क्या-क्या मांग की गई?

नोटिस में निम्न मांगें की गई हैं—

  • सार्वजनिक बयान तुरंत वापस लिए जाएं।
  • 48 घंटे के भीतर बिना शर्त सार्वजनिक माफी मांगी जाए।
  • भविष्य में ऐसे बयान न देने का लिखित आश्वासन दिया जाए।
  • 7 दिनों के भीतर 10 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए।
  • जवाब न मिलने पर सिविल मुकदमा दायर किया जाएगा।

परिवार का क्या कहना है?

साहिल गोयल और उनके परिवार का कहना है कि उन्होंने अदालत में भी हलफनामा दाखिल किया है जिसमें स्पष्ट किया गया है कि आशुतोष श्रीवास्तव उनके वकील नहीं हैं।

परिवार का यह भी कहना है कि सिया जेल में है, इसलिए वकालतनामा की वैधता की जांच जरूरी है।

इससे पहले सिया की मां भी सार्वजनिक रूप से कह चुकी हैं कि यदि उनकी बेटी दोषी पाई जाती है तो उसे कानून के अनुसार कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

आगे जांच में किन सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं?

जांच एजेंसियां अभी कई महत्वपूर्ण पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं—

  • क्या हत्या केवल प्रेम प्रसंग की वजह से हुई?
  • क्या किसी और आर्थिक या पारिवारिक कारण की भी भूमिका थी?
  • केतन का पासपोर्ट फाड़ने और बाली ट्रिप रद्द कराने की घटना क्या साजिश का हिस्सा थी?
  • परिवार को सिया और चेतन के रिश्ते की जानकारी थी या नहीं?
  • डिजिटल सबूत और चैट्स से और क्या खुलासे होंगे?

फिलहाल केस की स्थिति

दोनों आरोपी पुलिस हिरासत में हैं और जांच जारी है।

सरकार ने मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाने का फैसला किया है। पुलिस जल्द ही चार्जशीट दाखिल कर सकती है। अदालत में आरोपी के कानूनी प्रतिनिधित्व को लेकर विवाद भी आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

निष्कर्ष

केतन अग्रवाल मर्डर केस पहले ही देश के सबसे चर्चित मामलों में शामिल हो चुका है। अब सिया गोयल के कथित वकील और उसके भाई के बीच शुरू हुई कानूनी लड़ाई ने मामले को नया मोड़ दे दिया है।

हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि हत्या के आरोपों का अंतिम फैसला अदालत द्वारा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा। फिलहाल पुलिस जांच जारी है और कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर जांच होना बाकी है।

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