Headlines

उत्तर-पूर्व में बाढ़ का कहर: असम और अरुणाचल में भारी बारिश से तबाही, हजारों लोग प्रभावित

उत्तर-पूर्व भारत के अरुणाचल और असम में भयावह बाढ़ और राहत कार्य से जुड़ा समाचार ग्राफिक - News Critic
Spread the love

लगातार बारिश ने उत्तर-पूर्व भारत को संकट में डाला

गुवाहाटी/ईटानगर। उत्तर-पूर्व भारत में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। असम और अरुणाचल प्रदेश में आई बाढ़, फ्लैश फ्लड और भूस्खलन के कारण हजारों लोग प्रभावित हुए हैं। कई गांवों का संपर्क टूट गया है, सड़कें और पुल बह गए हैं तथा रेल सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं।

राज्य आपदा प्रबंधन एजेंसियों के अनुसार, सबसे अधिक असर असम के धेमाजी जिले में देखा गया है, जहां हजारों लोग राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर हैं। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों के लिए भी भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।

असम में बाढ़ से हजारों लोग प्रभावित

असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के अनुसार, धेमाजी जिले के 69 गांव बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं। लगभग 16,000 से अधिक लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं, जबकि पूरे राज्य में प्रभावित लोगों की संख्या 22,000 से अधिक बताई जा रही है।

ब्रह्मपुत्र नदी और उसकी सहायक नदियों के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी से हालात और गंभीर होते जा रहे हैं। कई गांवों में घरों में पानी भर गया है और लोग सुरक्षित स्थानों पर जाने को मजबूर हैं।

रेलवे पुल क्षतिग्रस्त, ट्रेन सेवाएं बाधित

सिमेन नदी पर रेलवे ब्रिज को नुकसान

बाढ़ के तेज बहाव से धेमाजी जिले में सिमेन नदी पर स्थित रेलवे पुल का एक पियर क्षतिग्रस्त हो गया। नदी किनारे की मिट्टी बह जाने से पुल की संरचना कमजोर हो गई, जिसके बाद नॉर्थ ईस्ट फ्रंटियर रेलवे ने सुरक्षा के मद्देनज़र इस मार्ग पर रेल सेवाएं अस्थायी रूप से रोक दीं।

इसका असर यात्री ट्रेनों के साथ-साथ मालगाड़ियों की आवाजाही पर भी पड़ा है।

300 मीटर लंबा आयरन ब्रिज बहा

केमी नदी पर बना लगभग 300 मीटर लंबा आयरन ब्रिज बाढ़ के तेज बहाव में बह गया। इसके बाद केमी और ओयान क्षेत्रों का संपर्क पूरी तरह टूट गया।

इसके अलावा गोगामुख-घिलामोरा राजमार्ग के कई हिस्से जलमग्न हो गए हैं, जिससे सड़क परिवहन गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है।

अरुणाचल प्रदेश में फ्लैश फ्लड और भूस्खलन

अरुणाचल प्रदेश के कई जिलों में लगातार बारिश के कारण फ्लैश फ्लड और भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं।

यजाली, लोअर सुबनसिरी, कीयी पन्योर और आसपास के इलाकों में कई घर, सड़कें और वाहन पानी में बह गए। कुछ क्षेत्रों में लोगों के लापता होने की भी खबरें हैं।

राजधानी ईटानगर समेत कई इलाकों में बिजली और पेयजल आपूर्ति बाधित हो गई है। कई गांवों का जिला मुख्यालयों से संपर्क पूरी तरह कट गया है।

राहत और बचाव अभियान जारी

असम और अरुणाचल प्रदेश सरकारों ने राहत एवं बचाव कार्य तेज कर दिए हैं।

NDRF, SDRF, सेना और स्थानीय प्रशासन संयुक्त रूप से प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचा रहे हैं। कई इलाकों में हेलीकॉप्टर के जरिए खाद्य सामग्री और जरूरी दवाइयां पहुंचाई जा रही हैं।

प्रभावित लोगों के लिए राहत शिविर और चिकित्सा शिविर भी स्थापित किए गए हैं।

मौसम विभाग का रेड अलर्ट

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने उत्तर-पूर्व के कई जिलों में रेड अलर्ट जारी किया है। विभाग ने अगले 48 घंटों के दौरान भारी से अत्यधिक भारी बारिश की संभावना जताई है।

प्रशासन ने लोगों से नदी किनारे और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की है।

क्यों बढ़ रही हैं उत्तर-पूर्व में बाढ़ की घटनाएं?

विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर-पूर्व भारत में बाढ़ की घटनाओं के पीछे कई कारण हैं—

  • जलवायु परिवर्तन
  • अत्यधिक वर्षा
  • हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशील पारिस्थितिकी
  • अनियोजित विकास
  • जंगलों की कटाई
  • नदी तटबंधों की कमजोर स्थिति

विशेषज्ञ बेहतर नदी प्रबंधन, आधुनिक चेतावनी प्रणाली और पर्यावरण संरक्षण पर जोर दे रहे हैं।

स्थानीय लोगों की मुश्किलें बढ़ीं

बाढ़ प्रभावित इलाकों में हजारों परिवारों के घर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। खेत जलमग्न हैं, पशुधन का नुकसान हुआ है और स्कूल बंद कर दिए गए हैं।

राहत शिविरों में रहने वाले लोगों को भोजन, पीने का पानी और दवाइयों की जरूरत महसूस हो रही है। लगातार बारिश राहत कार्यों में भी चुनौती पैदा कर रही है।

निष्कर्ष

उत्तर-पूर्व भारत में भारी बारिश ने एक बार फिर प्राकृतिक आपदा की गंभीर तस्वीर सामने रख दी है। असम और अरुणाचल प्रदेश के कई जिलों में बाढ़ और भूस्खलन से जनजीवन प्रभावित है। राहत एजेंसियां लगातार बचाव कार्य में जुटी हैं, लेकिन मौसम विभाग की चेतावनी के अनुसार अगले कुछ दिन और चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। ऐसे में लोगों को प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए और सुरक्षित स्थानों पर रहना चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *