उद्धव ठाकरे का BJP पर बड़ा हमला: ‘बाबर जनता पार्टी’ कहा, 6 बागी सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोलते हुए उसे ‘बाबर जनता पार्टी’ बताया। उन्होंने अपनी पार्टी छोड़कर एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हुए 6 लोकसभा सांसदों की सदस्यता तत्काल रद्द करने की भी मांग की है।
परभणी और धाराशिव में आयोजित जनसभाओं के दौरान उद्धव ठाकरे ने BJP, राम मंदिर, हिंदुत्व और दल-बदल के मुद्दे पर कई बड़े बयान दिए। उनके इस हमले के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है।
उद्धव ठाकरे ने BJP को क्यों कहा ‘बाबर जनता पार्टी’?
परभणी की रैली में उद्धव ठाकरे ने कहा कि राम मंदिर करोड़ों हिंदुओं की आस्था का प्रतीक है और मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं की खबरों के बाद BJP हिंदुत्व की मूल भावना से भटक गई है।
उन्होंने कहा,
“बाबर ने राम मंदिर तोड़ा था। अब बाबर जनता पार्टी नए बने राम मंदिर को लूट रही है। दोनों में क्या फर्क है?”
हालांकि BJP ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए उद्धव ठाकरे के बयान की कड़ी आलोचना की है।
6 बागी सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग
उद्धव ठाकरे ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मांग की कि पार्टी छोड़कर शिंदे गुट में शामिल हुए छह सांसदों को दल-बदल कानून के तहत अयोग्य घोषित किया जाए।
उन्होंने कहा कि ये सांसद जनता के जनादेश के साथ विश्वासघात कर चुके हैं और यदि संविधान तथा कानून का पालन किया जाता है तो उनकी सदस्यता समाप्त होनी चाहिए।
शिंदे गुट में शामिल हुए 6 सांसद
- संजय (बंडू) जाधव
- ओमराजे निंबालकर
- संजय दीना पाटिल
- भाऊसाहेब वाकचौरे
- संजय उत्तमराव देशमुख
- नागेश पाटील आष्टीकर
इन नेताओं के जाने के बाद लोकसभा में शिवसेना (UBT) के सांसदों की संख्या घटकर 3 रह गई, जबकि शिंदे गुट की ताकत बढ़ गई है।
‘ऑपरेशन टाइगर’ नहीं, ‘ऑपरेशन देवेंद्र’
उद्धव ठाकरे ने बागी सांसदों के दल-बदल को ‘ऑपरेशन देवेंद्र’ बताया।
उन्होंने आरोप लगाया कि BJP अपने ही बड़े नेताओं को कमजोर कर रही है। इस दौरान उन्होंने मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का भी जिक्र किया।
उन्होंने दावा किया कि शिवसेना में टूट का उद्देश्य देवेंद्र फडणवीस की राजनीतिक स्थिति को कमजोर करना है।
हिंदुत्व और राम मंदिर पर क्या बोले उद्धव ठाकरे?
अपने भाषण में उद्धव ठाकरे ने कहा कि उनका हिंदुत्व राष्ट्रवाद पर आधारित है।
उन्होंने कहा कि उनका हिंदुत्व—
- देश को सर्वोपरि मानता है।
- सभी धर्मों का सम्मान करता है।
- युवाओं को रोजगार दिलाने की बात करता है।
- किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाने पर जोर देता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि BJP ने राम मंदिर के मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाया और अब हिंदुत्व की मूल भावना से दूर हो गई है।
महाराष्ट्र धर्म और मराठी अस्मिता का मुद्दा भी उठाया
धाराशिव की सभा में उद्धव ठाकरे ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र की पहचान और मराठी अस्मिता को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने कहा कि राज्य के महत्वपूर्ण उद्योग और परियोजनाओं को गुजरात भेजा जा रहा है, जिससे महाराष्ट्र के हित प्रभावित हो रहे हैं।
मतदाताओं से मांगी माफी
उद्धव ठाकरे ने उन मतदाताओं से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी जिन्होंने बागी सांसदों को शिवसेना और बालासाहेब ठाकरे के नाम पर वोट दिया था।
उन्होंने कहा कि जनता ने पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर भरोसा जताया था, लेकिन कुछ नेताओं ने व्यक्तिगत हितों के लिए पार्टी छोड़ दी।
BJP और शिंदे गुट का पलटवार
उद्धव ठाकरे के बयान के बाद BJP नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
मुंबई BJP अध्यक्ष अमित साटम ने कहा कि उद्धव ठाकरे अपनी पार्टी में हो रही टूट से परेशान हैं और बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं।
वहीं, शिंदे गुट का कहना है कि उनके साथ जुड़ने वाले नेता विकास की राजनीति के लिए आए हैं और जनता का समर्थन उन्हें लगातार मिल रहा है।
महाराष्ट्र की राजनीति पर क्या पड़ेगा असर?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि छह सांसदों के दल-बदल और उद्धव ठाकरे के आक्रामक तेवर आने वाले चुनावों से पहले महाराष्ट्र की राजनीति को नई दिशा दे सकते हैं।
यदि दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई होती है तो इसका असर लोकसभा की राजनीतिक तस्वीर पर भी पड़ सकता है। दूसरी ओर यदि कार्रवाई नहीं होती है तो यह मामला अदालत तक पहुंच सकता है।
निष्कर्ष
उद्धव ठाकरे का BJP पर ‘बाबर जनता पार्टी’ वाला बयान महाराष्ट्र की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर चुका है। इसके साथ ही छह बागी सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग ने इस राजनीतिक संघर्ष को और तेज कर दिया है।
अब सबकी नजर लोकसभा अध्यक्ष के संभावित फैसले और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर रहेगी। आने वाले दिनों में यह मुद्दा महाराष्ट्र ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी चर्चा का विषय बना रह सकता है।

