असम और अरुणाचल में बाढ़ का कहर: 2 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित, कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट
नई दिल्ली/गुवाहाटी, 1 जुलाई 2026। पूर्वोत्तर भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून ने एक बार फिर तबाही मचा दी है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण असम और अरुणाचल प्रदेश में बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति गंभीर हो गई है। सरकारी एजेंसियों और विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, दोनों राज्यों में मिलाकर करीब 2 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। कई गांव जलमग्न हैं, सड़क और रेल संपर्क बाधित हो गया है, जबकि राहत और बचाव कार्य लगातार जारी हैं।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने पूर्वोत्तर के कई राज्यों में अगले कुछ दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।
अरुणाचल प्रदेश में बाढ़ और भूस्खलन से भारी नुकसान
अरुणाचल प्रदेश के कई जिलों में लगातार बारिश के कारण नदियां उफान पर हैं। लोअर सियांग, लोअर सुबनसिरी और आसपास के क्षेत्रों में अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है।
नारी-कोयू क्षेत्र में लगभग 14 गांवों के 3,000 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। धान की फसल, सड़कें, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे को काफी नुकसान पहुंचा है। कई स्थानों का संपर्क मुख्यालय से टूट गया है।
राज्य सरकार ने राहत कार्य तेज कर दिए हैं। भारतीय वायुसेना (IAF) भी जरूरतमंद इलाकों में बचाव अभियान चला रही है।
प्रमुख असर
- 14 से अधिक गांव प्रभावित
- हजारों लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए
- कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त
- कृषि भूमि को भारी नुकसान
असम में बाढ़ की पहली बड़ी लहर
असम में इस मानसून की पहली बड़ी बाढ़ ने कई जिलों को अपनी चपेट में ले लिया है। धेमाजी, लखीमपुर, नलबाड़ी, डिब्रूगढ़, चिरांग और कोकराझार सबसे अधिक प्रभावित जिलों में शामिल हैं।
धेमाजी जिले में हालात सबसे ज्यादा गंभीर हैं, जहां हजारों लोग बाढ़ के पानी में फंसे हुए हैं।
बाढ़ से बड़ा नुकसान
- 22,000 से अधिक लोगों पर सीधा असर (कुछ रिपोर्टों में कुल प्रभावितों की संख्या करीब 2 लाख बताई गई है)
- 96 गांव जलमग्न
- लगभग 1,690 हेक्टेयर फसल बर्बाद
- करीब 48,000 पशुधन प्रभावित
ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
रेलवे सेवा भी प्रभावित
धेमाजी जिले में सिमेन नदी पर बने रेलवे पुल का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त होने के बाद रेल यातायात प्रभावित हुआ है।
इसके चलते मुरकोंगसेलेक और सिलापाथर के बीच ट्रेन सेवाओं को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। रेलवे विभाग मरम्मत कार्य में जुटा हुआ है।
राहत और बचाव अभियान जारी
राज्य सरकार, NDRF, SDRF और स्थानीय प्रशासन मिलकर राहत कार्य चला रहे हैं।
प्रभावित क्षेत्रों में—
- राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं।
- भोजन और पीने का पानी उपलब्ध कराया जा रहा है।
- दवाइयों की आपूर्ति की जा रही है।
- पशुओं के लिए चारा पहुंचाया जा रहा है।
केंद्र सरकार ने भी प्रभावित राज्यों को हर संभव सहायता देने का भरोसा दिया है।
IMD का अलर्ट: कई राज्यों में भारी बारिश की चेतावन
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार अगले कुछ दिनों तक पूर्वोत्तर भारत में बारिश का सिलसिला जारी रहेगा।
भारी बारिश का अलर्ट इन राज्यों में
- असम
- अरुणाचल प्रदेश
- मेघालय
- नागालैंड
- मणिपुर
- मिजोरम
- त्रिपुरा
- सिक्किम
- सब-हिमालयन पश्चिम बंगाल
इसके अलावा उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में भी अगले कुछ दिनों तक तेज बारिश और तेज हवाओं की संभावना जताई गई है।
बार-बार क्यों आती है पूर्वोत्तर में बाढ़?
विशेषज्ञों के अनुसार पूर्वोत्तर भारत की भौगोलिक स्थिति इसे बाढ़ के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बनाती है।
मुख्य कारण हैं—
1. ब्रह्मपुत्र नदी का विशाल बेसिन
हिमालय से आने वाली नदियों में अचानक जलस्तर बढ़ जाता है।
2. अत्यधिक वर्षा
मानसून के दौरान कम समय में बहुत अधिक बारिश होती है।
3. भूस्खलन
पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश से मिट्टी खिसकने की घटनाएं बढ़ जाती हैं।
4. जलवायु परिवर्तन
विशेषज्ञ मानते हैं कि क्लाइमेट चेंज के कारण अत्यधिक बारिश और फ्लैश फ्लड की घटनाओं में तेजी आई है।
लोगों के लिए प्रशासन की सलाह
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे—
- नदी और नालों के पास न जाएं।
- स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।
- मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर रखें।
- जरूरत पड़ने पर तुरंत राहत शिविरों में पहुंचें।
- अफवाहों से बचें और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें।
आगे क्या?
मौसम विभाग के अनुसार जुलाई के शुरुआती दिनों में पूर्वोत्तर राज्यों में बारिश का दौर जारी रह सकता है। यदि वर्षा इसी तरह बनी रही तो कई निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ऐसी आपदाओं से बचने के लिए नदी प्रबंधन, बेहतर जल निकासी व्यवस्था, वन संरक्षण और जलवायु अनुकूल बुनियादी ढांचे पर विशेष ध्यान देना होगा।

