अमेरिका में जन्मसिद्ध नागरिकता पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, ट्रंप के आदेश को बड़ा झटका
वाशिंगटन | 1 जुलाई 2026
अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने जन्मसिद्ध नागरिकता (Birthright Citizenship) को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस कार्यकारी आदेश (Executive Order) को असंवैधानिक ठहरा दिया, जिसके जरिए जन्म के आधार पर मिलने वाली अमेरिकी नागरिकता को सीमित करने की कोशिश की गई थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन (14th Amendment) के तहत अमेरिका में जन्म लेने वाले लगभग सभी बच्चों को जन्म से नागरिकता का अधिकार प्राप्त है।
इस फैसले को अमेरिकी संविधान की मूल भावना और नागरिक अधिकारों की बड़ी जीत माना जा रहा है। वहीं ट्रंप प्रशासन के लिए यह एक बड़ा राजनीतिक और कानूनी झटका भी है।
क्या था ट्रंप का कार्यकारी आदेश?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जनवरी 2025 में पदभार संभालने के बाद Executive Order 14160 पर हस्ताक्षर किए थे। इस आदेश का उद्देश्य उन बच्चों को जन्मसिद्ध नागरिकता से वंचित करना था जिनके माता-पिता अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे हैं या अस्थायी वीजा (स्टूडेंट, टूरिस्ट या वर्क वीजा) पर मौजूद हैं।
ट्रंप का तर्क था कि अमेरिकी संविधान का 14वां संशोधन ऐसे मामलों में लागू नहीं होता और मौजूदा व्यवस्था अवैध प्रवासन को बढ़ावा देती है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया?
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि राष्ट्रपति किसी कार्यकारी आदेश के जरिए संविधान की व्याख्या नहीं बदल सकते।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों पर 14वां संशोधन लागू होता है और उन्हें जन्म से नागरिकता प्राप्त होगी, चाहे उनके माता-पिता की आव्रजन स्थिति कुछ भी हो।
अदालत ने अपने फैसले में वर्ष 1898 के ऐतिहासिक United States v. Wong Kim Ark मामले का भी हवाला दिया, जिसमें जन्मसिद्ध नागरिकता के सिद्धांत को संवैधानिक मान्यता दी गई थी।
14वें संशोधन का क्या महत्व है?
अमेरिकी संविधान का 14वां संशोधन वर्ष 1868 में लागू किया गया था। इसका उद्देश्य गृहयुद्ध के बाद सभी लोगों को समान नागरिक अधिकार प्रदान करना था।
इस संशोधन के अनुसार—
अमेरिका में जन्म लेने वाला प्रत्येक व्यक्ति, जो देश के अधिकार क्षेत्र के अधीन है, अमेरिकी नागरिक माना जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि यह प्रावधान केवल कुछ विशेष परिस्थितियों, जैसे विदेशी राजनयिकों के बच्चों, पर लागू नहीं होता।
ट्रंप प्रशासन की दलील क्या थी?
ट्रंप लंबे समय से जन्मसिद्ध नागरिकता का विरोध करते रहे हैं।
उनका कहना था कि—
- मौजूदा कानून अवैध प्रवासन को बढ़ावा देता है।
- कई लोग केवल बच्चे को अमेरिकी नागरिक बनाने के उद्देश्य से अमेरिका आते हैं।
- संविधान के “Subject to the Jurisdiction” शब्दों की नई व्याख्या की जानी चाहिए।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी दलीलों को स्वीकार नहीं किया।
किन संगठनों ने किया था विरोध?
ट्रंप के आदेश के खिलाफ कई मानवाधिकार और नागरिक अधिकार संगठनों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया।
इनमें प्रमुख रूप से शामिल थे—
- ACLU
- NAACP Legal Defense Fund
- Asian Law Caucus
इन संगठनों का कहना था कि राष्ट्रपति संवैधानिक अधिकारों को कार्यकारी आदेश के जरिए समाप्त नहीं कर सकते।
फैसले के बाद क्या रही राजनीतिक प्रतिक्रिया?
ट्रंप की प्रतिक्रिया
डोनाल्ड ट्रंप ने फैसले पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यह निर्णय अमेरिका की आव्रजन नीति को कमजोर करेगा। उन्होंने संकेत दिए कि भविष्य में कांग्रेस के जरिए कानून लाने की कोशिश की जाएगी।
डेमोक्रेट्स की प्रतिक्रिया
डेमोक्रेटिक नेताओं और प्रवासी अधिकार संगठनों ने फैसले का स्वागत किया और इसे संविधान तथा लोकतांत्रिक मूल्यों की जीत बताया।
रिपब्लिकन नेताओं का रुख
कई रिपब्लिकन सांसदों ने कहा कि जन्मसिद्ध नागरिकता की मौजूदा व्यवस्था अवैध प्रवासन को बढ़ावा देती है और इसमें बदलाव जरूरी है।
फैसले का अमेरिका पर क्या असर पड़ेगा?
इस फैसले के कई बड़े प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।
प्रमुख प्रभाव
- जन्मसिद्ध नागरिकता की संवैधानिक सुरक्षा बरकरार रहेगी।
- ट्रंप प्रशासन की सख्त आव्रजन नीति को झटका लगा है।
- राष्ट्रपति की कार्यकारी शक्तियों की सीमा स्पष्ट हुई।
- भविष्य में इस विषय पर कांग्रेस में नई बहस हो सकती है।
- लाखों प्रवासी परिवारों को राहत मिली है।
विवाद अभी खत्म क्यों नहीं हुआ?
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट फैसला दे दिया है, लेकिन राजनीतिक विवाद अभी भी जारी है।
रिपब्लिकन सांसद इस विषय पर नया कानून लाने की तैयारी कर रहे हैं। वहीं आव्रजन नीति 2026 के चुनावी मुद्दों में भी प्रमुख स्थान ले सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इस विषय पर नई कानूनी और राजनीतिक बहस देखने को मिल सकती है।
निष्कर्ष
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला संविधान, नागरिक अधिकारों और न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि राष्ट्रपति केवल कार्यकारी आदेश के जरिए संविधान की मूल भावना को नहीं बदल सकते।
हालांकि जन्मसिद्ध नागरिकता पर कानूनी स्थिति फिलहाल स्पष्ट हो गई है, लेकिन अमेरिका की आव्रजन राजनीति में यह मुद्दा आगे भी चर्चा का केंद्र बना रहेगा।

