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ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई का अंतिम संस्कार: भारत समेत दुनिया भर से प्रतिनिधि पहुंचे, लाखों श्रद्धालु उमड़े

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की तस्वीर, न्यूज क्रिटिक (News Critic) ग्राफिक्स के साथ।
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तेहरान में शुरू हुआ सात दिवसीय राजकीय अंतिम संस्कार

तेहरान, 4 जुलाई 2026। ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई के सम्मान में शनिवार से सात दिवसीय राजकीय अंतिम संस्कार समारोह शुरू हो गया। राजधानी तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला परिसर में आयोजित इस समारोह में भारत सहित कई देशों के प्रतिनिधिमंडल शामिल हुए। बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने नेता को अंतिम श्रद्धांजलि देने पहुंचे, जबकि पूरे शहर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।

यह समारोह ऐसे समय हो रहा है जब क्षेत्र में हालिया संघर्ष के बाद ईरान युद्धविराम की स्थिति में है। सरकार इसे राष्ट्रीय एकता और स्थिरता का प्रतीक बता रही है।

अली खामेनेई की मृत्यु के बाद पहली बड़ी सार्वजनिक श्रद्धांजलि

ईरानी अधिकारियों के अनुसार, अली खामेनेई का निधन फरवरी 2026 में हुए एक हवाई हमले के दौरान हुआ था। उस समय क्षेत्रीय संघर्ष के कारण अंतिम संस्कार टाल दिया गया था। अब हालात सामान्य होने के बाद सरकार ने सात दिनों तक चलने वाले राजकीय कार्यक्रम का आयोजन किया है।

समारोह में खामेनेई के परिवार के सदस्यों को भी श्रद्धांजलि दी जा रही है। देशभर से लोग अंतिम दर्शन के लिए तेहरान पहुंच रहे हैं।

अंतिम संस्कार का पूरा कार्यक्रम

4 और 5 जुलाई

  • तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला में अंतिम दर्शन।
  • आम नागरिकों के लिए पार्थिव शरीर रखा गया।

6 जुलाई

  • तेहरान में विशाल अंतिम यात्रा निकाली जाएगी।

7 जुलाई

  • पवित्र शहर क़ोम में धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होंगे।

8 जुलाई

  • इराक के नजफ और करबला में विशेष धार्मिक रस्में होंगी।

9 जुलाई

  • मशहद स्थित इमाम रज़ा दरगाह में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।

सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम

ईरानी प्रशासन ने समारोह के दौरान व्यापक सुरक्षा व्यवस्था लागू की है। राजधानी तेहरान में बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है। लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए यातायात, स्वास्थ्य सेवाओं और सार्वजनिक सुविधाओं को भी मजबूत किया गया है।

सरकार ने देश-विदेश से आने वाले लोगों के लिए अस्थायी आवास, भोजन और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था भी की है।

भारत का प्रतिनिधिमंडल भी हुआ शामिल

भारत की ओर से उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल इस समारोह में शामिल हुआ। इसमें विदेश राज्य मंत्री पाबित्रा मार्गरिटा और बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन प्रमुख रूप से मौजूद हैं।

इसके अलावा कई राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों की मौजूदगी ने भारत-ईरान के लंबे समय से चले आ रहे कूटनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों को भी रेखांकित किया।

कई देशों के वरिष्ठ नेता पहुंचे

अंतिम संस्कार समारोह में एशिया, मध्य एशिया और पश्चिम एशिया के कई देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। पाकिस्तान, रूस, चीन, तुर्की, ताजिकिस्तान, आर्मेनिया और बांग्लादेश सहित अनेक देशों ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों या प्रतिनिधिमंडलों को भेजा।

विश्लेषकों का मानना है कि इतनी बड़ी अंतरराष्ट्रीय भागीदारी ईरान की क्षेत्रीय और कूटनीतिक भूमिका को दर्शाती है।

ईरान के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह अंतिम संस्कार?

यह समारोह केवल एक राजकीय विदाई नहीं बल्कि ईरान की राजनीतिक और सामाजिक एकजुटता का प्रदर्शन भी माना जा रहा है। हालिया संघर्ष के बाद सरकार इसे राष्ट्रीय मनोबल मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने संदेश को स्पष्ट करने का अवसर मान रही है।

साथ ही, ईरान की भविष्य की राजनीतिक दिशा और क्षेत्रीय कूटनीति पर भी दुनिया की नजर बनी हुई है।

भारत-ईरान संबंधों पर क्या पड़ेगा असर?

भारत और ईरान के बीच ऊर्जा, व्यापार और रणनीतिक सहयोग लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है। विशेष रूप से चाबहार बंदरगाह परियोजना दोनों देशों के रिश्तों की अहम कड़ी मानी जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी भविष्य में द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूती दे सकती है।

निष्कर्ष

अली खामेनेई का अंतिम संस्कार केवल ईरान के लिए भावनात्मक अवसर नहीं बल्कि वैश्विक कूटनीति और क्षेत्रीय राजनीति की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सात दिनों तक चलने वाले इस राजकीय समारोह पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।

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