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हमारे शिक्षक ऐप में लिपिकों की ई-अटेंडेंस पर सवाल, 5-डे वीक के बावजूद शनिवार दिखा रहा कार्य दिवस

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मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पदस्थ लिपिक (क्लर्क) संवर्ग के कर्मचारियों की ‘हमारे शिक्षक’ ऐप के माध्यम से ई-अटेंडेंस दर्ज कराने की नई व्यवस्था विवादों में आ गई है। कर्मचारियों का आरोप है कि ऐप शिक्षकों की कार्यप्रणाली को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है, जबकि लिपिकों की सेवा शर्तें, कार्य दिवस और अवकाश नियम अलग हैं। ऐसे में वर्तमान व्यवस्था से भविष्य में उपस्थिति और सेवा रिकॉर्ड से जुड़ी प्रशासनिक विसंगतियां उत्पन्न हो सकती हैं।

फाइव डे वीक का आदेश:

1 जुलाई से लागू हुई ई-अटेंडेंस व्यवस्था

आयुक्त लोक शिक्षण के निर्देशानुसार 1 जुलाई 2026 से स्कूलों में कार्यरत लिपिकों की उपस्थिति भी ‘हमारे शिक्षक’ ऐप के माध्यम से दर्ज की जा रही है। इस फैसले का उद्देश्य उपस्थिति प्रक्रिया को डिजिटल बनाना है, लेकिन तकनीकी खामियों को लेकर कर्मचारियों ने चिंता जताई है।

फाइव डे वीक का आदेश:

5-डे वीक के बावजूद शनिवार कार्य दिवस दिखा रहा ऐप

सामान्य प्रशासन विभाग के 20 दिसंबर 2022 के आदेश के अनुसार प्रदेश के कार्यालयों में फाइव-डे वीक लागू है। इसके तहत लिपिक संवर्ग के कर्मचारियों के लिए शनिवार और रविवार अवकाश निर्धारित है।

हालांकि कर्मचारियों का कहना है कि स्कूलों, संकुल केंद्रों, हाई स्कूल और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत लिपिकों के लिए ऐप शनिवार को कार्य दिवस दिखा रहा है, जबकि जिला शिक्षा कार्यालय, विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय और लोक शिक्षण संचालनालय में पदस्थ कर्मचारियों के लिए शनिवार अवकाश दर्शाया गया है।

शिक्षा विभाग के समस्त अमले के लिए ई अटेंडेंस का आदेश:

शिक्षकों और लिपिकों के अवकाश नियम अलग

शिक्षकों को मिलते हैं विशेष अवकाश

शिक्षकों को ग्रीष्मकालीन, शीतकालीन और दीपावली अवकाश का लाभ मिलता है।

लिपिक नियमित रूप से करते हैं कार्य

लिपिक संवर्ग के कर्मचारी इन अवकाशों के दौरान भी नियमित कार्यालयीन कार्य करते हैं। कर्मचारियों का कहना है कि यदि ऐप में संशोधन नहीं किया गया तो सिस्टम गलत तरीके से अवकाश दर्ज कर सकता है, जिससे सेवा पुस्तिका और उपस्थिति रिकॉर्ड प्रभावित हो सकते हैं।

कर्मचारियों ने क्या मांग रखी?

लिपिक संवर्ग ने सरकार और लोक शिक्षण विभाग से मांग की है कि:

  • ‘हमारे शिक्षक’ ऐप में तकनीकी संशोधन किया जाए।
  • कार्य दिवस और अवकाश नियम लिपिक संवर्ग के अनुसार अपडेट किए जाएं।
  • संशोधन होने तक स्कूलों में कार्यरत लिपिकों को ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता से छूट दी जाए।
  • भविष्य में सेवा रिकॉर्ड संबंधी विवादों से बचने के लिए अलग व्यवस्था लागू की जाए।

क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?

यदि ऐप में तकनीकी सुधार नहीं किया गया तो कर्मचारियों की उपस्थिति, अवकाश, वेतन और सेवा अभिलेखों में त्रुटियां हो सकती हैं। इससे भविष्य में प्रशासनिक विवाद और कर्मचारियों की सेवा संबंधी समस्याएं बढ़ने की आशंका है।

निष्कर्ष

‘हमारे शिक्षक’ ऐप के जरिए ई-अटेंडेंस लागू करने का उद्देश्य डिजिटल प्रशासन को बढ़ावा देना है, लेकिन कर्मचारियों का कहना है कि इसे सभी संवर्गों की सेवा शर्तों के अनुरूप बनाया जाना जरूरी है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि लोक शिक्षण विभाग इन आपत्तियों पर क्या निर्णय लेता है।

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