छत्तीसगढ़ नकटी विस्थापन विवाद: मुआवजे और पुनर्वास की मांग को लेकर CM हाउस का घेराव, कांग्रेस ने दिया 5 दिन का अल्टीमेटम
रायपुर में नकटी गांव की कार्रवाई ने बढ़ाया सियासी तापमान
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के माना क्षेत्र स्थित नकटी गांव (सम्मानपुर) में प्रशासन की बुलडोजर कार्रवाई के बाद विस्थापन का मामला अब बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है। अपने घर टूटने से प्रभावित ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री आवास (CM हाउस) का घेराव कर उचित मुआवजा, स्थानीय स्तर पर पुनर्वास और दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग की। इस आंदोलन को कांग्रेस का समर्थन मिला है, जिसने राज्य सरकार को 5 दिन का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है कि मांगें पूरी नहीं होने पर राज्यव्यापी आंदोलन किया जाएगा।
क्या है नकटी विस्थापन विवाद?
प्रशासन ने 29 जून 2026 को रायपुर के माना क्षेत्र स्थित नकटी गांव में लगभग 15 हेक्टेयर सरकारी भूमि पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की। प्रशासन के अनुसार यह भूमि हाउसिंग बोर्ड और प्रस्तावित विधायक आवास परियोजना के लिए आरक्षित थी।
इस कार्रवाई के दौरान करीब 80 से 85 मकानों को हटाया गया। इनमें कुछ ऐसे मकान भी शामिल बताए जा रहे हैं जो प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) और इंदिरा आवास योजना के तहत बने थे। प्रभावित परिवारों का आरोप है कि उन्हें पर्याप्त समय नहीं दिया गया और बरसात के मौसम में कार्रवाई होने से वे बेघर हो गए।
विस्थापित परिवारों की मुख्य मांगें
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने सरकार के सामने कई प्रमुख मांगें रखी हैं।
1. उचित मुआवजा
टूटे हुए मकानों और हुए आर्थिक नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाए।
2. मूल गांव में पुनर्वास
ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें नकटी गांव में ही बसाया जाए, ताकि उनका रोजगार और सामाजिक जीवन प्रभावित न हो।
3. EWS फ्लैटों पर आपत्ति
सरकार द्वारा नवा रायपुर सेक्टर-30 में दिए जा रहे EWS फ्लैटों को कई परिवारों ने अस्वीकार किया है। उनका कहना है कि फ्लैट छोटे हैं, बुजुर्गों के लिए सुविधाजनक नहीं हैं और वहां रोजगार के अवसर भी सीमित हैं।
4. FIR वापस लेने की मांग
प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन के दौरान दर्ज किए गए मामलों को वापस लेने की मांग भी उठाई है।
CM हाउस के बाहर प्रदर्शन
4 जुलाई को बड़ी संख्या में विस्थापित परिवार कांग्रेस नेताओं के साथ मुख्यमंत्री आवास पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर धरना दिया और वहीं भोजन कर विरोध दर्ज कराया। सुरक्षा व्यवस्था के तहत भारी पुलिस बल तैनात रहा।
इससे पहले प्रभावित परिवार कलेक्ट्रेट में भी प्रदर्शन कर चुके थे। प्रशासन की ओर से वार्ता का आश्वासन दिया गया, लेकिन समाधान नहीं निकलने पर आंदोलन तेज हो गया।
कांग्रेस का सरकार पर हमला
कांग्रेस ने इस कार्रवाई को गरीब विरोधी बताते हुए आरोप लगाया कि गरीबों के घर तोड़कर VIP कॉलोनी बनाई जा रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज और अन्य नेताओं ने प्रभावित परिवारों से मुलाकात की। कांग्रेस ने सरकार को 5 दिन का अल्टीमेटम दिया है। पार्टी का कहना है कि यदि इस अवधि में समाधान नहीं निकला तो राज्यपाल से शिकायत की जाएगी और पूरे प्रदेश में आंदोलन किया जाएगा।
कुछ कांग्रेस विधायकों ने प्रस्तावित विधायक कॉलोनी में रहने से भी इनकार किया है।
सरकार और प्रशासन का पक्ष
प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है। अधिकारियों के अनुसार संबंधित भूमि सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है और अतिक्रमण हटाने से पहले नोटिस जारी किए गए थे।
सरकार का दावा है कि प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए नवा रायपुर सेक्टर-30 में EWS फ्लैट उपलब्ध कराए जा रहे हैं। साथ ही सामान की सुरक्षा और परिवहन की व्यवस्था भी की गई है।
सरकार ने यह भी भरोसा दिलाया है कि किसी भी प्रभावित परिवार को बेघर नहीं रहने दिया जाएगा।
विवाद क्यों बना बड़ा मुद्दा?
यह मामला केवल अतिक्रमण हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि विकास और पुनर्वास के बीच संतुलन की बहस भी बन गया है।
ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि यदि जमीन सरकारी थी, तो उसी स्थान पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकानों का निर्माण कैसे हुआ। वहीं विपक्ष सरकार की कार्रवाई को मानवीय संवेदनाओं की अनदेखी बता रहा है।
बरसात के मौसम में विस्थापन के कारण बच्चों की पढ़ाई, रोजगार और स्वास्थ्य पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
आगे क्या होगा?
अब सभी की नजर सरकार की अगली कार्रवाई पर है। यदि मुआवजा, पुनर्वास और अन्य मांगों पर सहमति बनती है तो विवाद शांत हो सकता है। लेकिन यदि समाधान नहीं निकला तो आंदोलन राज्यव्यापी रूप ले सकता है।
नकटी गांव का यह मामला आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ की राजनीति और विकास परियोजनाओं दोनों पर असर डाल सकता है।

