अमेरिका-सऊदी के इराक में हवाई हमले, PMF के 8 लड़ाके मारे गए, जवाब में ईरान ने दागीं बैलिस्टिक मिसाइलें
मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका और सऊदी अरब की ओर से इराक में ईरान समर्थित पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज (PMF) के ठिकानों पर किए गए हवाई हमलों के बाद हालात तेजी से बिगड़ गए हैं। इन हमलों में PMF के कम से कम आठ लड़ाकों के मारे जाने की खबर है। इसके जवाब में ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइलें दागते हुए कड़ा प्रतिरोध दर्ज कराया है। इस घटनाक्रम के बाद पूरे क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात बनने की आशंका जताई जा रही है।
अमेरिका, सऊदी अरब, ईरान और इराक के बीच बढ़ते इस टकराव पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों पक्षों के बीच तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर न केवल मध्य पूर्व बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।
इराक में PMF के ठिकानों पर हुआ हवाई हमला
जानकारी के अनुसार अमेरिका और सऊदी अरब की संयुक्त सैन्य कार्रवाई में इराक के उन इलाकों को निशाना बनाया गया जहां ईरान समर्थित पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज (PMF) की मौजूदगी बताई जा रही थी। हवाई हमलों में कई सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचा और कम से कम आठ लड़ाकों की मौत हो गई। इसके अलावा कई अन्य लड़ाकों के घायल होने की भी खबर सामने आई है।
PMF इराक की एक प्रभावशाली अर्धसैनिक संस्था है, जिसमें कई ईरान समर्थित गुट शामिल हैं। इन संगठनों पर पहले भी अमेरिकी ठिकानों और सहयोगी देशों के हितों को निशाना बनाने के आरोप लगते रहे हैं।
आखिर क्या है पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज (PMF)?
पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज यानी PMF की स्थापना वर्ष 2014 में इस्लामिक स्टेट (ISIS) के खिलाफ लड़ाई के दौरान की गई थी। समय के साथ यह संगठन इराक की सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा बन गया, लेकिन इसके कई गुटों पर ईरान के प्रभाव में काम करने के आरोप लगते रहे हैं।
अमेरिका लंबे समय से दावा करता रहा है कि PMF के कुछ धड़े ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के साथ मिलकर क्षेत्र में अमेरिकी हितों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं। यही वजह है कि इन संगठनों को कई बार अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का सामना करना पड़ा है।
ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइलों से दिया जवाब
हवाई हमलों के कुछ ही समय बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। रिपोर्टों के मुताबिक मिसाइलों का लक्ष्य उन सैन्य ठिकानों को बनाया गया जिन्हें अमेरिका और उसके सहयोगी देशों से जुड़ा माना जाता है।
हालांकि मिसाइल हमलों से हुए नुकसान का पूरा विवरण अभी सामने नहीं आया है, लेकिन इस कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ईरान इस हमले को बिना जवाब छोड़े नहीं देखना चाहता। क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
अमेरिका और सऊदी अरब का क्या कहना है?
अमेरिका की ओर से कहा गया है कि यह कार्रवाई आत्मरक्षा और क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि PMF के कुछ गुट लगातार अमेरिकी सैनिकों और सहयोगी देशों के ठिकानों को निशाना बनाने की योजना बना रहे थे।
सऊदी अरब ने भी क्षेत्र में बढ़ते खतरे का हवाला देते हुए आतंकवादी गतिविधियों और ईरान समर्थित संगठनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया है। हालांकि दोनों देशों ने यह भी कहा है कि उनका उद्देश्य व्यापक युद्ध नहीं बल्कि सुरक्षा खतरों को रोकना है।
ईरान ने हमले को बताया आक्रामक कदम
ईरान ने अमेरिका और सऊदी अरब की संयुक्त कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि यह हमला क्षेत्र की संप्रभुता का उल्लंघन है और इसका जवाब देना उनका अधिकार है।
ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि उसके सहयोगी संगठनों या उसके हितों पर आगे भी हमला किया गया तो जवाब और अधिक कड़ा होगा। इससे पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
इराक की मुश्किलें और बढ़ीं
इराक पहले से ही राजनीतिक और सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे समय में विदेशी सैन्य कार्रवाई और जवाबी मिसाइल हमलों ने उसकी स्थिति को और जटिल बना दिया है।
इराकी सरकार ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। सरकार का कहना है कि देश की जमीन को किसी भी क्षेत्रीय संघर्ष का मैदान नहीं बनने दिया जाएगा।
वैश्विक बाजार पर पड़ सकता है असर
मध्य पूर्व दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक क्षेत्रों में शामिल है। ऐसे में अमेरिका, ईरान और सऊदी अरब के बीच बढ़ता तनाव अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार को प्रभावित कर सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है। इसका असर भारत समेत कई देशों की अर्थव्यवस्था और महंगाई पर भी पड़ सकता है।
संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता
संयुक्त राष्ट्र समेत कई देशों ने इस घटनाक्रम पर चिंता व्यक्त की है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है।
कई देशों का मानना है कि यदि तनाव को जल्द नियंत्रित नहीं किया गया तो इसका असर पूरे पश्चिम एशिया की स्थिरता पर पड़ सकता है।
क्या बढ़ सकता है बड़ा सैन्य संघर्ष?
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान स्थिति बेहद संवेदनशील है। यदि अमेरिका और ईरान के बीच जवाबी कार्रवाई का सिलसिला जारी रहा तो यह सीमित संघर्ष बड़े क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है।
हालांकि कूटनीतिक प्रयास भी लगातार जारी हैं और कई देश दोनों पक्षों के बीच तनाव कम कराने की कोशिश कर रहे हैं। आने वाले दिनों में दोनों देशों की रणनीति इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करेगी।
निष्कर्ष
इराक में अमेरिका और सऊदी अरब के हवाई हमलों तथा उसके जवाब में ईरान द्वारा बैलिस्टिक मिसाइलें दागे जाने की घटना ने पूरे मध्य पूर्व को एक बार फिर अस्थिरता के दौर में पहुंचा दिया है। PMF के लड़ाकों की मौत के बाद क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं और वैश्विक समुदाय स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। यदि आने वाले दिनों में कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं हुए तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

