वक्फ संशोधन बिल लोकसभा में पारित होने के बाद विभिन्न पार्टियों के नेताओं ने दी प्रतिक्रिया
कल बुधवार 2 अप्रैल 2025 को लोकसभा में लम्बी चर्चा के बाद वक्फ संशोधन बिल 2024 पारित हो गया। लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल के समर्थन में 288 वोट पड़े और विरोध में 232 वोट पड़े। वोटिंग के बाद इस बिल को लोकसभा में पारित कर दिया गया। अब यह विधेयक राज्यसभा में विचाराधीन है।
वक्फ संशोधन विधेयक के लोकसभा में पारित होने के बाद विभिन्न राजनितिक दलों के नेताओं ने अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं।
विपक्षी दलों की प्रतिक्रियाएं
कांग्रेस – कांग्रेस नेता राहुल गाँधी ने इस विधेयक को मुसलमानों को हाशिये पर लाने और उनके व्यक्तिगत कानूनों तथा सम्पत्ति अधिकारों को छीनने का हथियार बताया। उन्होंने इसे संविधान पर हमला करार दिया।
एआईएमआईएम – सांसद असदुद्दीन औवेसी ने विधेयक का विरोध करते हुए इसे असंवैधानिक बताया और विरोध स्वरुप लोकसभा में विधेयक की प्रति फाड़ दी।
समाजवादी पार्टी – समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि यह विधेयक ध्रुवीकरण के उद्देश्य से लाया गया है और भारत की धर्मनिरक्षेप छवि को नुकसान पहुंचाएगा।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी – पार्टी ने विधेयक का विरोध किया और पुष्टि की कि उनके सांसद इसके खिलाफ मतदान करेंगे।
सरकार और समर्थक दलों की प्रतिक्रियाएं
भारतीय जनता पार्टी – गृहमंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि विधेयक का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता लाना है।
जनता दल (यूनाइटेड) – जदयू सांसद राजीव रंजन सिंह उर्फ़ ललन सिंह ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य वक्फ बोर्ड प्रबंधन में पारदर्शिता लाना है और किसी विशेष धर्म के खिलाफ नहीं है।
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) – इस दल ने भी विधेयक का समर्थन किया।
इन सभी प्रतिक्रियाओं से स्पष्ट है कि वक्फ संशोधन विधेयक पर राजनितिक दलों के बीच तीव्र मतभेद है। विपक्षी दल इसे अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर हमला मानते हैं, जबकि सरकार और उसके समर्थक दल इसे पारदर्शिता और सुधार की दिशा में उठाया गया कदम बताते हैं।

