भारत का रक्षा निर्यात ₹38,424 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर, 80 से अधिक देशों को हथियार और रक्षा उपकरण भेज रहा भारत
भारत ने रक्षा निर्यात में बनाया नया रिकॉर्ड
नई दिल्ली। भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश का रक्षा निर्यात बढ़कर ₹38,424 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। यह पिछले वित्त वर्ष 2024-25 के ₹23,622 करोड़ की तुलना में 62.66% अधिक है। यह उपलब्धि भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता, आत्मनिर्भरता और वैश्विक बाजार में बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाती है।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, भारत अब 80 से अधिक देशों को हथियार, मिसाइल सिस्टम, ड्रोन, रडार, गोला-बारूद और अन्य रक्षा उपकरण निर्यात कर रहा है।
DPSU और निजी कंपनियों ने मिलकर बढ़ाया निर्यात
रक्षा निर्यात में इस बार सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
सार्वजनिक क्षेत्र का प्रदर्शन
- DPSUs का कुल निर्यात: ₹21,071 करोड़
- पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 151% की वृद्धि
- कुल निर्यात में लगभग 54.84% योगदान
निजी क्षेत्र की भागीदारी
- निजी कंपनियों का निर्यात: ₹17,353 करोड़
- लगभग 14% की वार्षिक वृद्धि
- रक्षा निर्यात करने वाली कंपनियों की संख्या 128 से बढ़कर 145 हुई।
12 वर्षों में 55 गुना से अधिक बढ़ा भारत का रक्षा निर्यात
भारत का रक्षा निर्यात वर्ष 2013-14 में केवल ₹686 करोड़ था। अब यह बढ़कर ₹38,424 करोड़ पहुंच गया है। यानी पिछले 12 वर्षों में इसमें लगभग 55 गुना वृद्धि दर्ज की गई है।
सरकार की आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया, आसान लाइसेंसिंग, निर्यात प्रक्रियाओं में सुधार और निजी निवेश को बढ़ावा देने वाली नीतियों ने इस उपलब्धि में अहम भूमिका निभाई।
किन देशों को निर्यात हो रहे हैं भारतीय रक्षा उपकरण?
भारत वर्तमान में 80 से अधिक देशों को रक्षा उत्पाद भेज रहा है।
प्रमुख निर्यात गंतव्यों में शामिल हैं—
- अमेरिका
- फ्रांस
- आर्मेनिया
- फिलीपींस
- इंडोनेशिया
- श्रीलंका
- मिस्र
- इजराइल
- जर्मनी
- बेल्जियम
- कई अफ्रीकी देश
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका भारत के प्रमुख रक्षा निर्यात बाजारों में शामिल हो चुका है।
भारत किन रक्षा उत्पादों का निर्यात कर रहा है?
भारत अब कई आधुनिक रक्षा प्रणालियों का निर्यात कर रहा है, जिनमें शामिल हैं—
- मिसाइल और गोला-बारूद
- ड्रोन और UAV
- रडार सिस्टम
- इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर उपकरण
- तोपखाने और हथियार
- रक्षा सब-सिस्टम
- एयरक्राफ्ट और नौसैनिक उपकरणों के पार्ट्स
- वैश्विक कंपनियों के लिए रक्षा कंपोनेंट्स
सरकार के सुधारों से मिली नई रफ्तार
रक्षा निर्यात को बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने कई अहम कदम उठाए हैं।
प्रमुख सुधार
- पॉजिटिव इंडीजिनाइजेशन लिस्ट
- स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप मॉडल
- आसान निर्यात अनुमति प्रक्रिया
- रक्षा उत्पादन विभाग का डिजिटल पोर्टल
- निजी उद्योगों को बढ़ावा
- MSME को रक्षा सप्लाई चेन से जोड़ना
वित्त वर्ष 2025-26 में 1,762 रक्षा निर्यात प्राधिकरण जारी किए गए।
2029 तक क्या है सरकार का लक्ष्य?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत का लक्ष्य वर्ष 2029 तक रक्षा निर्यात को ₹50,000 करोड़ तक पहुंचाना है।
साथ ही सरकार कुल रक्षा उत्पादन को ₹3 लाख करोड़ तक ले जाने की दिशा में भी काम कर रही है।
रक्षा निर्यात से भारत को क्या मिलेगा फायदा?
रक्षा निर्यात बढ़ने से देश को कई स्तरों पर लाभ मिल रहा है।
- विदेशी मुद्रा आय में वृद्धि
- लाखों रोजगार के अवसर
- MSME को नए ऑर्डर
- वैश्विक रक्षा बाजार में भारत की मजबूत पहचान
- आयात पर निर्भरता में कमी
- रणनीतिक साझेदारियों को मजबूती
आगे की चुनौतियां
हालांकि भारत ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है, लेकिन आगे कई चुनौतियां भी हैं।
- वैश्विक प्रतिस्पर्धा
- गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन
- अनुसंधान एवं विकास (R&D) में निवेश
- नई तकनीकों का विकास
- लंबी अवधि के निर्यात अनुबंध
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वर्तमान गति बनी रही तो भारत आने वाले वर्षों में दुनिया के प्रमुख रक्षा निर्यातकों में अपनी मजबूत जगह बना सकता है।
निष्कर्ष
भारत का ₹38,424 करोड़ का रक्षा निर्यात केवल एक आर्थिक उपलब्धि नहीं बल्कि देश की बढ़ती तकनीकी क्षमता, आत्मनिर्भरता और वैश्विक विश्वास का प्रतीक है। पिछले एक दशक में रक्षा क्षेत्र में हुए सुधारों का असर अब स्पष्ट दिखाई दे रहा है। यदि सरकार के मौजूदा प्रयास इसी तरह जारी रहे तो भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक रक्षा विनिर्माण और निर्यात का प्रमुख केंद्र बन सकता है।

