दिल्ली EV पॉलिसी 2026: दूसरे राज्यों के खरीदारों पर सख्ती, 3 साल तक वाहन ट्रांसफर पर रोक
नई दिल्ली। राजधानी में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने और प्रदूषण कम करने के उद्देश्य से दिल्ली सरकार ने दिल्ली EV पॉलिसी 2026 लागू कर दी है। यह नई नीति 1 जुलाई 2026 से प्रभावी हो चुकी है और 31 मार्च 2030 तक लागू रहेगी।
नई नीति का सबसे बड़ा बदलाव यह है कि दिल्ली सरकार की सब्सिडी लेकर खरीदे गए इलेक्ट्रिक वाहन को अगले तीन वर्षों तक किसी दूसरे राज्य में ट्रांसफर नहीं किया जा सकेगा। सरकार का मानना है कि इससे दिल्ली के टैक्सपेयर्स के पैसे का लाभ केवल राजधानी को मिलेगा और सब्सिडी का गलत इस्तेमाल रुकेगा।
दिल्ली EV पॉलिसी 2026 में क्या बदला?
नई नीति में सरकार ने केवल सब्सिडी देने पर ही नहीं बल्कि उसके सही उपयोग पर भी जोर दिया है। पहले कई लोग दिल्ली से सब्सिडी लेकर वाहन खरीदते थे और बाद में उसे अपने गृह राज्य में ट्रांसफर करवा लेते थे।
अब यदि किसी खरीदार ने दिल्ली सरकार की खरीद प्रोत्साहन (Purchase Incentive) योजना का लाभ लिया है तो तीन साल तक उस वाहन के लिए NOC जारी नहीं की जाएगी। यानी वाहन को दूसरे राज्य में री-रजिस्टर नहीं कराया जा सकेगा।
सरकार का कहना है कि इस कदम से सब्सिडी का उद्देश्य पूरा होगा और दिल्ली की हवा को साफ बनाने में वास्तविक मदद मिलेगी।
दिल्ली EV पॉलिसी 2026 के तहत कितनी मिलेगी सब्सिडी?
इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर
- पहले वर्ष: ₹30,000 तक
- दूसरे वर्ष: ₹20,000 तक
- तीसरे वर्ष: ₹10,000 तक
इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर
- पहले वर्ष: ₹50,000
- दूसरे वर्ष: ₹40,000
- तीसरे वर्ष: ₹30,000
इलेक्ट्रिक कमर्शियल ट्रक (N1 Category)
- पहले वर्ष: ₹1 लाख तक
सरकार सब्सिडी सीधे DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से लाभार्थियों के बैंक खाते में भेजेगी।
पुराने वाहन स्क्रैप करने पर मिलेगा अतिरिक्त लाभ
नई नीति में स्क्रैपेज इंसेंटिव भी शामिल किया गया है।
यदि कोई व्यक्ति BS-IV या उससे पुराने वाहन को स्क्रैप कर नई EV खरीदता है तो उसे अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलेगा।
| वाहन | स्क्रैपेज इंसेंटिव |
|---|---|
| इलेक्ट्रिक कार | ₹1 लाख |
| N1 ट्रक | ₹50,000 |
| थ्री-व्हीलर | ₹25,000 |
| टू-व्हीलर | ₹10,000 |
रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन में बड़ी राहत
दिल्ली सरकार ने ₹30 लाख तक की प्योर इलेक्ट्रिक कारों पर रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क में 100 प्रतिशत छूट जारी रखने का फैसला किया है।
हालांकि, हाइब्रिड वाहनों को इस योजना में शामिल नहीं किया गया है। सरकार का स्पष्ट फोकस पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना है।
कब से बंद होंगे पेट्रोल और CNG वाहन?
नई नीति के तहत चरणबद्ध तरीके से पारंपरिक वाहनों का पंजीकरण सीमित किया जाएगा।
1 जनवरी 2027 से
- नए थ्री-व्हीलर केवल इलेक्ट्रिक होंगे।
- नए N1 लाइट गुड्स व्हीकल भी केवल इलेक्ट्रिक रजिस्टर होंगे।
1 अप्रैल 2028 से
- दिल्ली में नए टू-व्हीलर का रजिस्ट्रेशन केवल इलेक्ट्रिक वाहनों का होगा।
फिलहाल निजी चार पहिया वाहनों पर यह नियम लागू नहीं किया गया है।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर रहेगा बड़ा निवेश
सरकार ने पूरे दिल्ली में 32,000 सार्वजनिक EV चार्जिंग पॉइंट स्थापित करने का लक्ष्य रखा है।
इसके अलावा—
- सरकारी विभागों में EV को बढ़ावा मिलेगा।
- स्कूलों और बड़े फ्लीट ऑपरेटरों को EV अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
- नई सरकारी बसें केवल इलेक्ट्रिक खरीदी जाएंगी।
- EV सेल और हाई पावर कमेटी नीति के क्रियान्वयन की निगरानी करेंगी।
दिल्ली सरकार ने NOC नियम क्यों लागू किया?
सरकार के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में बड़ी संख्या में ऐसे मामले सामने आए, जिनमें दूसरे राज्यों के लोगों ने दिल्ली में सब्सिडी लेकर EV खरीदी और बाद में उसे अपने राज्य में ट्रांसफर कर दिया।
इस वजह से दिल्ली के टैक्सपेयर्स के पैसे का लाभ दूसरे राज्यों को मिलने लगा।
नई नीति इस व्यवस्था को पूरी तरह रोकने के लिए बनाई गई है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सब्सिडी देने से EV अपनाने की रफ्तार सीमित रहती है। इसलिए दिल्ली सरकार ने अब नियमों को भी सख्त किया है।
हालांकि, कुछ वाहन डीलर्स का कहना है कि घटती सब्सिडी और तीन साल के ट्रांसफर प्रतिबंध से शुरुआती बिक्री प्रभावित हो सकती है।
दूसरी ओर पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यह नीति दिल्ली में वायु प्रदूषण कम करने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है।
दिल्लीवासियों को क्या फायदा होगा?
नई नीति से दिल्ली के लोगों को कई लाभ मिलेंगे।
- इलेक्ट्रिक वाहन खरीदना सस्ता होगा।
- रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन में राहत मिलेगी।
- पुराने वाहन बदलने पर अतिरिक्त बोनस मिलेगा।
- शहर में चार्जिंग स्टेशन तेजी से बढ़ेंगे।
- प्रदूषण और ईंधन खर्च दोनों में कमी आएगी।
आगे क्या हैं चुनौतियां?
हालांकि नीति महत्वाकांक्षी है, लेकिन कुछ चुनौतियां भी सामने हैं।
- चार्जिंग नेटवर्क का समय पर विस्तार।
- बैटरी रिसाइक्लिंग व्यवस्था।
- कम आय वर्ग के लिए आसान फाइनेंसिंग।
- अन्य राज्यों के साथ समन्वय।
यदि इन चुनौतियों का समाधान प्रभावी ढंग से किया गया, तो दिल्ली देश में EV अपनाने का सबसे सफल मॉडल बन सकती है।
निष्कर्ष
दिल्ली EV पॉलिसी 2026 केवल सब्सिडी देने वाली योजना नहीं है, बल्कि स्वच्छ परिवहन, प्रदूषण नियंत्रण और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने की व्यापक रणनीति है। तीन साल तक वाहन ट्रांसफर पर रोक, चरणबद्ध तरीके से पेट्रोल-डीजल वाहनों का सीमित पंजीकरण और चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार इस नीति को पहले की तुलना में अधिक प्रभावी बनाते हैं। यदि इसका सफल क्रियान्वयन होता है तो यह मॉडल देश के अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।

