होर्मुज से 15 जहाज लेकर आ रहे यूरिया, DAP और सल्फर, खरीफ सीजन में किसानों को बड़ी राहत
होर्मुज से सुरक्षित निकले 15 जहाज, खाद की आपूर्ति होगी सामान्य
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में हालिया तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच देश के किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने जानकारी दी है कि यूरिया, DAP (डाय-अमोनियम फॉस्फेट) और सल्फर से लदे 15 जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुके हैं और भारत के विभिन्न बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे हैं।
सरकार का कहना है कि इन जहाजों के पहुंचने से खरीफ सीजन के दौरान उर्वरकों की उपलब्धता प्रभावित नहीं होगी और किसानों को समय पर खाद मिल सकेगी।
कितनी मात्रा में आ रहा है उर्वरक?
रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अनुसार भारत आने वाले कुल 20 जहाजों में से 15 जहाज सुरक्षित निकल चुके हैं। इनमें शामिल हैं—
- 8 जहाजों में लगभग 3.32 लाख मीट्रिक टन यूरिया
- 4 जहाजों में करीब 2.57 लाख मीट्रिक टन DAP
- 3 जहाजों में लगभग 1.11 लाख मीट्रिक टन सल्फर
बाकी पांच जहाज भी जल्द भारत के लिए रवाना किए जाएंगे। मंत्रालय ने भरोसा दिलाया है कि राज्यों की मांग के अनुसार खाद की आपूर्ति लगातार जारी रहेगी।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
वैश्विक व्यापार का अहम मार्ग
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। इसी रास्ते से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस और उर्वरक संबंधी कच्चा माल दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचता है।
हाल के पश्चिम एशिया तनाव के दौरान इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई थी, जिससे भारत सहित कई देशों की सप्लाई चेन पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई थी।
भारत के लिए क्यों अहम है यह खेप?
भारत अपनी उर्वरक जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। खासकर यूरिया और DAP की मांग खरीफ सीजन में काफी बढ़ जाती है।
इन जहाजों के समय पर पहुंचने से—
- किसानों को खाद की कमी नहीं होगी।
- खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित नहीं होगी।
- बाजार में कीमतों पर दबाव कम रहेगा।
- राज्यों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराया जा सकेगा।
प्राकृतिक गैस की आपूर्ति भी सामान्य
सरकार ने बताया कि प्राकृतिक गैस की सप्लाई पूरी तरह सामान्य हो चुकी है। प्राकृतिक गैस यूरिया उत्पादन का प्रमुख कच्चा माल है।
गैस आपूर्ति सामान्य होने से देश के उर्वरक संयंत्र पूरी क्षमता के साथ उत्पादन कर रहे हैं। इससे घरेलू उत्पादन भी मजबूत हुआ है और आयात पर दबाव कम हुआ है।
अतिरिक्त आयात से मजबूत हुआ स्टॉक
सरकार ने उर्वरक उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कई देशों से अतिरिक्त आयात की व्यवस्था भी की है। इनमें प्रमुख रूप से—
- ओमान
- मलेशिया
- वियतनाम
- नाइजीरिया
- रूस
- मिस्र
- अल्जीरिया
- तुर्किये
- नीदरलैंड्स
- फिनलैंड
- जॉर्जिया
जैसे देशों से उर्वरकों और कच्चे माल की आपूर्ति बढ़ाई गई है।
किसानों पर क्या होगा असर?
देश में लगभग 15 से 16 करोड़ किसान परिवार खेती से जुड़े हैं। खरीफ सीजन में धान, सोयाबीन, मक्का, कपास और अन्य फसलों के लिए यूरिया तथा DAP की मांग सबसे अधिक रहती है।
सरकार के अनुसार—
- बंदरगाहों पर पहुंचने के बाद तेजी से वितरण किया जाएगा।
- राज्यों को पहले से ही रैक आवंटित किए जा रहे हैं।
- किसानों को सब्सिडी वाली खाद समय पर उपलब्ध कराई जाएगी।
इससे बुआई और फसल उत्पादन पर किसी तरह का नकारात्मक असर पड़ने की संभावना कम है।
विशेषज्ञों की क्या राय है?
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जैसे संवेदनशील समुद्री मार्गों पर अत्यधिक निर्भरता भविष्य में चुनौती बन सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार—
- घरेलू उर्वरक उत्पादन बढ़ाना जरूरी है।
- वैकल्पिक आयात मार्ग विकसित किए जाने चाहिए।
- जैविक खेती और संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देना चाहिए।
- रणनीतिक उर्वरक भंडारण पर भी ध्यान देना होगा।
सरकार की आगे की रणनीति
केंद्र सरकार का कहना है कि किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है।
आने वाले समय में सरकार का फोकस रहेगा—
- घरेलू उत्पादन बढ़ाना
- रणनीतिक उर्वरक भंडार तैयार करना
- नए आयात स्रोत विकसित करना
- सप्लाई चेन को मजबूत बनाना
- किसानों तक समय पर सब्सिडी और खाद पहुंचाना
निष्कर्ष
होर्मुज जलडमरूमध्य से 15 जहाजों का सुरक्षित भारत की ओर बढ़ना खरीफ सीजन के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। इससे यूरिया, DAP और सल्फर की उपलब्धता बनी रहेगी तथा किसानों को खाद की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
यदि मौसम अनुकूल रहता है और आपूर्ति इसी तरह जारी रहती है, तो इस खरीफ सीजन में कृषि उत्पादन पर सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है।

