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मणिपुर में असम राइफल्स पर घातक हमला: 2 जवान शहीद, कई घायल; उखरूल में सुरक्षा बलों का बड़ा सर्च ऑपरेशन

बेंगलुरु में सनसनीखेज मामला: एक रेजिडेंशियल स्कूल में 12 साल के छात्र की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, परिजनों के प्रताड़ना के आरोप के बाद पीटी (PT) टीचर पर हत्या का मुकदमा दर्ज। (ग्राफिक साभार: News Critic)
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इम्फाल/उखरूल

मणिपुर के उखरूल जिले में असम राइफल्स के काफिले पर हुए घातक हमले ने एक बार फिर राज्य की सुरक्षा व्यवस्था और उग्रवाद की चुनौती को सामने ला दिया है। घात लगाकर किए गए इस हमले में असम राइफल्स के दो जवान शहीद हो गए, जबकि कई अन्य जवान घायल हुए हैं। घटना के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा बलों ने व्यापक तलाशी अभियान शुरू कर दिया है और संदिग्ध उग्रवादियों की तलाश जारी है।

यह हमला ऐसे समय हुआ है जब मणिपुर में लंबे समय से शांति बहाल करने के प्रयास किए जा रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियां इस हमले को बेहद गंभीर मानते हुए हर पहलू की जांच कर रही हैं।

कैसे हुआ असम राइफल्स के काफिले पर हमला?

पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, हमला उखरूल जिले के नुंगशांग खोंग (लुंगशांग खोंग) क्षेत्र में दोपहर करीब 1:30 बजे हुआ। 40वीं असम राइफल्स की टुकड़ी नियमित गश्त के बाद सांगशक स्थित अपने मुख्यालय लौट रही थी।

बताया जा रहा है कि पहले सड़क किनारे लगाए गए आईईडी में विस्फोट किया गया। इसके तुरंत बाद घने जंगलों में छिपे उग्रवादियों ने जवानों पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। सुरक्षा बलों ने भी जवाबी कार्रवाई की, लेकिन हमलावर जंगल का फायदा उठाकर फरार हो गए।

हमले में दो जवान शहीद, कई घायल

इस हमले में दो बहादुर जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया।

शहीद जवान

  • वारंट ऑफिसर बलवंत सिंह
  • राइफलमैन (ड्राइवर) सीएम सिंह

इसके अलावा कई जवान घायल हुए हैं। घायलों को तत्काल नजदीकी सैन्य अस्पताल और असम राइफल्स कैंप में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी

हमले के तुरंत बाद असम राइफल्स, मणिपुर पुलिस और अन्य विशेष सुरक्षा बलों ने संयुक्त अभियान शुरू कर दिया।

सुरक्षा एजेंसियां—

  • जंगलों में कॉम्बिंग ऑपरेशन चला रही हैं।
  • ड्रोन और आधुनिक निगरानी उपकरणों का उपयोग कर रही हैं।
  • उखरूल और आसपास के संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।

फिलहाल किसी भी संगठन ने हमले की आधिकारिक जिम्मेदारी नहीं ली है।

एनएससीएन (आईएम) ने क्या कहा?

नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालिम (आईएम) ने इस हमले में अपनी भूमिका से इनकार किया है। संगठन का कहना है कि इस घटना में उसका कोई हाथ नहीं है। हालांकि सुरक्षा एजेंसियां सभी संभावित एंगल से जांच कर रही हैं।

सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की प्रतिक्रिया

घटना के बाद राज्यपाल, मुख्यमंत्री और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने हमले की कड़ी निंदा की।

सरकार ने कहा है कि—

  • दोषियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।
  • शहीद जवानों के परिवारों को हर संभव सहायता दी जाएगी।
  • सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।

केंद्र सरकार ने भी सुरक्षा एजेंसियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

क्यों संवेदनशील है उखरूल क्षेत्र?

उखरूल जिला लंबे समय से उग्रवादी गतिविधियों के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। घने जंगल, पहाड़ी इलाका और कठिन भौगोलिक परिस्थितियां सुरक्षा बलों के लिए अभियान को चुनौतीपूर्ण बनाती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा अभियानों के साथ-साथ राजनीतिक संवाद और विकास कार्यों को भी तेज करना आवश्यक है, ताकि क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित की जा सके।

मणिपुर में लगातार बनी हुई है सुरक्षा चुनौती

मई 2023 से मणिपुर जातीय हिंसा और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहा है। हालांकि कई इलाकों में हालात पहले की तुलना में सामान्य हुए हैं, लेकिन समय-समय पर होने वाले ऐसे हमले बताते हैं कि उग्रवादी गतिविधियां पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं।

सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए बेहतर खुफिया तंत्र, आधुनिक तकनीक और स्थानीय सहयोग को और मजबूत करना होगा।

निष्कर्ष

उखरूल में असम राइफल्स के काफिले पर हुआ हमला देश के लिए गंभीर चिंता का विषय है। दो जवानों की शहादत पूरे देश के लिए अपूरणीय क्षति है। सुरक्षा बल लगातार अभियान चला रहे हैं और उम्मीद की जा रही है कि हमले में शामिल लोगों को जल्द कानून के दायरे में लाया जाएगा।

देश अपने वीर जवानों के सर्वोच्च बलिदान को हमेशा सम्मान और गर्व के साथ याद रखेगा।

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