मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से झटका, राज्यसभा नामांकन बहाल करने से इनकार; बीजेपी के तीन उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित
सुप्रीम कोर्ट से झटका
नई दिल्ली/भोपाल, 12 जून 2026। मध्य प्रदेश की राज्यसभा चुनाव प्रक्रिया में कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली। शीर्ष अदालत ने उनके नामांकन रद्द किए जाने के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी और चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया। इसके साथ ही भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के तीनों उम्मीदवार—तरुण चुग, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट—निर्विरोध राज्यसभा सदस्य निर्वाचित हो गए।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब कांग्रेस लगातार दावा कर रही है कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन तकनीकी आधार पर खारिज किया गया और इसके पीछे राजनीतिक दबाव काम कर रहा था।
क्या है पूरा मामला?
मध्य प्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनाव होना था। कांग्रेस ने अपनी ओर से वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया था। नामांकन पत्रों की जांच के दौरान बीजेपी उम्मीदवार महेश केवट ने आपत्ति दर्ज कराई कि नटराजन ने अपने चुनावी शपथपत्र (फॉर्म-26) में हैदराबाद की एक अदालत में लंबित निजी शिकायत (प्राइवेट कंप्लेंट) की जानकारी नहीं दी।
आपत्ति के बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने मामले की समीक्षा की और यह कहते हुए नामांकन रद्द कर दिया कि उम्मीदवार द्वारा आवश्यक जानकारी का खुलासा नहीं किया गया है। कांग्रेस ने इस फैसले को अनुचित बताते हुए कहा कि संबंधित शिकायत पर न तो कोई एफआईआर दर्ज थी और न ही अदालत ने उस पर संज्ञान लिया था, इसलिए इसका उल्लेख करना अनिवार्य नहीं था।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों नहीं दी राहत?
नामांकन रद्द होने के बाद मीनाक्षी नटराजन ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिका में रिटर्निंग ऑफिसर के आदेश को चुनौती देते हुए नामांकन बहाल करने और चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की गई थी।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि एक बार चुनाव प्रक्रिया शुरू हो जाने के बाद न्यायालय आमतौर पर उसमें हस्तक्षेप नहीं करता। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि उम्मीदवार को कोई शिकायत है तो वह चुनाव सम्पन्न होने के बाद संबंधित हाई कोर्ट में चुनाव याचिका दायर कर सकती हैं।
कोर्ट के इस रुख के बाद कांग्रेस को तत्काल राहत मिलने की उम्मीद खत्म हो गई।
कांग्रेस ने फैसले पर उठाए सवाल
सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि पूरे मामले में निष्पक्षता नहीं बरती गई। कांग्रेस का कहना है कि मामूली तकनीकी आधार पर एक प्रमुख विपक्षी उम्मीदवार का नामांकन रद्द कर दिया गया, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित हुई।
मीनाक्षी नटराजन ने भी कहा कि वे कानूनी विकल्पों पर विचार करेंगी और आगे की रणनीति पार्टी नेतृत्व के साथ मिलकर तय की जाएगी।
बीजेपी ने क्या कहा?
बीजेपी ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि चुनावी नियम सभी उम्मीदवारों पर समान रूप से लागू होते हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि नामांकन पत्र और शपथपत्र में सही और पूरी जानकारी देना उम्मीदवार की जिम्मेदारी है।
बीजेपी के अनुसार, रिटर्निंग ऑफिसर ने कानून और नियमों के अनुरूप निर्णय लिया है तथा सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी इसी बात की पुष्टि करता है।
बिना मतदान के जीती बीजेपी
मध्य प्रदेश विधानसभा में बीजेपी के पास स्पष्ट बहुमत है, लेकिन कांग्रेस उम्मीदवार का नामांकन रद्द होने के बाद मुकाबला पूरी तरह समाप्त हो गया। नामांकन वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद बीजेपी के तीनों उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिए गए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह परिणाम राज्य की राजनीति में बीजेपी की मजबूत स्थिति को दर्शाता है, जबकि कांग्रेस के लिए यह एक बड़ा संगठनात्मक और राजनीतिक झटका है।
कानूनी विशेषज्ञों की राय
कानूनी जानकारों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट का फैसला चुनाव कानूनों के स्थापित सिद्धांतों के अनुरूप है। आमतौर पर न्यायालय चुनाव प्रक्रिया के दौरान हस्तक्षेप से बचते हैं और उम्मीदवारों को चुनाव के बाद चुनाव याचिका दायर करने का विकल्प दिया जाता है।
हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह बहस का विषय हो सकता है कि केवल निजी शिकायत को चुनावी शपथपत्र में अनिवार्य रूप से घोषित किया जाना चाहिए था या नहीं।
आगे क्या होगा?
मीनाक्षी नटराजन अब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में चुनाव याचिका दाखिल कर सकती हैं। हालांकि राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, इसलिए कानूनी लड़ाई लंबी चल सकती है। इस मामले ने चुनावी पारदर्शिता, उम्मीदवारों के खुलासे और रिटर्निंग ऑफिसर की शक्तियों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
निष्कर्ष
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होना और सुप्रीम कोर्ट से राहत न मिलना कांग्रेस के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। वहीं बीजेपी ने बिना मतदान के राज्यसभा की तीनों सीटें जीतकर अपनी राजनीतिक बढ़त और मजबूत कर ली है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि कांग्रेस आगे कानूनी मोर्चे पर क्या कदम उठाती है।
उनके खिलाफ लंबित निजी शिकायत की जानकारी चुनावी शपथपत्र में नहीं देने के आरोप में रिटर्निंग ऑफिसर ने नामांकन रद्द किया था।
अदालत ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद न्यायालय हस्तक्षेप नहीं कर सकता और उचित उपाय चुनाव याचिका है।
मध्य प्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनाव होना था।
तरुण चुग, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट निर्विरोध राज्यसभा सदस्य निर्वाचित हुए हैं।
वे प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत संबंधित हाई कोर्ट में चुनाव याचिका दायर कर सकती हैं।

