नीरव मोदी को ब्रिटेन कोर्ट का बड़ा झटका, बैंक ऑफ इंडिया को चुकाने होंगे 100 करोड़ रुपये
लंदन हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
लंदन, 24 जून 2026। पंजाब नेशनल बैंक (PNB) घोटाले के मुख्य आरोपी और भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को ब्रिटेन की अदालत से एक और बड़ा झटका लगा है। लंदन हाई कोर्ट ने बैंक ऑफ इंडिया के पक्ष में फैसला सुनाते हुए नीरव मोदी को 10.7 मिलियन डॉलर (करीब 100 करोड़ रुपये से अधिक) का भुगतान करने का आदेश दिया है।
यह मामला नीरव मोदी की दुबई स्थित कंपनी फायरस्टार डायमंड FZE को दिए गए ऋण और उसकी व्यक्तिगत गारंटी से जुड़ा हुआ है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गारंटर होने के नाते नीरव मोदी ऋण की मूल राशि और ब्याज दोनों के लिए जिम्मेदार हैं।
क्या है पूरा मामला?
फायरस्टार डायमंड को दिया गया था ऋण
बैंक ऑफ इंडिया ने जुलाई 2012 में नीरव मोदी की दुबई स्थित कंपनी फायरस्टार डायमंड FZE को ऋण प्रदान किया था। इसके बाद 3 अगस्त 2013 को नीरव मोदी ने इस ऋण के लिए व्यक्तिगत गारंटी दी थी।
जब वर्ष 2018 में पंजाब नेशनल बैंक घोटाला सामने आया, तब बैंक ने ऋण की तत्काल वापसी की मांग की। मार्च और अप्रैल 2018 में कंपनी और नीरव मोदी को डिमांड नोटिस भेजे गए, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
कोर्ट ने क्यों खारिज की नीरव मोदी की दलीलें?
सुनवाई के दौरान नीरव मोदी ने तीन प्रमुख तर्क दिए—
- व्यक्तिगत गारंटी लागू नहीं होती।
- डिमांड नोटिस वैध रूप से प्राप्त नहीं हुए।
- ऋण समाप्त करने के लिए कोई “मटेरियल एडवर्स इफेक्ट” नहीं हुआ।
हालांकि, जस्टिस साइमन टिंकलर ने इन सभी दलीलों को खारिज कर दिया। अदालत ने माना कि 2018 में PNB घोटाले के सामने आने के बाद फायरस्टार ग्रुप की कंपनियों की वित्तीय स्थिति गंभीर रूप से प्रभावित हुई थी।
नीरव मोदी का ईमेल बना अहम सबूत
खुद स्वीकार की थी वित्तीय मुश्किलें
कोर्ट में पेश दस्तावेजों के अनुसार नीरव मोदी ने 17 फरवरी 2018 को बैंक को भेजे एक ईमेल में स्वीकार किया था कि मीडिया कवरेज, जांच एजेंसियों की कार्रवाई और बैंकिंग प्रतिबंधों के कारण उनकी कंपनियों का कारोबार प्रभावित हुआ है।
अदालत ने माना कि यह ईमेल स्वयं इस बात का प्रमाण है कि कंपनी की ऋण चुकाने की क्षमता प्रभावित हुई थी।
डिमांड नोटिस को लेकर भी कोर्ट संतुष्ट
कोर्ट ने कहा कि बैंक द्वारा भेजे गए सभी डिमांड नोटिस उचित तरीके से पहुंचाए गए थे। अक्टूबर 2025 का नोटिस नीरव मोदी की वर्तमान जेल HMP Thameside में भी भेजा गया था।
इसके अलावा, अप्रैल 2018 के नोटिस की प्रति स्वयं नीरव मोदी ने 2019 में अपने वकीलों को उपलब्ध कराई थी। इसलिए अदालत ने नोटिस न मिलने के तर्क को भी अस्वीकार कर दिया।
PNB घोटाला क्या था?
भारत के सबसे बड़े बैंकिंग घोटालों में से एक
नीरव मोदी का नाम 2018 में सामने आए पंजाब नेशनल बैंक घोटाले से जुड़ा है। आरोप है कि उन्होंने फर्जी लेटर्स ऑफ अंडरटेकिंग (LoU) के जरिए विदेशी बैंकों से हजारों करोड़ रुपये का क्रेडिट हासिल किया।
इस घोटाले की अनुमानित राशि लगभग 2 बिलियन डॉलर (14,000 करोड़ रुपये से अधिक) बताई जाती है।
सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने नीरव मोदी पर धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगाए हैं।
प्रत्यर्पण मामले में भी लगातार झटके
ब्रिटेन में जेल में बंद हैं नीरव मोदी
नीरव मोदी मार्च 2019 से लंदन में हिरासत में हैं। भारत सरकार उनके प्रत्यर्पण (Extradition) की मांग कर रही है।
ब्रिटेन की अदालतें उनकी कई जमानत याचिकाएं और अपीलें पहले ही खारिज कर चुकी हैं। मार्च 2026 में भी हाई कोर्ट ने उनके प्रत्यर्पण मामले को दोबारा खोलने की मांग अस्वीकार कर दी थी।
बैंक ऑफ इंडिया के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
यह फैसला भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिए बड़ी कानूनी जीत माना जा रहा है। इससे विदेशी अदालतों में भारतीय बैंकों की ऋण वसूली प्रक्रिया को मजबूती मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय उन आर्थिक अपराधियों के लिए भी कड़ा संदेश है जो देश छोड़कर विदेशों में शरण लेने की कोशिश करते हैं।
भारत में जारी है संपत्तियों की जब्ती
भारत में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और सीबीआई लगातार नीरव मोदी की संपत्तियों को जब्त कर रहे हैं। फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स एक्ट के तहत उनकी कंपनियों, आभूषणों और अन्य संपत्तियों पर कार्रवाई जारी है।
सरकार विदेशी देशों के सहयोग से बैंकिंग धोखाधड़ी से जुड़ी रकम की वसूली की कोशिश कर रही है।
आगे क्या होगा?
नीरव मोदी इस फैसले के खिलाफ अपील कर सकते हैं, लेकिन उनकी पिछली कई अपीलें ब्रिटेन की अदालतों में खारिज हो चुकी हैं। ऐसे में बैंक ऑफ इंडिया को कानूनी रूप से राहत मिली है और भविष्य में राशि की वसूली का रास्ता और मजबूत हुआ है।
निष्कर्ष
लंदन हाई कोर्ट का यह फैसला नीरव मोदी के लिए एक और बड़ा कानूनी झटका साबित हुआ है। बैंक ऑफ इंडिया को 100 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान करने का आदेश न केवल भारतीय बैंकों की बड़ी जीत है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि आर्थिक अपराधियों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी कार्रवाई प्रभावी हो रही है। आने वाले समय में नीरव मोदी के प्रत्यर्पण और बैंक रिकवरी मामलों पर सभी की नजरें बनी रहेंगी।
ब्रिटेन की अदालत ने नीरव मोदी को बैंक ऑफ इंडिया को 10.7 मिलियन डॉलर यानी 100 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान करने का आदेश दिया है।
यह मामला फायरस्टार डायमंड FZE को दिए गए ऋण और नीरव मोदी द्वारा दी गई व्यक्तिगत गारंटी से संबंधित है।
नीरव मोदी वर्तमान में लंदन की HMP Thameside जेल में बंद हैं और भारत प्रत्यर्पण का सामना कर रहे हैं।
PNB घोटाले की अनुमानित राशि लगभग 14,000 करोड़ रुपये से अधिक बताई जाती है।
हां, वे अपील कर सकते हैं, लेकिन उनकी कई पूर्व अपीलें ब्रिटेन की अदालतों द्वारा खारिज की जा चुकी हैं।

