छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में सांपों का बढ़ा खतरा, 45 दिन में 700 रेस्क्यू; रोज मिल रहीं 40–50 कॉल
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में इन दिनों सांप निकलने की घटनाओं में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। पिछले 45 दिनों में करीब 700 सांपों का सफल रेस्क्यू किया गया है, जबकि रेस्क्यू टीमों को प्रतिदिन 40 से 50 कॉल मिल रही हैं। लगातार बढ़ रही घटनाओं ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के मौसम में जलभराव, नमी और प्राकृतिक आवासों में बदलाव के कारण सांप आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आने लगते हैं।
प्रशासन और वन विभाग लोगों से सतर्क रहने की अपील कर रहे हैं। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि सांप दिखने पर घबराने के बजाय तुरंत रेस्क्यू टीम या वन विभाग को सूचना दें।
मानसून के साथ बढ़ीं सांप निकलने की घटनाएं
रायगढ़ में बारिश के मौसम के दौरान सांपों का घरों, खेतों, गोदामों और बस्तियों में निकलना आम बात बन गया है। लगातार हो रही बारिश के कारण बिलों में पानी भर जाता है, जिससे सांप सुरक्षित स्थान की तलाश में रिहायशी इलाकों तक पहुंच जाते हैं।
विशेषज्ञ बताते हैं कि मानसून के दौरान सांपों की सक्रियता सामान्य दिनों की तुलना में अधिक होती है। यही कारण है कि इस समय रेस्क्यू कॉल की संख्या भी तेजी से बढ़ जाती है।
45 दिनों में 700 से अधिक सांपों का रेस्क्यू
रेस्क्यू टीमों के अनुसार पिछले डेढ़ महीने में लगभग 700 सांपों को सुरक्षित पकड़कर जंगलों में छोड़ा गया है। यह आंकड़ा बताता है कि जिले में सांप निकलने की घटनाएं किस स्तर तक बढ़ चुकी हैं।
प्रतिदिन औसतन 40 से 50 कॉल मिलने के कारण रेस्क्यू टीमों को लगातार विभिन्न इलाकों में जाना पड़ रहा है। कई बार एक ही दिन में दर्जनों स्थानों पर अलग-अलग प्रकार के सांपों को पकड़ने की नौबत आती है।
किन जगहों से सबसे ज्यादा मिल रहे सांप
रेस्क्यू टीमों के अनुसार सबसे अधिक कॉल निम्न स्थानों से आ रही हैं—
- रिहायशी कॉलोनियां
- गांवों के कच्चे मकान
- खेत और खलिहान
- गोदाम और फैक्ट्री परिसर
- स्कूल और सरकारी कार्यालय
- पानी जमा होने वाले इलाके
- लकड़ी और कबाड़ रखने वाले स्थान
इन स्थानों पर नमी और छिपने की पर्याप्त जगह होने के कारण सांप आसानी से पहुंच जाते हैं।
वन विभाग और रेस्क्यू टीम लगातार सक्रिय
बढ़ती घटनाओं को देखते हुए वन विभाग और प्रशिक्षित स्नेक रेस्क्यू टीम लगातार लोगों की मदद कर रही हैं। सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंचकर सांप को सुरक्षित तरीके से पकड़ती है और उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ देती है।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि लोगों को स्वयं सांप पकड़ने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इससे हादसे की संभावना बढ़ जाती है।
विशेषज्ञों ने बताई बढ़ती घटनाओं की वजह
विशेषज्ञों के अनुसार सांपों के लगातार मिलने के पीछे कई कारण हैं।
लगातार बारिश और जलभराव
बारिश के दौरान बिलों में पानी भरने से सांप बाहर निकल आते हैं और सूखी जगहों की तलाश में घरों तक पहुंच जाते हैं।
जंगल और प्राकृतिक आवास में बदलाव
शहरीकरण और निर्माण कार्यों के कारण कई प्राकृतिक आवास प्रभावित हो रहे हैं। इससे वन्यजीवों की आवाजाही आबादी वाले क्षेत्रों तक बढ़ रही है।
भोजन की तलाश
जहां चूहे और अन्य छोटे जीव अधिक होते हैं, वहां सांपों के पहुंचने की संभावना भी बढ़ जाती है।
सांप दिखे तो क्या करें
विशेषज्ञों ने लोगों के लिए कुछ महत्वपूर्ण सलाह जारी की है—
- घबराएं नहीं और सुरक्षित दूरी बनाए रखें।
- सांप को मारने या पकड़ने की कोशिश बिल्कुल न करें।
- तुरंत वन विभाग या अधिकृत स्नेक रेस्क्यू टीम को सूचना दें।
- बच्चों और पालतू जानवरों को उस स्थान से दूर रखें।
- सांप पर नजर रखें लेकिन उसके पास न जाएं।
- घर के आसपास साफ-सफाई बनाए रखें।
सांप के काटने पर क्या करें
यदि किसी व्यक्ति को सांप काट ले तो समय पर उपचार बेहद जरूरी होता है।
- मरीज को शांत रखें।
- प्रभावित अंग को कम से कम हिलाएं।
- तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचें।
- झाड़-फूंक या घरेलू इलाज पर भरोसा न करें।
- एंटी-स्नेक वेनम केवल डॉक्टर की सलाह पर ही दिया जाता है।
प्रशासन ने जारी की सावधानी संबंधी अपील
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि बरसात के मौसम में अतिरिक्त सतर्कता बरतें। घर के आसपास झाड़ियां, कबाड़ और पानी जमा न होने दें। रात में बाहर निकलते समय टॉर्च का उपयोग करें और खेतों में काम करते समय ऊंचे जूते पहनें।
वन विभाग ने यह भी कहा है कि किसी भी वन्यजीव को नुकसान पहुंचाना कानूनन अपराध है। इसलिए सांप दिखने पर उसे सुरक्षित बचाने के लिए प्रशिक्षित टीम को बुलाना ही सबसे सही तरीका है।
पर्यावरण संतुलन में सांपों की अहम भूमिका
विशेषज्ञों का कहना है कि सांप पर्यावरण के लिए बेहद महत्वपूर्ण जीव हैं। ये चूहों और अन्य छोटे जीवों की संख्या नियंत्रित रखते हैं, जिससे कृषि और खाद्यान्न भंडारण को भी लाभ मिलता है।
अधिकांश सांप इंसानों पर बिना कारण हमला नहीं करते। वे केवल खतरा महसूस होने पर ही बचाव की कोशिश करते हैं।
निष्कर्ष
रायगढ़ में पिछले 45 दिनों के दौरान 700 सांपों का रेस्क्यू और प्रतिदिन 40–50 कॉल मिलना इस बात का संकेत है कि मानसून के दौरान लोगों को विशेष सतर्क रहने की आवश्यकता है। वन विभाग और रेस्क्यू टीम लगातार अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं, लेकिन नागरिकों की जागरूकता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। सांप दिखने पर घबराने के बजाय संबंधित विभाग को सूचना देना ही सबसे सुरक्षित और जिम्मेदार कदम होगा।

