May 17, 2026

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पाकिस्तानी मूल के कनाडाई प्रशिद्ध लेखक और प्रसारक तारिक फ़तेह का निधन

प्रशिद्ध लेखक और प्रसारक तारिक फ़तेह का कल सोमवार को 73 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वे पिछले काफी समय से कैंसर से पीड़ित चल रहे थे। तारिक फ़तेह के निधन की जानकारी उनकी बेटी नताशा फ़तेह ने दी।

आरएसएस ने जताया शोक

तारिक फ़तेह के निधन पर आरएसएस ने शोक व्यक्त किया। आरएसएस ने कहा की मीडिया और साहित्य जगत में  योगदान को हमेशा याद रखा जायेगा।आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसवाले ने ट्विटर पर ट्वीट कर कहा कि तारिक फ़तेह एक मशहूर लेखक, विचारक और टिप्पणीकार थे। साहित्य जगत और मीडिया में उन्हें उनके खुले विचारों के लिए हमेशा याद किया जायेगा। वे अपने पुरे जीवन में अपने सिद्धांत और विश्वास के लिए प्रशिद्ध रहे। होसवाले ने आगे कहा कि मैं उनके निधन पर शोक व्यक्त करता हूँ। और दिवंगत आत्मा की सद्गति के  प्रार्थना करता हूँ। उनके दोस्त, परिवार वाले और उनके चाहने वाले उन्हें हमेशा याद रखेंगे।

तारिक फ़तेह की बेटी ने  बताया हिंदुस्तान का बेटा

तारिक फ़तेह की बेटी ने ट्वीट कर कहा ” पंजाब का शेर, हिंदुस्तान का बेटा, कनाडा के प्रेमी, सच बोलने वाले, न्याय के लिए लड़ने वाले, दलितों और शोषितों की आवाज़ तारिक फ़तेह अब हमारे बीच नहीं रहे”। उनका काम, उनकी क्रांति उन सभी  साथ जारी रहेगी। जो उन्हें जानते और प्यार करते थे। वे भारत के प्रति भी उदारवादी रुख रखते थे जिस कारण वह भारत में भी बहुत प्रशिद्ध थे।

तारिक फ़तेह का इतिहास

तारिक फ़तेह के पूर्वज मुंबई के रहने वाले थे। 1947 के विभाजन में वें पाकिस्तान चले गए और कराची में जा कर बस गए। तारिक फ़तेह का जन्म 20 नवंबर 1949 में कराची में हुआ। तारिक फ़तेह की प्रारम्भिक शिक्षा कराची में  हुयी। कराची यूनिवर्सिटी से उन्होंने बायोकेमिस्ट्री की डिग्री ली। लेकिन बाद में उन्होंने पत्रकारिता को अपना पेशा बनाया।

उन्होंने पाकिस्तान के एक टीवी चैनल में भी काम किया। इससे पहले उन्होंने कराची सन नाम के एक अखवार में रिपोर्टिंग भी की। खोजी पत्रकारिता के कारण कई वार जेल भी गए। बाद में उन्होंने पाकिस्तान छोड़ दिया और सऊदी अरब चले गए। और बाद में 1987 में वे कनाडा चले गए और वहीँ बस गए।

तारिक फ़तेह की पहचान हमेशा पाकिस्तानी मूल के कनाडाई लेखक, प्रसारक और सेक्कुलर उदारवादी कार्यकर्त्ता के रूप में होती रही है। वे इस्लामिक अतिवाद के खिलाप बेख़ौफ़ बोलते और लिखते थे।चेजिंग अ मिराज : द ट्रैजिक इल्लूझन ऑफ ऐन इस्लामिक स्टेट उनकी प्रशिद्ध किताब है। उन्होंने बलूचिस्तान के मानवाधिकार के हनन पर भी खूब लिखा। वें आजाद बलूचिस्तान के पक्षधर थे।

पाकिस्तान के कट्टर आलोचक थे

उन्होंने कई बार पाकिस्तान को आईना भी दिखाया। वें पाकिस्तान के कट्टर आलोचकों में से एक थे। भारत और हिन्दुओं के प्रति उनका रुख हमेशा सकारात्मक रहा। वें ज्यादातर बड़े मुद्दों पर अपने विचार रखते थे। इस्लाम की कुछ परम्पराओं को लेकर उनके विचार विवाद का विषय भी बने। बहुत से मुद्दों पर उन्होंने भारत का समर्थन भी किया। उन्होंने कई बार मोदी सरकार की सराहना भी की।

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